
श्रीगंगानगर। बांद्रा टर्मिनल से चलकर श्रीगंगानगर को आने वाली गाड़ी संख्या 14702 अरावली एक्सप्रेस में उस समय एक बड़ा और खौफनाक हादसा होने से बाल-बाल बच गया, जब ट्रेन के एक वातानुकूलित (एसी) कोच में अचानक आग लग गई। यह घटना हनुमानगढ़ और ऐलनाबाद रेलवे स्टेशनों के बीच की बताई जा रही है। गनीमत यह रही कि कोच अटेंडेंट और रेलवे के सजग कर्मचारियों ने समय रहते भारी सूझबूझ और तत्परता दिखाई, जिसके चलते आग पर तुरंत काबू पा लिया गया। इस त्वरित कार्रवाई की वजह से जहां एक ओर सैकड़ों यात्रियों की जान सुरक्षित रही, वहीं दूसरी ओर रेलवे को भी किसी बड़े जान-माल के नुकसान से बचा लिया गया।
चलती ट्रेन में अचानक उठा धुआं, यात्रियों में मची अफरा-तफरी
प्रत्यक्षदर्शियों और ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों के अनुसार, अरावली एक्सप्रेस अपनी नियमित गति से श्रीगंगानगर की ओर बढ़ रही थी। जैसे ही ट्रेन ऐलनाबाद स्टेशन से रवाना होकर हनुमानगढ़ के करीब पहुंची, तभी अचानक एक थर्ड एसी (3AC) कोच के भीतर से जलने की तीखी गंध आने लगी। कुछ ही पलों में कोच के एक कोने में स्थित विद्युत पैनल (इलेक्ट्रिक पैनल) से गहरा और काला धुआं उठने लगा।
चलती ट्रेन के बंद एसी कोच में धुआं फैलता देख यात्रियों के होश उड़ गए। गहरी नींद में सो रहे यात्री अचानक दम घुटने और बदबू के कारण जाग गए। कोच के भीतर चीख-पुकार मच गई और यात्रियों में अपनी जान बचाने के लिए दूसरे डिब्बों की तरफ भागने की अफरा-तफरी मच गई। कुछ यात्रियों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए ट्रेन की आपातकालीन जंजीर (चेन पुलिंग) खींच दी, जिसके बाद ट्रेन की रफ्तार धीमी हुई और वह ट्रैक पर रुक गई।
कोच अटेंडेंट और रेलकर्मियों की जांबाजी: मौके पर ही पाया आग पर काबू
इस बेहद तनावपूर्ण और डरावने माहौल के बीच, अरावली एक्सप्रेस में तैनात कोच अटेंडेंट और ऑन-बोर्ड तकनीकी स्टाफ ने अद्वितीय साहस और पेशेवर सूझबूझ का परिचय दिया। जैसे ही उन्हें शॉर्ट सर्किट और आग की सूचना मिली, उन्होंने बिना वक्त गंवाए अपनी जान जोखिम में डालकर मोर्चा संभाला।
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अग्निशामक यंत्रों का सटीक इस्तेमाल: रेलकर्मियों ने कोच में लगे इमरजेंसी फायर एक्स्टिंग्विशर (अग्निशामक सिलेंडर) को तुरंत निकाला और उनके सील तोड़कर सीधे इलेक्ट्रिक पैनल पर स्प्रे करना शुरू कर दिया।
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बिजली की सूझबूझ भरी कटौती: तकनीकी स्टाफ ने बिना देरी किए उस हिस्से की मुख्य विद्युत आपूर्ति (पावर सप्लाई) को काट दिया, ताकि शॉर्ट सर्किट की वजह से आग पूरी बोगी या ट्रेन की अन्य वायरिंग में न फैल सके।
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यात्रियों की सुरक्षित निकासी: जब तक आग को पूरी तरह से बुझाया जा रहा था, तब तक स्टाफ और कुछ जागरूक सह-यात्रियों ने कोच के सभी आपातकालीन द्वारों को खोलकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित रूप से नीचे उतारा और उन्हें ढांढस बंधाया।
तकनीकी टीम की जांच के बाद ट्रेन श्रीगंगानगर के लिए रवाना
ट्रेन के रुकने और आग पर पूरी तरह काबू पा लेने की सूचना मिलते ही पास के स्टेशन से रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, तकनीकी इंजीनियर्स और सुरक्षा बल (RPF व GRP) के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। प्राथमिक जांच में सामने आया कि भीषण गर्मी और लगातार लोड बढ़ने के कारण एसी बोगी के मुख्य स्विचबोर्ड या विद्युत पैनल में आंतरिक रूप से शॉर्ट सर्किट हो गया था, जिसने धीरे-धीरे आग का रूप ले लिया।
रेलवे की तकनीकी टीम ने ट्रैक पर ही लगभग आधे से पौने घंटे तक कड़ी मशक्कत की, जले हुए पैनल को पूरी तरह से आइसोलेट (अलग) किया और यह सुनिश्चित किया कि अब आगे सफर में किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। पूरी सुरक्षा जांच और क्लीयरेंस मिलने के बाद ही अरावली एक्सप्रेस को आगे श्रीगंगानगर के लिए रवाना किया गया।
रेलवे प्रशासन ने जताया आभार, सुरक्षा नियमों को लेकर दी चेतावनी
इस घटना के बाद उत्तर पश्चिम रेलवे के स्थानीय अधिकारियों ने समय पर कार्रवाई करने वाले जांबाज कर्मचारियों की सराहना की है, जिनकी वजह से एक बड़ा राष्ट्रीय हादसा टल गया। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर लंबी दूरी की ट्रेनों में इलेक्ट्रिक मेंटेनेंस और ओवरलोडिंग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से भी अपील की है कि वे सफर के दौरान ट्रेनों में लगे चार्जिंग पॉइंट्स पर भारी क्षमता वाले उपकरण न जोड़ें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गंध या धुआं दिखने पर तुरंत ऑन-ड्यूटी स्टाफ या रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर सूचित करें, ताकि समय रहते हादसों को रोका जा सके।