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पहिए थमे, सांसें अटकीं: निजी बस संचालकों की हड़ताल से राजस्थान में परिवहन संकट

श्रीगंगानगर। राजस्थान के परिवहन मानचित्र पर आज एक बड़ा गतिरोध देखने को मिल रहा है। मंगलवार, 24 फरवरी 2026 की आधी रात से श्रीगंगानगर सहित पूरे प्रदेश में निजी बस संचालकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। ‘चक्का जाम’ के इस आह्वान ने न केवल शहरों की रफ्तार रोक दी है, बल्कि ग्रामीण अंचलों की जीवनरेखा मानी जाने वाली निजी बस सेवा को पूरी तरह ठप कर दिया है। बस स्टैंडों पर सन्नाटा पसरा है और हजारों यात्री बीच रास्ते में फंसे हुए हैं।


हड़ताल की जड़: परिवहन विभाग की ‘सख्ती’ या ‘अति’?

निजी बस संचालकों और सरकार के बीच चल रहा यह विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ है। पिछले कुछ हफ्तों से परिवहन विभाग ने प्रदेश भर में एक विशेष जांच अभियान चलाया हुआ है। संचालकों का आरोप है कि विभाग ‘सख्ती’ के नाम पर उन्हें प्रताड़ित कर रहा है। हड़ताल के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. ओवरहैंग और लगेज पर कार्रवाई: विभाग उन बसों पर भारी जुर्माना लगा रहा है जिनकी छतों पर सामान (लगेज) लदा होता है या जिनका ढांचा तय मानकों से बाहर (ओवरहैंग) निकला होता है। संचालकों का तर्क है कि ग्रामीण क्षेत्रों में यात्री अपना सामान साथ लेकर चलते हैं और यह उनकी आय का एक हिस्सा है।

  2. परमिट संबंधी विवाद: कई ऑपरेटरों का दावा है कि उनके वैध परमिट होने के बावजूद तकनीकी बारीकियों के नाम पर बसों को सीज किया जा रहा है।

  3. भारी भरकम जुर्माना: हाल ही में संशोधित नियमों के तहत जुर्मानें की राशि इतनी अधिक कर दी गई है कि बस चलाना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

  4. टैक्स में छूट की मांग: डीजल की बढ़ती कीमतों और बीमा प्रीमियम में उछाल के बीच संचालक सरकार से रोड टैक्स में रियायत की मांग कर रहे हैं।

श्रीगंगानगर: ग्रामीण इलाकों में हाहाकार

श्रीगंगानगर जिले की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां के सैकड़ों गांव पूरी तरह से निजी बसों पर निर्भर हैं। राजस्थान लोक परिवहन सेवा और अन्य निजी बसों के बंद होने से स्थिति भयावह हो गई है:

  • छात्र और कर्मचारी परेशान: पदमपुर, रायसिंहनगर, घड़साना और अनूपगढ़ मार्ग पर चलने वाले हजारों छात्र और सरकारी कर्मचारी आज अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके। कई परीक्षाओं और जरूरी कामों के लिए निकले लोगों को निजी टैक्सियों का सहारा लेना पड़ा, जो मनमाना किराया वसूल रहे हैं।

  • मरीजों की आफत: गांवों से जिला अस्पताल (श्रीगंगानगर) आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए यह हड़ताल मुसीबत बन गई है। एंबुलेंस के अलावा और कोई साधन उपलब्ध नहीं होने से आपातकालीन स्थितियां पैदा हो रही हैं।

  • मंडी व्यापार पर असर: कृषि प्रधान जिला होने के कारण व्यापारिक गतिविधियों के लिए व्यापारियों और किसानों का आवागमन बाधित हुआ है, जिससे स्थानीय मंडियों में भी चहल-पहल कम देखी गई।

बस स्टैंडों का मंजर: यात्रियों की बेबसी

श्रीगंगानगर के मुख्य बस स्टैंड और निजी बस अड्डों पर आज सुबह से ही यात्रियों की भारी भीड़ देखी गई। कई परिवार छोटे बच्चों और भारी सामान के साथ घंटों से बस के इंतजार में बैठे हैं। रोडवेज बसों पर दबाव अचानक बढ़ गया है, जिससे सरकारी बसें खचाखच भरी हुई हैं और लोग छतों पर बैठकर यात्रा करने को मजबूर हैं।

प्रशासन और संचालकों का रुख

निजी बस एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं करती और ‘इंस्पेक्टर राज’ खत्म नहीं होता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। दूसरी ओर, परिवहन विभाग के अधिकारियों का स्पष्ट रुख है कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ओवरलोडिंग और अवैध परमिट के खिलाफ कार्रवाई नियमों के तहत ही की जा रही है।

निष्कर्ष और समाधान की राह

परिवहन किसी भी समाज की रीढ़ होता है। निजी बस संचालकों की हड़ताल ने यह साबित कर दिया है कि रोडवेज के सीमित बेड़े के साथ राज्य की पूरी आबादी को संभालना असंभव है। सरकार को चाहिए कि वह संचालकों के साथ मेज पर बैठकर व्यावहारिक समाधान निकाले, ताकि नियमों का पालन भी हो और आम जनता को इस तरह की भारी असुविधा का सामना न करना पड़े।

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