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पक्के घर का अधूरा सपना: श्रीगंगानगर में 1400 से अधिक परिवार पहली किस्त के इंतजार में

श्रीगंगानगर। केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी योजना ‘प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ का उद्देश्य हर गरीब परिवार को सिर पर पक्की छत मुहैया कराना है। लेकिन श्रीगंगानगर जिले में प्रशासनिक ढिलाई और तकनीकी कारणों से यह सपना फिलहाल अधूरा नजर आ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले के 1,427 पात्र लाभार्थी ऐसे हैं, जिन्हें योजना की स्वीकृति मिलने के बावजूद अभी तक पहली किस्त जारी नहीं की गई है।

आखिर कहाँ फंसा है पेंच?

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभार्थी का चयन होने के बाद, उसके बैंक खाते का सत्यापन (Validation) और जियो-टैगिंग (Geo-tagging) की प्रक्रिया पूरी की जाती है। श्रीगंगानगर के विभिन्न ब्लॉकों में इन 1,427 मामलों में देरी के मुख्य कारण निम्नलिखित सामने आए हैं:

  1. दस्तावेजों में विसंगति: कई लाभार्थियों के आधार कार्ड और बैंक खाते के नाम में अंतर होने के कारण ‘फंड ट्रांसफर ऑर्डर’ (FTO) जेनरेट नहीं हो पा रहा है।

  2. जियो-टैगिंग की धीमी गति: योजना के नियम अनुसार, घर निर्माण शुरू करने से पहले उस स्थान की फोटो पोर्टल पर अपलोड करनी होती है। फील्ड स्टाफ की कमी या लापरवाही के कारण यह प्रक्रिया लंबित है।

  3. पोर्टल पर तकनीकी खामियां: केंद्र सरकार के आवास पोर्टल पर डेटा सिंक न होने की वजह से भी कई पात्र परिवारों के नाम ‘वेटिंग लिस्ट’ में ही अटके हुए हैं।

ब्लॉकवार स्थिति और प्रभावित परिवार

जिले के रायसिंहनगर, अनूपगढ़ (अब नया जिला), सूरतगढ़ और घड़साना जैसे क्षेत्रों में लाभार्थियों की संख्या अधिक है। इनमें से अधिकांश परिवार वर्तमान में कच्चे घरों या तिरपाल के नीचे रहने को मजबूर हैं। कड़ाके की ठंड के इस मौसम में पहली किस्त न मिलना इन परिवारों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है, क्योंकि वे अपने पुराने कच्चे घर तोड़ चुके हैं या निर्माण सामग्री महंगी होने के डर से काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं।

प्रशासन की सख्ती: अधिकारियों को अल्टीमेटम

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। आज हुई समीक्षा बैठक में जिला परिषद के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि:

  • अगले 7 कार्य दिवसों के भीतर सभी लंबित 1,427 मामलों की फाइलें क्लियर की जाएं।

  • विकास अधिकारियों (BDO) को खुद फील्ड में जाकर जियो-टैगिंग की बाधाओं को दूर करने को कहा गया है।

  • यदि बैंक स्तर पर कोई समस्या है, तो जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक (LDM) के साथ समन्वय स्थापित कर खातों को सुधारा जाए।

योजना का लाभ: एक नजर में

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत एक लाभार्थी को कुल 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि तीन किस्तों में दी जाती है। इसके अलावा, स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए अलग से ₹12,000 और मनरेगा के तहत 90 दिन की मजदूरी का भी प्रावधान है। पहली किस्त के रूप में आमतौर पर ₹15,000 से ₹30,000 की राशि दी जाती है ताकि नींव का काम शुरू हो सके।

निष्कर्ष

1427 परिवारों का इंतजार केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उन गरीब लोगों की उम्मीदों से जुड़ा है जो कड़ाके की सर्दी के बीच अपने पक्के घर की राह देख रहे हैं। प्रशासन के ताजा निर्देशों के बाद उम्मीद जगी है कि फरवरी के प्रथम सप्ताह तक इन लाभार्थियों के खातों में पहली किस्त की राशि हस्तांतरित कर दी जाएगी।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️