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घड़साना में सनसनी: डिग्गी में मासूम की मौत और गहराता रहस्य

राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर के घड़साना कस्बे में आज सुबह एक ऐसी खबर फैली जिसने हर सुनने वाले की रूह कंपा दी। एक ढाई महीने की मासूम बच्ची, जिसने अभी ठीक से दुनिया को देखना भी शुरू नहीं किया था, अपने ही घर की पानी की डिग्गी में मृत पाई गई। यह घटना केवल एक दुखद हादसा है या किसी गहरी साजिश का हिस्सा, फिलहाल पुलिस और प्रशासन इसी गुत्थी को सुलझाने में जुटे हैं।

घटना का घटनाक्रम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मामला घड़साना थाना क्षेत्र के एक गांव का है। मृतका की उम्र मात्र ढाई महीने बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार, बीती रात बच्ची अपनी माँ के पास सो रही थी। घर के अन्य सदस्य भी पास के कमरों में सो रहे थे। सुबह जब माँ की आँख खुली, तो उसने बच्ची को अपने पास गायब पाया।

परिजनों ने आनन-फानन में घर के चप्पे-चप्पे की तलाशी शुरू की। तलाश के दौरान जब उनकी नजर घर के आंगन में बनी पानी की डिग्गी (भूमिगत टैंक) पर पड़ी, तो वहां का दृश्य देखकर सबके पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्ची का निष्प्राण शरीर पानी में तैर रहा था। आनन-फानन में उसे बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस की कार्रवाई और मौके का मुआयना

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन हरकत में आया। डिप्टी एसपी (DSP) और थानाधिकारी (SHO) भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने सबसे पहले घटनास्थल को सील किया ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके। एफएसएल (FSL) टीम को भी साक्ष्य जुटाने के लिए बुलाया गया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ढाई महीने की बच्ची खुद चलकर डिग्गी तक नहीं जा सकती और न ही डिग्गी का ढक्कन खोलकर उसमें गिर सकती है। यह बात प्रथम दृष्टया इस मामले को हत्या की ओर इशारा करती है।

परिजनों के आरोप और संदेह का घेरा

बच्ची के ननिहाल पक्ष और पिता ने इस मामले में हत्या की आशंका जताई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में यह चर्चा आम है कि क्या यह मामला किसी पारिवारिक रंजिश का परिणाम है या फिर इसके पीछे “बेटा-बेटी” के बीच भेदभाव वाली कोई कुत्सित मानसिकता तो नहीं? हालांकि, पुलिस अभी किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।

“ढाई महीने की मासूम बच्ची का डिग्गी तक पहुंचना असंभव है। हम हर एंगल से जांच कर रहे हैं और संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है।” > — जांच अधिकारी, घड़साना पुलिस

उठते कुछ गंभीर सवाल

यह घटना समाज के सामने कई कड़वे सवाल खड़े करती है:

  1. सुरक्षा में चूक: क्या घर के अंदर भी मासूम सुरक्षित नहीं हैं?

  2. संदिग्ध परिस्थितियां: अगर माँ सो रही थी, तो क्या किसी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश हुआ या घर का ही कोई सदस्य इसमें शामिल है?

  3. मानसिकता: क्या आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बेटियों को बोझ समझा जा रहा है?

आगे की स्थिति

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर घड़साना के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया है। मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम किया जाएगा ताकि मौत के सही समय और कारण (जैसे दम घुटना या डूबना) का पता चल सके। गांव में तनाव और शोक का माहौल देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है।


निष्कर्ष: यह घटना कानून व्यवस्था से ज्यादा मानवीय संवेदनाओं की परीक्षा है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। फिलहाल, पूरा घड़साना उस मासूम के लिए न्याय की मांग कर रहा है।

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