
श्रीगंगानगर (24 अगस्त): श्रीगंगानगर जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली ऐतिहासिक गंग नहर प्रणाली में पंजाब क्षेत्र से होने वाली जल आवक की स्थिति को ध्यान में रखते हुए जल संसाधन विभाग ने सिंचाई प्रबंधन को लेकर कई बड़े फैसले लिए हैं। हरिके बैराज और पंजाब के फीडर इलाकों में जल स्तर की निरंतर निगरानी के बाद विभाग ने जिले की विभिन्न वितरिकाओं (नहरों और माइनरों) के लिए नए सिरे से ‘वरीबंदी’ (बारी-बारी से पानी के संचालन की सारणी) जारी की है।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती जिले के अंतिम छोर (टेल क्षेत्र) तक पानी की न्यायसंगत उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि खरीफ फसलों—विशेषकर नरमा (कपास), धान, ग्वार और मूंग—को ऐन मौके पर सूखने से बचाया जा सके।
जल आवक की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
पंजाब के हरिके बैराज और फिरोजपुर फीडर से गंग नहर (शिवपुर हेड) में पानी की आवक में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों और कैचमेंट एरिया में मानसून की स्थिति के आधार पर पीछे से पानी छोड़ा जा रहा है, जिससे मुख्य नहर में जल का प्रवाह कभी सामान्य तो कभी कम दर्ज किया जा रहा है।
वर्तमान में खरीफ का सीजन अपने बेहद महत्वपूर्ण चरण में है। नरमा और मूंग जैसी फसलों को इस समय सिंचाई के पानी की सर्वाधिक आवश्यकता होती है। पानी की थोड़ी सी भी कमी या कुप्रबंधन से फसलों की पैदावार और गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है। इसी परिस्थिति को भांपते हुए जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर पानी के सही बंटवारे का खाका तैयार किया है।
नई सारणी और सिंचाई प्रबंधन योजना
जल संसाधन विभाग द्वारा जारी नए वारीबंदी शेड्यूल के तहत पूरे गंग नहर नेटवर्क को अलग-अलग समूहों (Groups) में विभाजित किया गया है:
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ग्रुपवार पानी का वितरण: मुख्य वितरिकाओं जैसे करणीजी, लक्ष्मी नारायण जी, लालगढ़, और समेजा माइनर को प्राथमिकता और पानी की उपलब्धता के अनुसार रोटेशन में चलाया जाएगा।
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टेल क्षेत्र को प्राथमिकता: विभाग ने स्पष्ट किया है कि पानी का प्रवाह इस तरह नियंत्रित किया जाएगा कि नहरों के अंतिम छोर पर स्थित खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचे, जिससे वहां के किसानों की शिकायत दूर हो सके।
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अवैध लिफ्ट और चोरी पर रोक: नहरों के किनारे अवैध रूप से पंप सेट लगाकर पानी की चोरी रोकने के लिए जल संसाधन विभाग की गश्ती टीमों का गठन किया गया है। रात के समय विशेष रूप से गश्त बढ़ाई जाएगी।
किसानों के लिए सलाह और विभागीय निर्देश
जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता और स्थानीय कृषि विशेषज्ञों ने जिले के किसानों से पानी का उपयोग अत्यंत विवेकपूर्ण तरीके से करने की अपील की है:
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संतुलित सिंचाई: किसान भाई फसलों की जरूरत के अनुसार ही पानी का उपयोग करें और जल भराव की स्थिति से बचें।
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सामूहिक तालमेल: जल प्रयोक्ता संगम (WUA) और local समितियों को निर्देश दिया गया है कि वे खाले (वाटर कोर्स) की सफाई समय पर पूरी रखें, ताकि पानी का रिसाव और बर्बादी कम से कम हो।
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चौकसी: यदि किसी क्षेत्र में नहर के क्षतिग्रस्त होने या कटाव की आशंका दिखे, तो तुरंत सिंचाई विभाग के नियंत्रण कक्ष को सूचित करें।
कृषि अर्थव्यवस्था के लिए गंग नहर का महत्व
श्रीगंगानगर जिला अपनी उन्नत कृषि के लिए देशभर में जाना जाता है, जिसका पूरा श्रेय गंग नहर प्रणाली को जाता है। यदि समय पर फसलों को पानी की सही खुराक नहीं मिलती, तो क्षेत्र का कृषि गणित बिगड़ जाता है।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जब तक पंजाब से पानी का प्रवाह पूरी तरह से स्थिर नहीं हो जाता, तब तक यह नई सारणी लागू रहेगी। जैसे ही पीछे से जल आवक में बढ़ोतरी होगी, वितरिकाओं के चलने की अवधि और पानी की मात्रा में भी तदनुसार बढ़ोतरी कर दी जाएगी। फिलहाल, नई व्यवस्था से जिले के लाखों किसानों को अपनी फसलों को बचाने में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।