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गुड मॉर्निंग श्रीगंगानगर: आज की 4 बड़ी खबरें

श्रीगंगानगर में प्रकृति का कहर: घने कोहरे की चादर और शीतलहर का ‘येलो अलर्ट’

राजस्थान का उत्तरी सिरा और पाकिस्तान की सीमा से सटा श्रीगंगानगर जिला वर्तमान में भीषण प्राकृतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। आज सुबह पूरा शहर और ग्रामीण अंचल घने सफेद कोहरे की मोटी चादर में लिपटा नजर आया। आलम यह था कि सुबह 9 बजे तक सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ रहे और सड़कों पर दृश्यता (Visibility) का स्तर चिंताजनक रूप से नीचे गिर गया।

विजिबिलिटी 50 मीटर से कम: थम गई रफ्तार

आज सुबह श्रीगंगानगर में दृश्यता घटकर 50 मीटर से भी कम रह गई। इसका सबसे गंभीर असर यातायात पर देखने को मिला।

  • नेशनल हाईवे की स्थिति: श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर-बीकानेर नेशनल हाईवे पर वाहनों की रफ्तार पूरी तरह धीमी हो गई। ट्रक और बसों के चालक हेडलाइट्स और फॉग लाइट्स जलाकर रेंगते नजर आए।

  • दुर्घटनाओं का अंदेशा: कोहरे के कारण मोड़ों और डिवाइडर को देख पाना मुश्किल हो गया है, जिससे प्रशासन ने वाहन चालकों को बेहद सावधानी बरतने और गति सीमा को न्यूनतम रखने की अपील की है।

  • रेलवे और बस सेवा: कोहरे के कारण लंबी दूरी की ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 2 से 4 घंटे की देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को कड़ाके की ठंड में प्लेटफार्मों पर इंतज़ार करना पड़ रहा है।


पारा पहुँचा $5.1^\circ\text{C}$ पर: मौसम विभाग का ‘येलो अलर्ट’

मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार, श्रीगंगानगर में आज का न्यूनतम तापमान $5.1^\circ\text{C}$ दर्ज किया गया है। यह इस सीजन का अब तक का सबसे कम तापमान है, जिसने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को चुनौती दी है।

येलो अलर्ट का क्या मतलब है? > मौसम विभाग जब ‘येलो अलर्ट’ जारी करता है, तो इसका अर्थ है कि आने वाले समय में मौसम और अधिक खराब हो सकता है। यह लोगों और स्थानीय प्रशासन के लिए एक ‘सतर्क रहने’ की चेतावनी है। आने वाले 48 घंटों में पाला (Frost) गिरने की भी संभावना जताई गई है।


जनजीवन और स्वास्थ्य पर प्रभाव

कड़ाके की इस ठंड और शीतलहर (Cold Wave) ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है:

  1. अलाव का सहारा: शहर के प्रमुख चौक-चौराहों जैसे सुखाड़िया सर्कल और गोल बाजार में लोग सुबह-सुबह अलाव तापते नजर आए। बिना गर्म कपड़ों और पर्याप्त सुरक्षा के बाहर निकलना नामुमकिन हो गया है।

  2. व्यापार पर असर: ठंड और कोहरे की वजह से सुबह के समय बाजारों में ग्राहकों की चहल-पहल लगभग शून्य है। चाय की थड़ियों और गर्म कपड़ों की दुकानों को छोड़कर अन्य व्यापारिक गतिविधियाँ ठप पड़ी हैं।

  3. स्वास्थ्य जोखिम: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने चेतावनी दी है कि यह मौसम हृदय रोगियों और अस्थमा के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। सुबह की सैर पर जाने वाले बुजुर्गों को घर के अंदर ही व्यायाम करने की सलाह दी गई है।


कृषि पर दोहरी मार

एक तरफ जहाँ गेहूं की फसल के लिए यह ठंडी ओस अच्छी मानी जाती है, वहीं दूसरी तरफ यदि तापमान और गिरता है और पाला जमता है, तो सरसों और सब्जियों की फसल को भारी नुकसान हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे पाले से बचाव के लिए खेतों की मेड़ों पर धुआं करें या हल्की सिंचाई करें।

