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अनोखी पहल: श्रीगंगानगर के ‘नन्हे परिंदों’ ने कबाड़ से बनाया ‘रोबोटिक डस्टबिन’, स्मार्ट सिटी की राह में बच्चों का बड़ा कदम

राजस्थान के ‘अन्न के कटोरे’ कहे जाने वाले श्रीगंगानगर से आज एक ऐसी खबर आई है जिसने तकनीकी विशेषज्ञों और शहरवासियों को हैरान कर दिया है। जहाँ एक ओर लोग कचरा प्रबंधन की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं शहर के एक सरकारी स्कूल के तीन छात्रों ने कबाड़ और ई-वेस्ट (E-waste) का इस्तेमाल करके एक ‘स्मार्ट रोबोटिक डस्टबिन’ तैयार किया है।

क्या है इस डस्टबिन की खासियत?

यह डस्टबिन सामान्य कचरा पात्रों से बिल्कुल अलग है। इसमें सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसके कारण:

  • ऑटोमैटिक ओपनिंग: जैसे ही कोई व्यक्ति कचरा डालने के लिए डस्टबिन के पास आता है, इसका ढक्कन अपने आप खुल जाता है। इससे स्वच्छता बनी रहती है और किसी को डस्टबिन छूने की जरूरत नहीं पड़ती।

  • वॉइस अलर्ट: कचरा डालने के बाद यह डस्टबिन ‘धन्यवाद’ (Thank You) बोलता है और ‘स्वच्छ भारत’ का संदेश देता है।

  • फुल इंडिकेटर: जब डस्टबिन पूरी तरह भर जाता है, तो यह स्थानीय नगर परिषद के कंट्रोल रूम को एक मैसेज भेज देता है, जिससे समय पर इसकी सफाई हो सके।

मात्र 500 रुपये के खर्च में तैयार

हैरानी की बात यह है कि इस मॉडल को तैयार करने में महज 500 रुपये का खर्च आया है। छात्रों ने पुराने खिलौनों की मोटरों, कार्डबोर्ड और बेकार पड़े सेंसर का उपयोग किया है। स्कूल के प्रधानाचार्य ने बताया कि इन बच्चों ने अपनी पॉकेट मनी बचाकर इस प्रोजेक्ट को पूरा किया है।

नगर परिषद ने सराहा, वार्डों में लगाने की योजना

इस अनोखे आविष्कार की जानकारी मिलते ही नगर परिषद के अधिकारियों ने स्कूल का दौरा किया। सभापति ने घोषणा की है कि इस प्रोटोटाइप को बड़े स्तर पर विकसित करने के लिए वे इंजीनियरिंग कॉलेज के साथ मिलकर काम करेंगे। भविष्य में शहर के मुख्य पार्कों और सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे ‘स्मार्ट डस्टबिन’ लगाए जा सकते हैं।

समाज को संदेश

यह खबर श्रीगंगानगर के लिए इसलिए भी अनूठी है क्योंकि यह साबित करती है कि संसाधनों की कमी कभी प्रतिभा को नहीं रोक सकती। शहर के लोगों ने इन बच्चों की इस ‘जुगाड़ से तकनीक’ वाली सोच की जमकर सराहना की है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️