
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) और स्थानीय पुलिस ने नए साल के दूसरे ही दिन नशे के सौदागरों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। अनूपगढ़ सेक्टर में चलाए गए एक विशेष संयुक्त अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने न केवल करोड़ों रुपये की नशीली खेप बरामद की, बल्कि सीमा पार से होने वाली तस्करी के हाई-टेक नेटवर्क का भी भंडाफोड़ किया है।
कार्रवाई का विवरण: ड्रोन के जरिए रची गई थी साजिश
2 जनवरी की अलसुबह, सीमा पर तैनात सतर्क जवानों ने आसमान में एक संदिग्ध वस्तु की गूंज सुनी। अत्याधुनिक निगरानी उपकरणों और मानवीय इनपुट की मदद से सुरक्षा बलों ने तुरंत मोर्चा संभाला। जांच के दौरान पता चला कि सीमा पार बैठे तस्करों ने भारतीय क्षेत्र में हेरोइन की सप्लाई के लिए चाइना-मेड ड्रोन का सहारा लिया था।
सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इलाके की घेराबंदी की और सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तलाशी के दौरान जवानों ने 4 किलो 88 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन बरामद की। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की अनुमानित कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी जा रही है।
तीन तस्कर गिरफ्तार: स्थानीय नेटवर्क का पर्दाफाश
इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता हेरोइन के साथ-साथ इसमें शामिल ‘रिसीवर’ गिरोह की गिरफ्तारी रही। पुलिस और BSF की संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर तीन आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि ये आरोपी ड्रोन द्वारा गिराई गई खेप को उठाकर आगे सप्लाई करने की फिराक में थे।
जब्त किए गए उपकरण:
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ड्रोन: एक उन्नत चाइना-मेड ड्रोन, जो भारी वजन ढोने में सक्षम है।
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मादक पदार्थ: 4.088 किलोग्राम शुद्ध हेरोइन।
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मोबाइल फोन: संदिग्धों के पास से कई मोबाइल फोन मिले हैं, जिनमें विदेशी नंबरों से संपर्क के सबूत मिले हैं।
सीमा पार ‘नार्को-टेरर’ का खतरा
पिछले कुछ महीनों में राजस्थान की सीमा पर ड्रोन के जरिए तस्करी की घटनाओं में तेजी आई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह ‘नार्को-टेररिज्म’ (मादक पदार्थ आतंकवाद) का हिस्सा है, जिसके जरिए न केवल युवाओं को नशे की लत में धकेलने की कोशिश की जा रही है, बल्कि इससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों में करने की साजिश रची जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था हुई चाक-चौबंद
इस बड़ी बरामदगी के बाद अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अलर्ट जारी कर दिया गया है। BSF के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि घने कोहरे (Fog) का फायदा उठाकर तस्कर ऐसी हरकतों को अंजाम देने की कोशिश करते हैं, लेकिन आधुनिक नाइट-विजन कैमरों और थर्मल इमेजर्स की मदद से इन मंसूबों को नाकाम किया जा रहा है।
“हमारी शून्य-सहनशीलता (Zero Tolerance) नीति और पुलिस के साथ बेहतर समन्वय का ही परिणाम है कि आज इतनी बड़ी खेप पकड़ी गई। हम सीमा की सुरक्षा और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी गिरोह को नहीं छोड़ेंगे।” – सुरक्षा बल के एक वरिष्ठ अधिकारी का बयान।
निष्कर्ष
अनूपगढ़ और श्रीगंगानगर क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई नशे के खिलाफ चल रहे अभियान में एक मील का पत्थर साबित होगी। फिलहाल पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क के तार पंजाब या देश के अन्य राज्यों में कहां तक फैले हुए हैं।