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नशे के खिलाफ नई अलख: श्रीगंगानगर में ‘दूध के लंगर’ के साथ नए साल का आगाज

श्रीगंगानगर। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर में इस बार नए साल का स्वागत शराब के जाम से नहीं, बल्कि सेहत से भरपूर दूध के गिलास के साथ किया जा रहा है। जिले में गहराते नशे के जाल को तोड़ने और युवाओं को एक स्वस्थ जीवनशैली की ओर मोड़ने के उद्देश्य से आज, 31 दिसंबर की शाम एक अनूठी पहल की गई है। जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा विधायक रुपिन्द्र सिंह कुन्नर के नेतृत्व में शहर के हृदय स्थल भगत सिंह चौक पर ‘दूध का लंगर’ लगाया जा रहा है।

परंपरागत जश्न बनाम सार्थक संदेश

आमतौर पर नए साल की पूर्व संध्या (New Year’s Eve) को लोग पार्टियों और शराब के जश्न के रूप में देखते हैं। लेकिन श्रीगंगानगर, जो पंजाब सीमा से सटे होने के कारण ‘चिट्टे’ और अन्य सिंथेटिक नशों की मार झेल रहा है, वहाँ इस तरह का आयोजन एक वैचारिक क्रांति की तरह है। शाम 5 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में शहरवासियों और युवाओं को गर्म दूध पिलाकर यह संदेश दिया जा रहा है कि खुशियाँ मनाने के लिए नशे की बैसाखियों की जरूरत नहीं है।

विधायक कुन्नर की पहल और सामाजिक सरोकार

विधायक रुपिन्द्र सिंह कुन्नर का मानना है कि नशा केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ी को नष्ट कर देता है। उन्होंने इस आयोजन के माध्यम से युवाओं से अपील की है कि वे ‘नशे को ना और जिंदगी को हाँ’ कहें। भगत सिंह चौक, जो क्रांति और जोश का प्रतीक है, वहाँ इस लंगर का आयोजन करना युवाओं के मानस पटल पर गहरा प्रभाव डालता है। कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं ने बताया कि इस बार हजारों लीटर दूध का प्रबंध किया गया है ताकि हर राहगीर और युवा इस मुहिम का हिस्सा बन सके।

नशे की समस्या और जागरूकता की आवश्यकता

श्रीगंगानगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में नशा एक गंभीर सामाजिक बुराई बन चुका है। सीमा पार से होने वाली तस्करी और स्थानीय स्तर पर मेडिकल नशे के बढ़ते चलन ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं। ऐसे में केवल पुलिसिया कार्रवाई पर्याप्त नहीं है; इसके लिए सामाजिक चेतना की आवश्यकता है। ‘दूध का लंगर’ जैसी पहल युवाओं को यह याद दिलाती है कि हमारी संस्कृति ‘पहलवानी और दूध-दही’ के खाने की रही है, न कि नशे की गर्त में डूबने की।

युवाओं पर प्रभाव

आज के इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा शामिल हो रहे हैं। सोशल मीडिया के इस दौर में जहाँ ‘पार्टी कल्चर’ को ग्लोरिफाई किया जाता है, वहाँ इस तरह के जमीनी आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों की ओर लौटने के लिए प्रेरित करते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि हर राजनीतिक दल और सामाजिक संस्था इस तरह के रचनात्मक कार्यक्रम करे, तो समाज में बदलाव निश्चित है।

निष्कर्ष

श्रीगंगानगर की यह पहल पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल है। नए साल का संकल्प केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रहकर सामाजिक बेहतरी का होना चाहिए। आज भगत सिंह चौक पर उमड़ने वाली भीड़ इस बात की गवाह है कि लोग नशे के खिलाफ एकजुट होना चाहते हैं, बस उन्हें एक सही दिशा और मंच की तलाश है। ‘दूध के लंगर’ ने निश्चित रूप से श्रीगंगानगर में एक नई स्वस्थ परंपरा की नींव रखी है।

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