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गंभीर चेतावनी: मोटापा केवल हृदय रोग नहीं, युवाओं और बुजुर्गों में बढ़ा रहा है कैंसर का खतरा

नई दिल्ली/जिनेवा: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और प्रमुख चिकित्सा संस्थानों की हालिया रिपोर्टों ने एक गंभीर स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा किया है। मोटापे को अब केवल हृदय रोग, मधुमेह या उच्च रक्तचाप तक ही सीमित नहीं समझा जा रहा है, बल्कि इसे युवाओं और बुजुर्गों दोनों में कई प्रकार के कैंसर के जोखिम को तेजी से बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारक माना जा रहा है।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अनियंत्रित वजन जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की श्रेणी से निकलकर सीधे कैंसर के प्रमुख ट्रिगर (Trigger) के रूप में उभर रहा है।

मोटापा और कैंसर का गहरा संबंध:

चिकित्सा अध्ययनों से यह स्थापित हो चुका है कि शरीर का अतिरिक्त वसा (Fat) ऊतक केवल निष्क्रिय ऊर्जा भंडारण (Passive energy storage) नहीं हैं। वे सक्रिय रूप से हार्मोन और साइटोकिन्स (Cytokines) नामक सूजन वाले यौगिकों का उत्पादन करते हैं।

डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि अनियंत्रित वजन दो मुख्य तरीकों से कैंसर के खतरे को बढ़ाता है:

  1. क्रोनिक इंफ्लेमेशन (पुरानी सूजन): शरीर में वसा कोशिकाओं की अधिकता पुरानी सूजन पैदा करती है। यह सूजन डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती है और कोशिकाओं को तेजी से विभाजित होने के लिए प्रेरित कर सकती है, जिससे कैंसर कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा मिलता है।
  2. हार्मोनल असंतुलन: अतिरिक्त वसा, विशेष रूप से रजोनिवृत्ति (Menopause) के बाद की महिलाओं में, एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन का अधिक उत्पादन करती है। ये हार्मोन ब्रेस्ट कैंसर, एंडोमेट्रियल कैंसर और डिम्बग्रंथि (Ovary) के कैंसर को बढ़ावा दे सकते हैं। पुरुषों में भी मोटापा हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है।

खतरे में कई अंग:

शोध में पाया गया है कि मोटापा कई तरह के कैंसर से जुड़ा हुआ है, जिनमें प्रमुख हैं: पेट का कैंसर, लिवर कैंसर, किडनी कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर (आंत का कैंसर), अग्नाशय (Pancreatic) का कैंसर और महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर। यह चिंताजनक है कि मोटापे के मामले सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली के कारण युवाओं में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे उन्हें कम उम्र में ही कैंसर का खतरा झेलना पड़ रहा है।

बचने के लिए क्या करें?

डॉक्टरों ने इस गंभीर खतरे से बचने के लिए सक्रिय जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया है। उनका कहना है कि कठोर उपायों के बजाय जीवनशैली में छोटे, सतत बदलाव करना आवश्यक है:

  • नियमित शारीरिक गतिविधि: प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट की मध्यम-तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि (जैसे तेज चलना, जॉगिंग या योग) को प्राथमिकता दें।
  • संतुलित आहार: चीनी, प्रोसेस्ड फूड्स और अस्वस्थ वसा का सेवन कम करें। अपने आहार में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और लीन प्रोटीन को शामिल करें।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें: बॉडी मास इंडेक्स (BMI) को नियंत्रित रखने पर ध्यान केंद्रित करें।

विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे को एक जीवनशैली विकल्प के बजाय एक बीमारी के रूप में समझना और इसका सक्रिय रूप से प्रबंधन करना ही कैंसर के जोखिम को कम करने की कुंजी है।

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