
गजसिंहपुर (श्रीगंगानगर): राजस्थान के अन्न भंडार कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले के गजसिंहपुर कस्बे में आज कृषि विपणन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। लंबे समय से नई मंडी यार्ड (Yard) के विस्तार की मांग कर रहे किसानों और मजदूरों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया। आज, 16 अप्रैल 2026 को, सैंकड़ों किसानों ने गजसिंहपुर धान मंडी के मुख्य द्वार पर डेरा डाल दिया और अनिश्चितकालीन धरने का बिगुल फूंक दिया।
संकट की जड़: सिमटती मंडी और बढ़ती फसल
गजसिंहपुर और आसपास के दर्जनों गांवों के लिए यह मंडी व्यापार का मुख्य केंद्र है। लेकिन पिछले एक दशक में पैदावार बढ़ने के बावजूद मंडी का बुनियादी ढांचा वहीं का वहीं थमा हुआ है। वर्तमान स्थिति यह है कि:
-
जगह का अभाव: मंडी का मौजूदा यार्ड इतना छोटा है कि सीजन के समय ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें सड़क तक पहुंच जाती हैं, जिससे कस्बे में जाम की स्थिति बनी रहती है।
-
फसल की बर्बादी: शेड और पक्के फर्श की कमी के कारण किसानों को अपनी उपज खुले आसमान के नीचे रखनी पड़ती है। अचानक होने वाली बारिश या धूलभरी आंधी से अनाज खराब हो जाता है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
-
मजदूरों की परेशानी: यार्ड में जगह न होने से पल्लेदारों और मजदूरों को लोडिंग-अनलोडिंग में भारी मशक्कत करनी पड़ती है।
धरना स्थल का दृश्य: “जब तक समाधान नहीं, तब तक घर वापसी नहीं”
आज सुबह जैसे ही मंडी की कार्यवाही शुरू होनी थी, किसान संगठनों के नेतृत्व में किसानों ने मंडी के गेट पर ताला जड़ दिया और वहीं फर्श बिछाकर बैठ गए। धरने पर बैठे किसान नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का स्पष्ट कहना है कि सरकार और मंडी प्रशासन केवल कागजों में नई मंडी के विस्तार की योजनाएं बना रहे हैं, जबकि धरातल पर एक ईंट भी नहीं रखी गई है।
किसान संघर्ष समिति के स्थानीय पदाधिकारियों ने संबोधित करते हुए कहा:
“हम सालों से मांग कर रहे हैं कि बढ़ती आवक को देखते हुए नया यार्ड बनाया जाए। अधिकारियों ने कई बार सर्वे किया, बजट का आश्वासन दिया, लेकिन आज भी हमारी फसलें धूल और मिट्टी में पड़ी हैं। अब हम आश्वासन से नहीं, काम शुरू होने से मानेंगे।”
व्यापार और अर्थव्यवस्था पर असर
किसानों के इस धरने के कारण आज मंडी में बोली (नीलामी) पूरी तरह ठप रही। इससे न केवल किसान प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि स्थानीय व्यापारियों और आढ़तियों का व्यापार भी रुक गया है। गजसिंहपुर व्यापार मंडल ने भी अप्रत्यक्ष रूप से किसानों की मांग को जायज ठहराया है, क्योंकि बुनियादी ढांचे की कमी व्यापारियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और आगे की राह
धरने की सूचना मिलते ही तहसीलदार और मंडी सचिव मौके पर पहुंचे और किसानों से वार्ता की कोशिश की। अधिकारियों का तर्क है कि नई मंडी के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है और इसमें कुछ तकनीकी अड़चनें हैं। हालांकि, किसान अब किसी भी मौखिक आश्वासन को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं।
किसानों की मुख्य मांगें:
-
नई मंडी यार्ड के निर्माण के लिए तत्काल भूमि आवंटन और बजट जारी किया जाए।
-
मौजूदा मंडी में किसानों के ठहरने और पीने के पानी की उचित व्यवस्था हो।
-
आगामी सीजन से पहले सड़कों और सीसी ब्लॉक का निर्माण कार्य पूरा किया जाए।
निष्कर्ष
गजसिंहपुर का यह आंदोलन केवल एक मंडी का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के कृषि संकट और प्रशासनिक ढिलाई का प्रतीक है। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल, मंडी परिसर में टेंट गाड़ दिए गए हैं और किसान रात का भोजन भी वहीं बनाने की तैयारी में हैं, जो इस बात का संकेत है कि यह लड़ाई लंबी चलने वाली है।
क्षेत्र की जनता की निगाहें अब जिला मुख्यालय और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे इस अन्नदाता की पुकार को कितनी गंभीरता से लेते हैं।