श्रीगंगानगर आज के मुख्य बिंदु:

| मानक | विवरण |

| :— | :— |

| न्यूनतम तापमान | $5.1^\circ\text{C}$ |

| दृश्यता | < 50 मीटर |

| चेतावनी | येलो अलर्ट (शीतलहर) |

| हवा की गति | 4-6 किमी/घंटा (उत्तर-पश्चिमी) |

प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और रैन बसेरों में व्यवस्थाएं पुख्ता की गई हैं। यह सर्दी अभी कुछ दिन और अपने तेवर दिखाएगी, इसलिए सावधानी ही बचाव है।

NEWS # 2

श्रीगंगानगर में कड़ाके की ठंड का कहर: नन्हे बच्चों को बड़ी राहत, 12 जनवरी तक स्कूलों में अवकाश

श्रीगंगानगर जिला, जो अपनी चरम मौसमी परिस्थितियों के लिए जाना जाता है, वर्तमान में भीषण ठंड और जानलेवा कोहरे की चपेट में है। सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं और बर्फीली हवाओं ने ठिठुरन को चरम पर पहुँचा दिया है। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति को देखते हुए, जिला प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक बड़ा और राहतकारी निर्णय लिया है।

जिला कलेक्टर का सख्त आदेश

जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने आज एक आधिकारिक आदेश जारी करते हुए जिले के सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों के लिए नई गाइडलाइंस लागू कर दी हैं। आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. कक्षा 5वीं तक पूर्ण अवकाश: नर्सरी से लेकर कक्षा 5वीं तक के छोटे बच्चों के लिए स्कूलों की छुट्टियां अब 12 जनवरी 2026 तक बढ़ा दी गई हैं। यह निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि छोटे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कम होती है और वे शीतलहर की चपेट में जल्दी आ सकते हैं।

  2. कक्षा 6 से 12वीं के लिए समय परिवर्तन: बड़े छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए उनकी छुट्टियां नहीं की गई हैं, लेकिन स्कूल के समय में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब ये स्कूल सुबह 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक ही संचालित होंगे।

  3. शिक्षकों की उपस्थिति: हालांकि विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित किया गया है, लेकिन शिक्षकों और अन्य स्टाफ को विभागीय कार्यों और आगामी परीक्षाओं की तैयारी हेतु नियत समय पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।


क्यों जरूरी था यह फैसला?

पिछले 48 घंटों में श्रीगंगानगर का पारा गिरकर $5.1^\circ\text{C}$ तक पहुँच गया है। सुबह और शाम के समय चलने वाली बर्फीली हवाएं ‘कोल्ड वेव’ (Cold Wave) की स्थिति पैदा कर रही हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय:

स्थानीय बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक ठंड में बच्चों को ‘हाइपोथर्मिया’ और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सुबह 7 या 8 बजे कोहरे के बीच स्कूल जाने से बच्चों के फेफड़ों पर बुरा असर पड़ सकता है। प्रशासन का यह कदम बच्चों को मौसमी बीमारियों से बचाने में “सुरक्षा कवच” का काम करेगा।


अभिभावकों और स्कूल संचालकों की प्रतिक्रिया

प्रशासन के इस फैसले का अभिभावकों ने खुले दिल से स्वागत किया है। कई अभिभावक संगठनों ने पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया के माध्यम से छुट्टियां बढ़ाने की मांग की थी। उनका तर्क था कि कोहरे के कारण स्कूल वैन और बसों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा भी बना रहता है।

दूसरी ओर, जिला शिक्षा अधिकारी ने सख्त लहजे में कहा है कि यदि कोई भी निजी स्कूल इन आदेशों की अवहेलना करता पाया गया, तो उसके खिलाफ राजस्थान गैर-सरकारी शैक्षिक संस्था अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी और स्कूल की मान्यता रद्द करने की सिफारिश भी की जा सकती है।

बच्चों के लिए सुझाव: घर पर कैसे करें समय का सदुपयोग?

छुट्टियों के दौरान बच्चे अपनी पढ़ाई से न पिछड़ें, इसके लिए शिक्षा विभाग ने ‘स्माइल प्रोग्राम’ और ऑनलाइन माध्यमों से जुड़े रहने का सुझाव दिया है। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि:

  • बच्चों को पर्याप्त गर्म कपड़े पहनाकर रखें।

  • उन्हें गुनगुना पानी और पौष्टिक गर्म भोजन दें।

  • कोहरे के समय बच्चों को बाहर पार्क में खेलने के बजाय घर के अंदर ही रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखें।


