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वार्म मिनिमलिज्म: 2026 का वह इंटीरियर ट्रेंड जो घर को बना रहा है ‘सुकून का टापू’

नई दिल्ली। पिछले कुछ वर्षों में हमने घरों में सफेद दीवारों, स्टील के फर्नीचर और एकदम खाली दिखने वाले कमरों का दौर देखा, जिसे ‘क्लासिक मिनिमलिज्म’ कहा जाता था। लेकिन साल 2026 तक आते-आते यह ट्रेंड बदल चुका है। अब लोग अपने घरों को केवल ‘साफ-सुथरा’ ही नहीं, बल्कि ‘आत्मीय और गर्म’ (Cozy) बनाना चाहते हैं। यही कारण है कि इस साल ‘वार्म मिनिमलिज्म’ (Warm Minimalism) इंटीरियर डिजाइन की दुनिया का सबसे बड़ा और पसंदीदा शब्द बन गया है। यह शैली दिखावे से हटकर ‘एहसास’ पर केंद्रित है।

क्या है वार्म मिनिमलिज्म?

वार्म मिनिमलिज्म का सीधा सा अर्थ है— “कम सामान, लेकिन ज्यादा सुकून।” यह पुराने मिनिमलिज्म की सादगी को बनाए रखता है, लेकिन उसमें ठंडेपन (Coldness) की जगह प्राकृतिक गर्माहट भर देता है। जहाँ पहले बिना किसी सजावट की ठंडी सफेद दीवारें होती थीं, अब उनकी जगह सॉफ्ट टेक्सचर और मिट्टी से जुड़े रंगों ने ले ली है। इसका उद्देश्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जो घर में प्रवेश करते ही आपकी मानसिक थकान को दूर कर दे।

रंगों का खेल: मिट्टी से जुड़ाव

2026 में घरों के कलर पैलेट में एक बड़ा बदलाव आया है। अब लोग ‘क्लीनिकल व्हाइट’ या ‘हॉस्पिटल ग्रे’ रंगों से ऊब चुके हैं। वार्म मिनिमलिज्म में अब इन रंगों का बोलबाला है:

  • टेराकोटा और रस्ट: ये रंग घर को एक देहाती और जीवंत एहसास देते हैं।

  • जैतून हरा (Olive Green): यह रंग प्रकृति को घर के अंदर लाने का काम करता है।

  • रेतीला बेज (Sandy Beige): यह न्यूट्रल होने के साथ-साथ आँखों को ठंडक और शांति प्रदान करता है।

प्राकृतिक सामग्री और सस्टेनेबिलिटी

वार्म मिनिमलिज्म केवल एक स्टाइल नहीं, बल्कि एक ‘ईको-फ्रेंडली’ जीवनशैली भी है। 2026 में लोग प्लास्टिक और सिंथेटिक सामान के बजाय टिकाऊ और प्राकृतिक सामग्री को प्राथमिकता दे रहे हैं:

  1. बांस और जूट: कालीनों (Rugs) और टोकरियों के लिए जूट और बांस का उपयोग बढ़ा है, जो घर को एक ‘अर्थी’ लुक देता है।

  2. पुनर्चक्रित लकड़ी (Reclaimed Wood): पुराने लकड़ी के फर्नीचर को नया रूप देकर इस्तेमाल करना अब ‘लग्जरी’ माना जा रहा है। इसमें लकड़ी के प्राकृतिक निशान और दरारें छिपाई नहीं जातीं, बल्कि उन्हें सुंदरता के रूप में सराहा जाता है।

  3. लिनन और कॉटन: पर्दों और सोफे के कवर के लिए अब केवल प्राकृतिक रेशों का उपयोग हो रहा है, जो छूने में कोमल और दिखने में सुरुचिपूर्ण होते हैं।

मानसिक शांति और ‘वाबी-साबी’ का प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि वार्म मिनिमलिज्म पर जापानी दर्शन ‘वाबी-साबी’ (अपूर्णता में सुंदरता खोजना) का गहरा प्रभाव है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में घर ही वह इकलौती जगह है जहाँ इंसान शांति चाहता है। कम सामान होने से घर को व्यवस्थित रखना आसान होता है, और प्राकृतिक रंगों के उपयोग से ‘कॉर्टिसोल’ (तनाव हार्मोन) के स्तर में कमी देखी गई है। यह डिजाइन स्टाइल व्यक्ति को वर्तमान क्षण में जीने और सादगी में खुशी खोजने के लिए प्रेरित करता है।

निष्कर्ष

2026 का यह होम ट्रेंड हमें सिखाता है कि एक सुंदर घर वह नहीं है जो कीमती सामान से भरा हो, बल्कि वह है जो आपको ‘सांस लेने’ की जगह दे। वार्म मिनिमलिज्म आधुनिकता और प्रकृति के बीच का वह पुल है, जो हमारे घरों को ‘मकान’ से ‘सुकून के टापू’ में बदल रहा है। यह सादगी का उत्सव है, जिसे मिट्टी की खुशबू और लकड़ी की गर्माहट के साथ मनाया जा रहा है।

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