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इंदिरा गांधी नहर बंदी: फसल के पकाव के समय जल संकट की आहट

श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ की खेती पूरी तरह से इंदिरा गांधी नहर प्रणाली पर टिकी है। वर्तमान में रबी की मुख्य फसल, गेहूं, अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण (पकाव की अवस्था) में है।

1. नहर बंदी का कारण और विरोध

सिंचाई विभाग अक्सर नहरों की मरम्मत, सफाई और रिपेयरिंग के लिए वार्षिक ‘नहर बंदी’ (Canal Closure) की घोषणा करता है। इस साल भी आगामी दिनों में प्रस्तावित बंदी को लेकर विभाग और किसान आमने-सामने हैं।

  • किसानों का तर्क: किसानों का कहना है कि गेहूं की फसल को फरवरी और मार्च की शुरुआत में कम से कम दो अंतिम सिंचाइयों की सख्त जरूरत होती है। यदि इस समय पानी काटा गया, तो गेहूं का दाना छोटा और हल्का रह जाएगा, जिससे पैदावार में 20% से 30% तक की गिरावट आ सकती है।

  • सिंचाई विभाग का पक्ष: विभाग का मानना है कि मानसून से पहले नहरों की मरम्मत जरूरी है ताकि खरीफ की फसल (नरमा-कपास) के समय पानी की आपूर्ति में कोई बाधा न आए।


पीला रतुआ (Yellow Rust): गेहूं का ‘कैंसर’

नहर बंदी की चर्चाओं के बीच, श्रीगंगानगर के कुछ सीमावर्ती इलाकों (जैसे घड़साना और अनूपगढ़ बेल्ट) में गेहूं की फसल पर ‘पीला रतुआ’ (Yellow Rust) नामक कवक रोग (Fungal Disease) के लक्षण देखे गए हैं।

येलो रस्ट क्या है और यह क्यों फैलता है?

यह एक फफूंद जनित रोग है जो हवा के जरिए फैलता है। इसकी पहचान पत्तियों पर पीले रंग की धारियों या पाउडर जैसे धब्बों से होती है।

  • अनुकूल मौसम: वर्तमान में पड़ रही धुंध (कोहरा) और हवा में अत्यधिक नमी इस बीमारी के फैलने के लिए सबसे उपयुक्त माहौल पैदा कर रही है।

  • नुकसान: यह रोग पत्तियों से क्लोरोफिल सोख लेता है, जिससे पौधा भोजन नहीं बना पाता और फसल सूखने लगती है।

कृषि विभाग की एडवाइजरी

कृषि विभाग के उप-निदेशक ने किसानों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  1. निगरानी: किसान अपने खेतों का नियमित चक्कर लगाएं। यदि पत्तियों पर पीला पाउडर दिखे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

  2. छिड़काव: रोग के लक्षण दिखते ही प्रोपीकोनाजोल (Propiconazole) या इसी तरह की अन्य कवकनाशी दवाओं का निर्धारित मात्रा में छिड़काव करें।

  3. सिंचाई प्रबंधन: जिन इलाकों में पानी उपलब्ध है, वहां हल्की सिंचाई करें ताकि पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।


समाधान की तलाश: किसानों की मांग

श्रीगंगानगर के किसान संगठनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि:

  • नहर बंदी को कम से कम 15 मार्च तक टाला जाए।

  • टेल (नहर के अंतिम छोर) तक पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि अंतिम सिंचाई पूरी हो सके।

  • कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर ‘पीला रतुआ’ से बचाव के लिए कैंप लगाएं और किसानों को मुफ्त या रियायती दरों पर दवाएं उपलब्ध कराएं।

निष्कर्ष: आगामी 15-20 दिन श्रीगंगानगर के किसानों के लिए निर्णायक साबित होंगे। यदि प्रशासन नहर बंदी के समय में लचीलापन दिखाता है और किसान समय पर रोग प्रबंधन कर लेते हैं, तो जिले में गेहूं का बंपर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकता है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️