आगामी सप्ताह का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले 5-6 दिनों तक श्रीगंगानगर और आसपास के इलाकों में इसी तरह का मौसम बना रहेगा। यदि तापमान में और गिरावट आती है, तो 12 जनवरी के बाद भी स्थिति की समीक्षा की जा सकती है। फिलहाल, 12 जनवरी तक की यह राहत छोटे बच्चों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

NEWS# 3

किसान आंदोलन की सुगबुगाहट: गंगनहर में नहरबंदी के खिलाफ 12 जनवरी को कलेक्ट्रेट घेराव की तैयारी

श्रीगंगानगर जिला, जिसे ‘राजस्थान का धान का कटोरा’ कहा जाता है, एक बार फिर बड़े किसान आंदोलन की आहट से गूंज रहा है। गंगनहर प्रणाली में जनवरी माह के दौरान प्रस्तावित नहरबंदी (Canal Closure) के फैसले ने सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। जल संसाधन विभाग के इस निर्णय के विरोध में किसान संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है और 12 जनवरी 2026 को जिला कलेक्ट्रेट के घेराव के साथ अनिश्चितकालीन महापड़ाव की चेतावनी दी है।

विवाद का मुख्य कारण: रबी की फसल और सिंचाई का नाजुक समय

किसानों के गुस्से का सबसे बड़ा कारण रबी की फसलों का वर्तमान चरण है। जनवरी का महीना श्रीगंगानगर में गेहूं और सरसों की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • फसलों की जरूरत: इस समय गेहूं की फसल को ‘पीण’ (सिंचाई) की सख्त जरूरत होती है ताकि दानों का विकास सही ढंग से हो सके। सरसों की फसल भी अपने पकने के महत्वपूर्ण दौर में है।

  • नहरबंदी का असर: यदि विभाग नहरों की मरम्मत के नाम पर पानी रोकता है, तो हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसल सूखने के कगार पर पहुँच जाएगी। किसानों का तर्क है कि मरम्मत का कार्य फसल कटाई के बाद (अप्रैल-मई) भी किया जा सकता है।


गंगा सिंह चौक पर सभा और कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलान

बीती शाम श्रीगंगानगर के ऐतिहासिक गंगा सिंह चौक पर ग्रामीण किसान मजदूर समिति (GKS) और अन्य स्थानीय संगठनों की एक विशाल सभा आयोजित की गई। सभा में किसान नेताओं ने प्रशासन की नीतियों की कड़ी आलोचना की।

आंदोलन की मुख्य घोषणाएं:

  1. महापड़ाव की तैयारी: 12 जनवरी को जिले के कोने-कोने (पदमपुर, रायसिंहनगर, घड़साना, अनूपगढ़) से किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और राशन-पानी के साथ श्रीगंगानगर पहुंचेंगे।

  2. मांगें: किसानों की स्पष्ट मांग है कि प्रस्तावित नहरबंदी को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और गंगनहर के अंतिम छोर (Tail) तक पूरा पानी पहुँचाया जाए।

  3. अनिश्चितकालीन धरना: किसान नेताओं ने साफ कर दिया है कि यह केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं होगा। यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो कलेक्ट्रेट के सामने ही डेरा डाल दिया जाएगा।


प्रशासन और जल संसाधन विभाग की चुनौती

जल संसाधन विभाग का पक्ष है कि गंगनहर की जर्जर हो चुकी दीवारों और तलहटी की मरम्मत के लिए नहरबंदी अपरिहार्य है। विभाग के अनुसार, यदि अभी मरम्मत नहीं हुई तो भविष्य में नहर टूटने का खतरा बड़ा हो सकता है। हालांकि, किसान इस तर्क को ‘कुप्रबंधन’ बता रहे हैं।

कलेक्टर और पुलिस प्रशासन के लिए यह दोहरी चुनौती है:

  • कानून व्यवस्था: हजारों ट्रैक्टरों के शहर में प्रवेश से यातायात और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

  • कड़ाके की ठंड: शीतलहर के बीच हजारों किसानों का खुले आसमान के नीचे महापड़ाव स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी चिंताजनक है।

आर्थिक प्रभाव और भविष्य की राह

श्रीगंगानगर की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कृषि पर टिकी है। यदि नहरबंदी के कारण फसलों का उत्पादन 10% भी गिरता है, तो इसका असर करोड़ों रुपये के व्यापारिक लेन-देन पर पड़ेगा। किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे “मरता क्या न करता” की स्थिति में हैं; या तो पानी मिलेगा या फिर संघर्ष होगा।

