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गंगनहर और आईजीएनपी में पानी की भारी किल्लत: श्रीगंगानगर कलेक्ट्रेट पर किसानों का उग्र प्रदर्शन, घेराव की चेतावनी

श्रीगंगानगर। राजस्थान के अन्नकटोरा कहे जाने वाले जिले श्रीगंगानगर में सिंचाई के पानी का संकट गहराता जा रहा है। गंगनहर और इंदिरा गांधी नहर परियोजना (आईजीएनपी) में रेगुलेशन के अनुसार पूरा पानी नहीं मिलने से आक्रोशित किसानों ने 9 मई को जिला कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर एक विशाल और उग्र प्रदर्शन किया। स्थानीय किसान संगठनों के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर धरना दे दिया। किसानों का साफ कहना है कि पानी की कमी के कारण इस सीजन की सबसे मुख्य फसलें—नरमा और कपास की बिजाई पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई है।

नरमा और कपास की बिजाई पर मंडराया संकट

प्रदर्शनकारी किसान नेताओं ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि मई का महीना श्रीगंगानगर और आसपास के इलाकों में नरमा (कपास) की बुआई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इस समय खेतों को समय पर और पर्याप्त पानी मिलना बेहद जरूरी है। यदि इस समय खेतों को पानी नहीं मिला, तो बिजाई का समय निकल जाएगा और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

किसानों का आरोप है कि सिंचाई विभाग और प्रशासन आपसी तालमेल की कमी के कारण नहरों का सही रेगुलेशन लागू करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। आईजीएनपी और गंगनहर की कई शाखाओं में पिछले कई दिनों से पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंची है, जिससे तैयार पड़े खेत सूखे पड़े हैं। जो किसान महंगी खाद और बीज खरीद चुके हैं, वे अब आसमान और सूखी नहरों की तरफ देखने को मजबूर हैं।

रेगुलेशन और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप

किसान संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार और जल संसाधन विभाग के अधिकारी कागजों में तो पूरा पानी देने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में टेल (नहर के अंतिम छोर) तक पानी बिल्कुल नहीं पहुंच रहा है। रेगुलेशन के मुताबिक जिस हिस्से को जितने दिन पानी मिलना चाहिए, उसमें लगातार कटौती की जा रही है।

“प्रशासन हमारे सब्र का इम्तिहान न ले। एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ हमारी खड़ी फसलों और बिजाई के समय पानी को रोककर हमें बर्बाद किया जा रहा है।” – एक प्रदर्शनकारी किसान नेता

किसानों ने यह भी शिकायत की कि पंजाब से आने वाले पानी के हिस्से में भी लगातार गड़बड़ी हो रही है, लेकिन राजस्थान सरकार और स्थानीय प्रशासन इस मुद्दे पर पंजाब के अधिकारियों के साथ कड़ाई से बात करने में नाकाम रहा है।

कलेक्ट्रेट घेराव की दी सख्त चेतावनी

लंबे समय तक चले इस प्रदर्शन के बाद किसान नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के नाम प्रशासनिक अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में किसानों ने अपनी मुख्य मांगें रखी हैं:

  1. गंगनहर और आईजीएनपी के मौजूदा रेगुलेशन में तुरंत सुधार किया जाए।

  2. नहरों के अंतिम छोर (टेल) तक तुरंत प्रभाव से पर्याप्त सिंचाई पानी पहुंचाया जाए।

  3. बिजाई के इस पीक सीजन के दौरान नहरों में किसी भी प्रकार की अघोषित बंदी या कटौती न की जाए।

किसानों ने प्रशासन को दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर नहरों में पानी की सप्लाई नहीं बढ़ाई गई और रेगुलेशन को ठीक नहीं किया गया, तो यह आंदोलन केवल धरने तक सीमित नहीं रहेगा। जिले भर के हजारों किसान कलेक्ट्रेट का अनिश्चितकालीन घेराव करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और सिंचाई विभाग की होगी।

प्रशासन का रुख

ज्ञापन लेने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और जल संसाधन विभाग के अभियंताओं ने किसानों को शांत करने का प्रयास किया। अधिकारियों का कहना है कि वे ऊपर के स्तर पर बात कर रहे हैं ताकि पंजाब से पानी की आवक को बढ़ाया जा सके। उन्होंने आश्वासन दिया कि रेगुलेशन के अनुसार पानी की समान रूप से बहाली करने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं और जल्द ही टेल तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था दुरुस्त कर ली जाएगी। हालांकि, किसान इस मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने मांगें पूरी होने तक अपना संघर्ष जारी रखने का एलान किया है।

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