
घटनाक्रम के अनुसार, श्रीगंगानगर के बॉर्डर से सटे एक संवेदनशील इलाके में पुलिस की एक विशेष टीम रूटीन गश्त पर थी। खुफिया जानकारी थी कि सीमा पार से ड्रोन के जरिए हेरोइन की एक बड़ी खेप गिराई गई है और स्थानीय तस्कर उसे उठाने के लिए आने वाले हैं।
जैसे ही पुलिस की जीप एक सुनसान कच्चे रास्ते पर पहुंची, वहां कुछ संदिग्ध हलचल दिखाई दी। पुलिस ने टॉर्च की रोशनी डाली और संदिग्धों को रुकने की चेतावनी दी। लेकिन रुकने के बजाय, तस्करों ने दुस्साहस का परिचय देते हुए सीधे पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से एक बारगी तो पुलिस भी सकते में आ गई, लेकिन जवानों ने तुरंत अपनी पोजीशन संभाली और जवाबी कार्रवाई की।
अंधेरे का फायदा और ‘किलर’ भागने में कामयाब
सरहदी इलाकों में रात का अंधेरा और कटीली झाड़ियाँ अक्सर अपराधियों के लिए ढाल बन जाती हैं। पुलिस और तस्करों के बीच करीब 10-15 मिनट तक मुठभेड़ चली। पुलिस की ओर से भी जवाबी फायर किए गए, लेकिन तस्कर इलाके की भौगोलिक स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ थे।
तस्करों ने अपनी मोटरसाइकिलें या संभवतः कोई ऑफ-रोड गाड़ी वहीं छोड़ी और खेतों के रास्ते अंधेरे में ओझल हो गए। पुलिस टीम ने पीछा करने की कोशिश की, लेकिन घनी झाड़ियों और बॉर्डर के जीरो लाइन के पास होने के कारण सुरक्षा कारणों से कदम फूंक-फूंक कर रखने पड़े।
बॉर्डर पर ‘सफेद जहर’ की बड़ी खेप की साजिश
इस फायरिंग की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह कोई मामूली अपराधी नहीं थे। नशे के इन सौदागरों के पास आधुनिक हथियार होना इस बात का संकेत है कि नार्को-टेररिज्म (Narco-Terrorism) के तार अब गहरे जुड़ चुके हैं।
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हेरोइन का कनेक्शन: माना जा रहा है कि तस्करों की यह टोली करोड़ों रुपये की हेरोइन की खेप सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने की कोशिश में थी।
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विदेशी लिंक: जिस तरह से पुलिस पर हमला किया गया, उससे अंदेशा है कि इन तस्करों को सीमा पार (पाकिस्तान) के आकाओं से बैकअप मिल रहा है।
इलाके में भारी पुलिस बल और ‘सर्च ऑपरेशन’
घटना के तुरंत बाद श्रीगंगानगर एसपी और अन्य उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया। देखते ही देखते पूरा इलाका छावनी में तब्दील कर दिया गया।
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नाकाबंदी: जिले के सभी निकास रास्तों पर कड़ी नाकाबंदी कर दी गई है। हर आने-जाने वाली गाड़ी की तलाशी ली जा रही है।
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कॉम्बिंग ऑपरेशन: पुलिस की कई टीमें, जिनमें क्विक रिस्पांस टीम (QRT) शामिल है, खेतों और ढाणियों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
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फॉरेंसिक जांच: घटना स्थल से चले हुए कारतूसों के खोखे और तस्करों द्वारा छोड़े गए सुरागों को इकट्ठा किया गया है ताकि उनकी पहचान की जा सके।
खाकी को चुनौती: अब आर-पार की जंग
श्रीगंगानगर पुलिस के लिए यह साख का सवाल बन गया है। नशा तस्करी इस क्षेत्र की पुरानी समस्या रही है, लेकिन पुलिस पर सीधे फायरिंग करना तस्करों के बढ़ते हौसलों को दर्शाता है। पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि “नशे के सौदागरों को अब बख्शा नहीं जाएगा।”
स्थानीय ग्रामीणों में इस घटना के बाद डर का माहौल है, लेकिन पुलिस ने उन्हें आश्वस्त किया है कि सुरक्षा घेरा मजबूत है। पुलिस अब उन पुराने अपराधियों की सूची खंगाल रही है जो हाल ही में जेल से पैरोल या जमानत पर बाहर आए हैं।
निष्कर्ष: 18 मार्च की यह मुठभेड़ श्रीगंगानगर में नशे के खिलाफ चल रही जंग का एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। तस्करों की गोलियां पुलिस के हौसले पस्त करने के लिए चली थीं, लेकिन अब खाकी ने उन्हें पाताल से भी ढूंढ निकालने की कसम खा ली है।