
श्रीगंगानगर जिले में विकास और जनसुविधाओं के दावों के बीच एक बार फिर आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पदमपुर-श्रीगंगानगर मार्ग पर स्थित टोल प्लाजा को हटाने की मांग अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेती जा रही है। टोल संघर्ष समिति ने प्रशासन और सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए अल्टीमेटम जारी किया है कि यदि 4 मार्च की रात 12:00 बजे तक टोल हटाने के आधिकारिक आदेश जारी नहीं किए गए, तो 5 मार्च से इस महत्वपूर्ण मार्ग पर अनिश्चितकालीन चक्का जाम शुरू कर दिया जाएगा।
विवाद की जड़: जनता पर दोहरी मार?
पदमपुर और श्रीगंगानगर के बीच की दूरी कम होने के बावजूद यहाँ टोल वसूली को लेकर स्थानीय निवासियों में लंबे समय से रोष है। संघर्ष समिति का तर्क है कि इस मार्ग का उपयोग दैनिक आधार पर किसान, छात्र, दूध विक्रेता और छोटे व्यापारी करते हैं। बार-बार टोल का भुगतान करना न केवल आर्थिक रूप से बोझिल है, बल्कि समय की बर्बादी का कारण भी बनता है।
समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि सड़क की हालत और निर्माण की लागत के आधार पर यह टोल काफी पहले ही समाप्त हो जाना चाहिए था, लेकिन प्रशासनिक शिथिलता के कारण जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है।
अल्टीमेटम और संघर्ष की रणनीति
संघर्ष समिति ने अपनी रणनीति साफ कर दी है। समिति के अनुसार, प्रशासन को पर्याप्त समय दिया जा चुका है और अब केवल ठोस कार्रवाई का इंतजार है।
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डेडलाइन: 4 मार्च, रात 12:00 बजे।
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कार्रवाई: यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो 5 मार्च की सुबह से सड़क के बीचों-बीच धरना दिया जाएगा और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप कर दी जाएगी।
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समर्थन: इस आंदोलन को क्षेत्र के किसान संगठनों, व्यापार मंडलों और ऑटो-टैक्सी यूनियन का भी समर्थन प्राप्त हो रहा है।
प्रशासनिक सतर्कता और पुलिस का पहरा
आंदोलन की गंभीरता और चक्का जाम की चेतावनी को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, संवेदनशील स्थानों और टोल प्लाजा के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने की योजना बनाई गई है ताकि कानून व्यवस्था न बिगड़े।
प्रशासनिक अधिकारी लगातार संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ वार्ता करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि इस गतिरोध को सुलझाया जा सके और आम जनता को होने वाली परेशानी से बचाया जा सके। हालांकि, समिति का कहना है कि अब केवल “वार्ता” से काम नहीं चलेगा, उन्हें लिखित में टोल मुक्ति के आदेश चाहिए।
आम जनजीवन पर संभावित प्रभाव
यदि 5 मार्च से चक्का जाम प्रभावी होता है, तो इसका असर पूरे जिले की रसद आपूर्ति और आवागमन पर पड़ेगा:
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यातायात: श्रीगंगानगर से पदमपुर, रायसिंहनगर और गजसिंहपुर की ओर जाने वाले यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
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सब्जी और दूध की आपूर्ति: ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने वाले आवश्यक सामानों की सप्लाई रुक सकती है।
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आपातकालीन सेवाएं: हालांकि समिति ने एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी सेवाओं को छूट देने की बात कही है, लेकिन सड़क जाम होने की स्थिति में देरी की आशंका बनी रहती है।
निष्कर्ष
श्रीगंगानगर की राजनीति और सामाजिक परिवेश में टोल का मुद्दा हमेशा से गर्म रहा है। अब गेंद सरकार और प्रशासन के पाले में है। क्या प्रशासन समय रहते इस संकट को टाल पाएगा या फिर 5 मार्च की सुबह जिले की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों का कब्जा होगा? यह देखना बाकी है। फिलहाल, क्षेत्र के लोग 4 मार्च की आधी रात का इंतजार कर रहे हैं, जो यह तय करेगा कि अगले कुछ दिन श्रीगंगानगर के लिए कितने चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।