
पटना/लखनऊ। (दिनांक: 29 अक्टूबर 2025)
दिवाली की चमक-दमक के बाद, भारत के पूर्वी हिस्सों में आस्था और सादगी का महापर्व छठ पूजा का माहौल शुरू हो चुका है। फैशन और ब्यूटी एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस पवित्र और पारंपरिक त्योहार पर भारी-भरकम फैशनेबल वियर की जगह सादगी भरा ट्रेडिशनल लुक ट्रेंड में है, जो भारतीय संस्कृति और शालीनता को खूबसूरती से दर्शाता है।
छठ पूजा का अनुष्ठान कठिन होता है, जिसमें व्रती (पूजा करने वाले) घंटों पानी में खड़े रहते हैं और उपवास करते हैं। ऐसे में कम्फर्ट (आराम) और ट्रेडिशनल एलीगेंस (पारंपरिक सुंदरता) सबसे महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
🟠 पारंपरिक वियर: पीला और नारंगी रंग क्यों है ट्रेंड में?
छठ पूजा में पीले और नारंगी रंग के कपड़ों का विशेष महत्व होता है। यह सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि शुभता, सूर्य देव की ऊर्जा और पवित्रता का प्रतीक भी है।
- सादगीपूर्ण साड़ियाँ: इस बार ब्राइट और हेवी एम्ब्रॉयडरी वाली साड़ियों की जगह, शुद्ध कॉटन या सिल्क की साड़ियाँ, जिन पर हल्के काम या साधारण किनारी (Border) हो, ट्रेंड में हैं। विशेष रूप से पीले, नारंगी (गेरुआ) या लाल-पीले रंग के मिश्रण वाली साड़ियाँ व्रती और अन्य महिलाओं द्वारा सबसे ज़्यादा पसंद की जा रही हैं।
- अन्य एलीगेंट वियर: जो व्रती नहीं हैं, वे भी त्योहार की गरिमा बनाए रखने के लिए पारंपरिक सूट या प्लाज़ो सेट पहन रही हैं, जिसमें कम से कम ज्वेलरी और हल्का मेकअप शामिल है।
✨ ब्यूटी हैक्स: प्रदूषण से लड़ो, देसी नुस्खों से चमको
दिवाली के बाद बढ़े हुए प्रदूषण और छठ पूजा के कठिन उपवास की वजह से होने वाली थकान चेहरे पर साफ़ नज़र आ सकती है। इससे निपटने के लिए, ब्यूटी एक्सपर्ट्स केमिकल-आधारित उत्पादों की जगह प्राकृतिक और देसी नुस्खों (DIY Facepacks) का इस्तेमाल करने पर ज़ोर दे रहे हैं:
- बेसन और हल्दी फेसपैक: यह एक क्लासिक और प्रभावी नुस्खा है। बेसन मृत त्वचा (Dead Skin) हटाता है, जबकि हल्दी रंगत को निखारती है।
- दही और शहद का मॉइस्चराइजर: उपवास के दौरान रूखी हुई त्वचा को नमी देने के लिए दही और शहद का मिश्रण बेहतरीन प्राकृतिक मॉइस्चराइजर का काम करता है।
- डार्क सर्कल्स के लिए खीरा: कम नींद के कारण आंखों के नीचे पड़ने वाले डार्क सर्कल्स को कम करने के लिए खीरे के स्लाइस या आलू के रस का इस्तेमाल एक प्रभावी देसी उपाय है।
इस साल का छठ लुक पूरी तरह से सादगी, प्राकृतिक सुंदरता और पारंपरिक रंगों के साथ कम्फर्ट को प्राथमिकता देने पर केंद्रित है, जो इस महान पर्व की पवित्रता के साथ पूरी तरह मेल खाता है।