
श्रीगंगानगर/रावला। राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कृषि विभाग और बीमा कंपनियों के गठजोड़ की पोल खोलकर रख दी है। ‘अन्नदाता’ कहे जाने वाले किसानों के हक पर डाका डालते हुए बीमा कंपनियों ने करोड़ों रुपये का गबन किया है। राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के हस्तक्षेप के बाद अब इस मामले ने तूल पकड़ लिया है और रावला व करणपुर क्षेत्र में बड़े स्तर पर धांधली की पुष्टि हुई है।
घोटाले का मुख्य केंद्र: रावला और करणपुर
जांच में सामने आया है कि श्रीगंगानगर के रावला और करणपुर बेल्ट में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत किसानों ने अपनी खराब हुई फसलों के मुआवजे के लिए आवेदन किया था। प्राकृतिक आपदा और ओलावृष्टि के कारण किसानों की 50% से 70% फसलें बर्बाद हो चुकी थीं। लेकिन जब मुआवजे की बारी आई, तो आंकड़ों में ऐसी जादूगरी की गई कि किसान दंग रह गए।
फर्जी हस्ताक्षर और ‘जीरो’ खराबा
इस घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू बीमा कंपनी के सर्वेयरों की कार्यप्रणाली है। आरोप है कि:
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फर्जी सर्वे रिपोर्ट: सर्वेयरों ने खेतों पर जाकर वास्तविक नुकसान का जायजा लेने के बजाय दफ्तरों में बैठकर ही रिपोर्ट तैयार कर दी।
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हस्ताक्षर का खेल: लगभग 32,000 किसान फॉर्म्स पर किसानों के फर्जी अंगूठे और हस्ताक्षर किए गए। किसानों को पता ही नहीं चला कि उनके नाम पर सर्वे पूरा हो चुका है।
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डाटा मैनिपुलेशन: जिन खेतों में फसल पूरी तरह बर्बाद थी, वहां रिकॉर्ड में ‘जीरो परसेंट’ (0%) खराबा दिखाया गया। इस चालाकी से बीमा कंपनी को किसानों को करोड़ों रुपये का क्लेम देने से मुक्ति मिल गई।
128 करोड़ का बड़ा आंकड़ा
शुरुआती आकलन के अनुसार, इस धांधली की वजह से किसानों को लगभग 128 करोड़ रुपये के बीमा क्लेम से वंचित रहना पड़ा। यह राशि उन गरीब किसानों की थी जिन्होंने कर्ज लेकर फसल बोई थी और मुआवजे की उम्मीद में बैठे थे। कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने खुद फील्ड में जाकर किसानों से मुलाकात की और पाया कि रिकॉर्ड और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है।
SOG को सौंपी गई जांच
मामले की गंभीरता और इसमें शामिल बड़ी मछलियों को देखते हुए राजस्थान सरकार ने इसकी जांच SOG (Special Operations Group) को सौंप दी है। रावला थाने में इस संबंध में औपचारिक FIR दर्ज कर ली गई है। SOG अब उन सभी सर्वेयरों, बीमा कंपनी के अधिकारियों और बैंक प्रतिनिधियों की भूमिका की जांच कर रही है जिन्होंने इस फाइल वर्क में मिलीभगत की थी।
किसानों में आक्रोश और भविष्य की राह
इस खुलासे के बाद श्रीगंगानगर के किसान संगठनों में भारी रोष है। किसानों की मांग है कि न केवल दोषियों को जेल भेजा जाए, बल्कि उन्हें उनके हक का मुआवजा ब्याज सहित दिया जाए। सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पारदर्शी तरीके से दोबारा आकलन (Re-assessment) की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।