आने वाले तीन-चार दिन श्रीगंगानगर के लिए बेहद संवेदनशील हैं। यदि सरकार की ओर से कोई वार्ताकार बीच का रास्ता नहीं निकालता, तो 12 जनवरी को जिले की सड़कों पर किसानों का बड़ा हुजूम दिखाई देना तय है।

NEWS#4

श्रीगंगानगर केंद्रीय जेल में बुजुर्ग कैदी की मृत्यु: न्यायिक जांच का चक्र शुरू और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

श्रीगंगानगर की केंद्रीय जेल में एक बुजुर्ग सजायाफ्ता कैदी की मौत के बाद आज जिला प्रशासन और जेल विभाग में हलचल तेज रही। कल हुई इस दुखद घटना के बाद, नियमों के मुताबिक न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। यह मामला संवेदनशील इसलिए भी है क्योंकि मृतक न्यायिक अभिरक्षा (Judicial Custody) में था, जिसके कारण जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

घटनाक्रम और न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक बुजुर्ग कैदी को कल तड़के सीने में तेज दर्द और घबराहट की शिकायत हुई थी। जेल के चिकित्सा केंद्र में प्राथमिक उपचार के बाद उसे तुरंत जिला राजकीय चिकित्सालय ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

चूंकि हिरासत में हुई मौत (Custodial Death) के मामले में Section 176 CrPC (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के नए प्रावधानों के तहत) मजिस्ट्रेट जांच अनिवार्य होती है, इसलिए आज सुबह से ही प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया:

  • न्यायिक मजिस्ट्रेट का दौरा: संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट ने जेल का दौरा कर उस बैरक का मुआयना किया जहाँ कैदी बंद था।

  • बयानों का संकलन: उस समय ड्यूटी पर तैनात जेल प्रहरियों, जेल डॉक्टर और मृतक के साथ रहने वाले अन्य साथी कैदियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

  • जेल रिकॉर्ड की जांच: कैदी के पिछले मेडिकल इतिहास और उसे दिए जा रहे उपचार के दस्तावेजों को जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।


मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम और वीडियोग्राफी

मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए आज राजकीय चिकित्सालय की मोर्चरी में मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

  1. तीन डॉक्टरों का पैनल: इस बोर्ड में एक फोरेंसिक विशेषज्ञ, एक फिजिशियन और एक अन्य वरिष्ठ चिकित्सक शामिल हैं।

  2. वीडियोग्राफी: मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पूरी पोस्टमार्टम प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई जा रही है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

  3. विसरा संरक्षण: यदि मौत का कारण स्पष्ट नहीं होता है, तो विसरा (Viscera) को सुरक्षित रखकर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजा जाएगा।


जेल और अस्पताल परिसर में सुरक्षा का भारी जाप्ता

घटना के बाद किसी भी संभावित विरोध या तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिला पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।

  • पुलिस जाप्ता: जिला अस्पताल की मोर्चरी और केंद्रीय जेल के मुख्य द्वार पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

  • परिजनों का रोष: मृतक के परिजनों ने जेल प्रशासन पर इलाज में देरी करने का आरोप लगाया है। पुलिस अधिकारी परिजनों को समझाने और शांति व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।

[Image showing a standard protocol for Judicial Inquest in India]


जेलों में स्वास्थ्य सेवाओं पर उठते सवाल

इस घटना ने कड़ाके की ठंड के दौरान जेलों में बंद बुजुर्ग कैदियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में श्रीगंगानगर का न्यूनतम तापमान $5.1^\circ\text{C}$ के आसपास है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी जेलों की बैरकों में ठंडी हवाओं से बचाव के पुख्ता इंतजाम न होना बुजुर्ग कैदियों के हृदय स्वास्थ्य (Heart Health) के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

आगे की राह

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौत प्राकृतिक कारणों (हार्ट अटैक) से हुई या इसके पीछे कोई अन्य परिस्थितिजन्य कारण थे। न्यायिक मजिस्ट्रेट अपनी जांच रिपोर्ट जिला जज और मानवाधिकार आयोग को सौंपेंगे।


मुख्य जानकारी:

  • मृतक की स्थिति: बुजुर्ग सजायाफ्ता कैदी।

  • जांच का प्रकार: न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर की जांच।

  • सुरक्षा: अस्पताल और जेल के बाहर ‘हाई अलर्ट’।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️