
श्रीगंगानगर: राजस्थान के ‘अन्न भंडार’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर जिले में कृषि विभाग ने सोमवार, 6 अप्रैल को उर्वरकों की कालाबाजारी और उनके अवैध औद्योगिक इस्तेमाल के खिलाफ एक व्यापक अभियान छेड़ा है। जिला कलेक्टर और कृषि विभाग के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर गठित विशेष टीमों ने जिले के विभिन्न उपखंडों में खाद-बीज विक्रेताओं और गोदामों पर आकस्मिक छापेमारी की। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य किसानों के हक के यूरिया को औद्योगिक इकाइयों में डाइवर्ट होने से बचाना है।
यूरिया का अवैध डाइवर्जन: क्यों और कैसे?
भारत सरकार द्वारा कृषि कार्यों के लिए यूरिया पर भारी सब्सिडी दी जाती है, जिससे किसानों को यह बेहद सस्ती दरों पर उपलब्ध होता है। इसके विपरीत, औद्योगिक उपयोग (जैसे प्लाईवुड, रेजिन, और पेंट निर्माण) के लिए उपयोग होने वाले ‘टेक्निकल ग्रेड यूरिया’ की कीमतें काफी अधिक होती हैं।
मुनाफाखोरी के लालच में कुछ असामाजिक तत्व खेती वाले यूरिया को अवैध तरीके से फैक्ट्रियों में सप्लाई कर देते हैं। इससे न केवल सरकारी खजाने को चूना लगता है, बल्कि पीक सीजन के दौरान आम किसानों को खाद की किल्लत का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 6 अप्रैल को श्रीगंगानगर, पदमपुर, और रायसिंहनगर जैसे इलाकों में कृषि विभाग की फ्लाइंग स्क्वॉड ने सघन जांच की।
आकस्मिक निरीक्षण और स्टॉक की जांच
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक ने बताया कि आज की कार्रवाई के दौरान जिले के 50 से अधिक निजी और सहकारी खाद केंद्रों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया गया। टीमों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया:
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POS मशीन और स्टॉक का मिलान: विक्रेताओं के पास मौजूद स्टॉक और उनकी पॉस (Point of Sale) मशीन में दर्ज आंकड़ों का मिलान किया गया ताकि बिना रिकॉर्ड की बिक्री पकड़ी जा सके।
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रजिस्टर की जांच: संदिग्ध खरीदारों की सूची तैयार की गई, जिन्होंने हाल के दिनों में असामान्य रूप से अधिक मात्रा में यूरिया खरीदा है।
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सैंपलिंग: कुछ संदिग्ध केंद्रों से खाद के नमूने भी लिए गए हैं ताकि उनकी गुणवत्ता और ग्रेड की जांच की जा सके।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी विक्रेता यूरिया के अवैध भंडारण या गैर-कृषि उपयोग के लिए बिक्री में संलिप्त पाया गया, तो उसका लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाएगा और उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order) के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
गोपालकों के लिए बड़ी पहल: ‘राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना’
कृषि विभाग की इस कार्रवाई के समानांतर, प्रशासनिक स्तर पर पशुपालकों और गोपालकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक भी आयोजित की गई। जिले में ‘राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना’ के क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों ने लक्ष्य निर्धारित किए।
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क्या है यह योजना? इस योजना के तहत राज्य के गोपालक परिवारों को उनकी अल्पकालिक आवश्यकताओं के लिए 1 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाता है। यह ऋण मुख्य रूप से पशु आहार खरीदने, शेड निर्माण और डेयरी से संबंधित अन्य खर्चों के लिए दिया जाता है।
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पंजीयन प्रक्रिया की समीक्षा: 6 अप्रैल की बैठक में यह निर्देश दिए गए कि ग्राम सेवा सहकारी समितियों (GSS) के माध्यम से अधिक से अधिक आवेदन प्राप्त किए जाएं। अधिकारियों ने बताया कि योजना के पहले चरण में उन परिवारों को प्राथमिकता दी जा रही है जो दुग्ध समितियों से जुड़े हैं।
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दस्तावेज और पात्रता: आवेदन के लिए जन आधार कार्ड, पशु स्वामित्व का प्रमाण और सहकारी बैंक में खाता होना अनिवार्य है।
किसानों और पशुपालकों के लिए संदेश
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एक ओर जहां यूरिया की चोरी रोकने के लिए सख्ती बरती जा रही है, वहीं दूसरी ओर पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए ऋण की प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद खरीदते समय हमेशा पक्का बिल लें और यदि उन्हें कहीं भी यूरिया की कालाबाजारी की सूचना मिलती है, तो तुरंत विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर सूचित करें।
इस विशेष अभियान से न केवल खाद वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आने वाले खरीफ सीजन के लिए यूरिया की उपलब्धता भी सुनिश्चित हो सकेगी। श्रीगंगानगर का प्रशासन अब “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रहा है ताकि जिले का किसान और पशुपालक दोनों आर्थिक रूप से सुरक्षित महसूस कर सकें।