
1. SP का सीमावर्ती दौरा और ग्रामीणों से सीधा संवाद
आज पुलिस अधीक्षक ने अनूपगढ़ के उन गांवों का दौरा किया जो पाकिस्तान सीमा के बिल्कुल करीब हैं। ग्रामीणों के साथ एक चौपाल सभा में SP ने स्पष्ट कहा कि “नशा केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ी के खिलाफ एक युद्ध है।” उन्होंने लोगों को प्रेरित किया कि वे अपने गांव को ‘ड्रग-फ्री जोन’ बनाने की जिम्मेदारी लें।
पुलिस ने इस दौरान ‘मुखबिर तंत्र’ को मजबूत करने पर जोर दिया। ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया कि नशा बेचने वालों की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी और उसे उचित इनाम भी दिया जाएगा।
2. युवाओं के साथ संवाद: ‘उड़ता राजस्थान’ को रोकने की पहल
अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सूरतगढ़ में आयोजित किया गया, जहाँ हजारों की संख्या में कोचिंग छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। पुलिस ने इन छात्रों के साथ एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया।
-
मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा: मनोवैज्ञानिकों और पुलिस अधिकारियों ने छात्रों को बताया कि पढ़ाई के तनाव (Stress) के कारण कई युवा नशे की ओर आकर्षित होते हैं।
-
जागरूकता: छात्रों को सिंथेटिक ड्रग्स (चिट्टा) के जानलेवा परिणामों के बारे में वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से समझाया गया।
-
संकल्प: कार्यक्रम के अंत में हजारों छात्रों ने ‘नशा न करने और न करने देने’ की शपथ ली।
3. तकनीक और हेल्पलाइन का सहारा
पुलिस ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए विशेष ‘एंटी-ड्रग हेल्पलाइन नंबर’ जारी किए हैं।
-
ये नंबर 24/7 सक्रिय रहेंगे।
-
सोशल मीडिया (WhatsApp/Telegram) के माध्यम से भी लोग नशा तस्करों की लोकेशन या फोटो साझा कर सकते हैं।
-
जिले के हर प्रमुख चौराहे और शिक्षण संस्थानों के बाहर इन हेल्पलाइन नंबरों के पोस्टर लगाए गए हैं।
अभियान के मुख्य स्तंभ
| घटक | विवरण |
| लक्ष्य समूह | युवा, छात्र और सीमावर्ती ग्रामीण |
| मुख्य संदेश | “सूचना दें, सुरक्षित रहें, नशा मुक्त बनें” |
| विशेष पहल | गुमनाम शिकायत पेटियां (Anonymous Complaint Boxes) |
| सहयोग | चिकित्सा विभाग और NGO के साथ मिलकर नशामुक्ति केंद्र का संचालन |
तस्करी रोकने के लिए सख्त कदम
जागरूकता के साथ-साथ पुलिस ने अपनी कार्रवाई भी तेज कर दी है। SP ने निर्देश दिए हैं कि जो लोग आदतन नशा तस्कर हैं, उनकी लिस्ट तैयार की जाए और उन पर ‘PIT-NDPS’ एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए, जिसमें बिना जमानत के एक साल तक हिरासत में रखने का प्रावधान है। पुलिस अब नशा बेचने वालों की अवैध संपत्तियों की पहचान कर उन्हें जब्त करने की तैयारी में है।
निष्कर्ष और सामाजिक प्रभाव
अनूपगढ़ और श्रीगंगानगर में नशे की समस्या मुख्य रूप से सीमा पार से आने वाली हेरोइन और स्थानीय स्तर पर बिकने वाले सिंथेटिक ड्रग्स के कारण है। पुलिस का यह जन-जागरूकता अभियान एक सकारात्मक बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है। जब समाज स्वयं तस्करों के खिलाफ खड़ा होगा, तो अपराधियों के लिए छिपना नामुमकिन हो जाएगा।
SP का संदेश: “आपकी एक गुप्त सूचना एक परिवार को उजड़ने से बचा सकती है। डरे नहीं, पुलिस आपकी मित्र है।”