
श्रीगंगानगर। सरहदी जिले श्रीगंगानगर में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने और युवाओं को इस दलदल से बाहर निकालने के लिए जिला पुलिस और प्रशासन ने ‘ऑपरेशन सीमा संकल्प’ (Operation Seema Sankalp) के तहत एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान छेड़ दिया है। 10 दिसंबर को जिले के विभिन्न उपखंडों, स्कूलों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष नशा मुक्ति कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नशे की सप्लाई चेन को तोड़ना और मांग (Demand) में कमी लाना है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य: बचाव और पुनर्वास
‘ऑपरेशन सीमा संकल्प’ केवल एक पुलिसिया कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक सुधार का आंदोलन बन गया है। इस अभियान के तहत पुलिस दोतरफा रणनीति पर काम कर रही है:
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सख्ती: नशे के सौदागरों और तस्करों के खिलाफ कड़े कानूनी कदम उठाना।
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संवेदनशीलता: जो युवा नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उन्हें मुख्यधारा में वापस लाना और विद्यार्थियों को जागरूक करना।
योग और ध्यान: नशा मुक्ति के नए हथियार
इस बार आयोजित कार्यशालाओं की सबसे खास बात यह रही कि युवाओं को नशे से दूर रहने के लिए केवल उपदेश नहीं दिए गए, बल्कि उन्हें योग और ध्यान (Meditation) के व्यावहारिक गुर सिखाए गए। विशेषज्ञों ने बताया कि नशा अक्सर मानसिक तनाव और खालीपन के कारण शुरू होता है।
कार्यशालाओं में योग गुरुओं ने ‘प्राणायाम’ और ‘अनुलोम-विलोम’ जैसी क्रियाओं का अभ्यास कराया। पुलिस अधिकारियों ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि मन शांत और एकाग्र होगा, तो नशे जैसे हानिकारक आकर्षण खुद-ब-खुद खत्म हो जाएंगे। विद्यार्थियों को संकल्प दिलाया गया कि वे न केवल स्वयं नशे से दूर रहेंगे, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी इसके प्रति सचेत करेंगे।
ग्रामीणों से सहयोग की अपील: ‘मुखबिर’ बनें आम नागरिक
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में आयोजित इन कार्यक्रमों में ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद किया गया। पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया कि नशा तस्करी को तब तक पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, जब तक आम जनता का सहयोग न मिले।
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गोपनीय सूचना: ग्रामीणों से अपील की गई कि यदि उनके गांव या मोहल्ले में कोई व्यक्ति अवैध दवाइयां, चिट्टा या अन्य नशीले पदार्थ बेचता है, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें।
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गोपनीयता का भरोसा: पुलिस ने आश्वासन दिया कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
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हेल्पलाइन नंबर: कार्यशाला के दौरान विशेष हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए, जिन पर नशा मुक्ति के लिए सहायता मांगी जा सकती है।
सीमावर्ती इलाकों पर विशेष नजर
चूंकि श्रीगंगानगर एक सीमावर्ती जिला है, इसलिए सीमा पार से होने वाली तस्करी (ड्रोन के जरिए नशा गिरना) एक बड़ी चुनौती है। ‘ऑपरेशन सीमा संकल्प’ के तहत सीमा से सटे गांवों में विशेष ‘ग्राम रक्षक’ दल बनाए गए हैं। ये दल सीमा सुरक्षा बल (BSF) और स्थानीय पुलिस के बीच एक कड़ी का काम करेंगे।
निष्कर्ष: एक साझा जिम्मेदारी
‘ऑपरेशन सीमा संकल्प’ के तहत आयोजित ये कार्यशालाएं इस बात का प्रमाण हैं कि प्रशासन अब नशे को केवल एक अपराध के रूप में नहीं, बल्कि एक बीमारी के रूप में देख रहा है जिसका इलाज जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता है। यदि युवा शक्ति इस अभियान से जुड़ती है, तो वह दिन दूर नहीं जब श्रीगंगानगर ‘नशा मुक्त जिला’ के रूप में अपनी नई पहचान बनाएगा।