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धमाका: 2000 करोड़ का अंतरराष्ट्रीय साइबर ठग गिश्रीगंगानगर पुलिस का बड़ारफ्तार, कर्नाटक से राजस्थान तक फैला था जाल

श्रीगंगानगर पुलिस ने साइबर क्राइम की दुनिया के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह के मुख्य सरगना को धर दबोचा है। 11 जनवरी 2026 को मिली इस सफलता ने पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान खींचा है। पकड़ा गया आरोपी करीब 2000 करोड़ रुपये से अधिक की वैश्विक धोखाधड़ी के मामलों में वांछित था और अपनी पहचान छिपाकर श्रीगंगानगर में शरण लिए हुए था।

कैसे चढ़ा पुलिस के हत्थे?

पुलिस अधीक्षक (SP) के नेतृत्व में गठित विशेष टीम को खुफिया तंत्र से सूचना मिली थी कि कर्नाटक पुलिस द्वारा खोजा जा रहा एक इनामी अपराधी श्रीगंगानगर के रिहायशी इलाके में छिपकर रह रहा है। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन के आधार पर घेराबंदी की। आरोपी इतना शातिर था कि उसने अपनी पहचान बदलने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लिया था, लेकिन साइबर सेल की मुस्तैदी के आगे उसकी चालाकी काम नहीं आई।

ठगी का ‘मोडस ऑपेरंडी’ (काम करने का तरीका)

जांच में सामने आया कि यह गिरोह न केवल भारत, बल्कि दुबई, वियतनाम और कंबोडिया जैसे देशों से अपना नेटवर्क चला रहा था। इनके ठगी के मुख्य तरीके निम्नलिखित थे:

  • क्रिप्टो इन्वेस्टमेंट स्कैम: लोगों को हाई रिटर्न का लालच देकर क्रिप्टो करेंसी में निवेश करवाना और फिर पैसा लेकर गायब हो जाना।

  • डिजिटल अरेस्ट: खुद को सीबीआई (CBI) या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराना और ‘केस रफा-दफा’ करने के नाम पर मोटी रकम वसूलना।

  • फेक ट्रेडिंग ऐप्स: गिरोह ने कई फर्जी ट्रेडिंग मोबाइल एप्लिकेशन बना रखे थे, जिनमें शुरुआती दौर में लोगों को मुनाफा दिखाया जाता था और बाद में उनके बैंक खाते साफ कर दिए जाते थे।

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और हवाला का खेल

प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि ठगी गई रकम का एक बड़ा हिस्सा हवाला (Hawala) के जरिए विदेशों में भेजा जाता था। आरोपी ने कर्नाटक में दर्जनों फर्जी कंपनियां और बैंक खाते खोल रखे थे। श्रीगंगानगर पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या स्थानीय स्तर पर भी किसी ने इस अपराधी को पनाह देने या इसके काले धन को सफेद करने में मदद की है।

बरामदगी और तकनीकी साक्ष्य

पुलिस ने आरोपी के पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और उपकरण जब्त किए हैं:

  1. दर्जनों सिम कार्ड और मोबाइल: अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले विशेष उपकरण।

  2. जाली पासपोर्ट और आधार कार्ड: अलग-अलग नामों से बने पहचान पत्र।

  3. लक्जरी कार और नकदी: भारी मात्रा में कैश और डिजिटल वॉलेट्स के एक्सेस कोड।

आम जनता के लिए पुलिस की अपील

इस बड़ी गिरफ्तारी के बाद श्रीगंगानगर पुलिस ने आम नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है:

“साइबर ठग अब आपके शहर तक पहुंच चुके हैं। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपनी ओटीपी (OTP) साझा न करें और यदि कोई आपको फोन पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी दे, तो तुरंत 1930 नंबर पर संपर्क करें।”

आगे की कार्रवाई

आरोपी को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड की मांग की गई है। जल्द ही कर्नाटक पुलिस की एक विशेष टीम भी श्रीगंगानगर पहुंचेगी ताकि इस 2000 करोड़ रुपये के घोटाले की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके। पुलिस को उम्मीद है कि इस सरगना से पूछताछ के बाद गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके ठिकानों का भी पता चल सकेगा।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️