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डिजिटल डकैती: 1100 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर स्कैम का ‘अनूपगढ़ कनेक्शन’

श्रीगंगानगर/जोधपुर: राजस्थान के अपराध जगत में उस समय हड़कंप मच गया जब जोधपुर पुलिस द्वारा उजागर किए गए 1100 करोड़ रुपये के विशाल साइबर ठगी रैकेट के तार सीधे तौर पर श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ क्षेत्र से जुड़ गए। इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार अनूपगढ़ का निवासी सुनील कुमार बताया जा रहा है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान श्रीगंगानगर की विशेष साइबर थाना पुलिस ने संभाल ली है।


कैसे काम करता था यह जादुई जाल?

जांच में सामने आया कि यह कोई साधारण ठगी नहीं थी, बल्कि एक अत्याधुनिक ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘इन्वेस्टमेंट फ्रॉड’ का मिला-जुला नेटवर्क था। आरोपी सुनील कुमार और उसके गिरोह ने फर्जी कॉल सेंटर और डार्क वेब के माध्यम से हजारों लोगों को अपना शिकार बनाया।

  • तरीका-ए-वारदात: ठग खुद को सीबीआई (CBI), ईडी (ED) या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते थे। उन्हें डराया जाता था कि उनके नाम से कोई अवैध पार्सल पकड़ा गया है।

  • टेक्निकल सेटअप: ठगी की रकम को खपाने के लिए सुनील ने सैकड़ों ‘म्यूल अकाउंट्स’ (Mule Accounts) का इस्तेमाल किया। ये ऐसे बैंक खाते होते हैं जो गरीब या अनजान लोगों के नाम पर खोले जाते हैं और उनमें करोड़ों का लेन-देन किया जाता है।

अनूपगढ़ का सुनील कुमार: मास्टरमाइंड की भूमिका

पुलिस के अनुसार, सुनील कुमार इस पूरे गिरोह का ‘लॉजिस्टिक्स हेड’ था। उसका मुख्य काम ठगी के पैसे को अलग-अलग खातों में घुमाना और फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेश भेजना था। अनूपगढ़ जैसे छोटे कस्बे से बैठकर वह दुबई और कंबोडिया में बैठे अपने आकाओं से संपर्क में था।

जोधपुर में पकड़े गए अन्य आरोपियों से पूछताछ के बाद यह स्पष्ट हुआ कि सुनील के पास अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और इंटरनेशनल सिम कार्ड्स का जखीरा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस को उम्मीद है कि इस सिंडिकेट के कई और बड़े नामों का खुलासा होगा।

श्रीगंगानगर पुलिस की ‘स्पेशल-24’ रणनीति

मामले की गंभीरता और 1100 करोड़ जैसी भारी भरकम राशि को देखते हुए, श्रीगंगानगर की साइबर थाना पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया है। पुलिस अब निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है:

  1. वित्तीय ट्रेल (Money Trail): यह पता लगाना कि अनूपगढ़ और श्रीगंगानगर के किन-किन बैंकों में फर्जी खाते खोले गए थे।

  2. स्थानीय मददगार: क्या सुनील को स्थानीय स्तर पर किसी का संरक्षण प्राप्त था?

  3. अंतरराष्ट्रीय लिंक: यह पैसा भारत से बाहर किन रास्तों से भेजा गया?

जनता के लिए चेतावनी

इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब महानगरों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि छोटे जिलों में बैठकर बड़े साम्राज्य चला रहे हैं। पुलिस अधीक्षक ने आमजन से अपील की है कि:

  • किसी भी अनजान कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा न करें।

  • ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई कानून भारत में नहीं है; डरने के बजाय तुरंत 1930 पर कॉल करें।

  • अत्यधिक मुनाफे वाले निवेश स्कीमों से दूर रहें।

निष्कर्ष

1100 करोड़ रुपये का यह मामला न केवल राजस्थान बल्कि देश के सबसे बड़े साइबर फ्रॉड में से एक है। सुनील कुमार की गिरफ्तारी इस नेटवर्क की कमर तोड़ने की दिशा में पहला कदम है। आने वाले दिनों में श्रीगंगानगर पुलिस कई बड़े खुलासे कर सकती है, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के कई और चेहरे बेनकाब होंगे।

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