
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 18 जनवरी 2026 को जारी अपनी नवीनतम वैश्विक रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला और चिंताजनक खुलासा किया है। संगठन के अनुसार, दुनिया के अधिकांश देशों में शुगर युक्त पेय पदार्थ (SSBs) और शराब की कीमतें उनकी उत्पादन लागत और टैक्स में कमी के कारण लगातार गिर रही हैं। यह गिरावट वैश्विक स्तर पर गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे मोटापा, मधुमेह (Diabetes) और हृदय रोगों के विस्फोट का मुख्य कारण बन रही है।
1. रिपोर्ट का मुख्य आधार: टैक्स नीतियों में खामियां
WHO ने अपने विश्लेषण में पाया कि वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने के बावजूद, मीठे सोडा, एनर्जी ड्रिंक्स और शराब की कीमतों में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है।
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टैक्स की कमी: रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के लगभग आधे देश मीठे पेय पदार्थों पर कोई विशेष टैक्स नहीं लगाते हैं।
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सस्ती उपलब्धता: कम कीमतों के कारण ये उत्पाद अब बच्चों और निम्न-आय वर्ग वाले परिवारों की पहुंच में पहले से कहीं अधिक हैं, जो सीधे तौर पर कुपोषण और मोटापे (Double Burden of Malnutrition) को बढ़ावा दे रहे हैं।
2. स्वास्थ्य पर पड़ने वाला घातक प्रभाव
मीठे पेय और शराब का अत्यधिक सेवन सीधे तौर पर शरीर की चयापचय प्रणाली (Metabolism) को नुकसान पहुँचाता है।
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मधुमेह और मोटापा: शुगर वाले पेय पदार्थों में ‘खाली कैलोरी’ होती है, जो शरीर में इंसुलिन प्रतिरोध (Insulin Resistance) पैदा करती है, जिससे टाइप-2 मधुमेह का खतरा 25% तक बढ़ जाता है।
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हृदय रोग: शराब का सेवन रक्तचाप बढ़ाता है और हृदय की मांसपेशियों को कमजोर करता है।
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कैंसर का जोखिम: WHO ने पुनः पुष्टि की है कि शराब का कोई भी स्तर सुरक्षित नहीं है, क्योंकि यह लीवर, स्तन और कोलन कैंसर के प्रमुख कारकों में से एक है।
3. ‘हेल्थ टैक्स’ (Health Tax) की सिफारिश
WHO ने दुनिया भर की सरकारों से अपील की है कि वे इन हानिकारक उत्पादों पर ‘हेल्थ टैक्स’ या ‘सिन टैक्स’ (Sin Tax) लागू करें।
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कीमतों में 20% वृद्धि का सुझाव: विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि इन उत्पादों की कीमतों में टैक्स के माध्यम से 20% की वृद्धि की जाए, तो इनकी खपत में उल्लेखनीय कमी आएगी।
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राजस्व का उपयोग: टैक्स से प्राप्त आय का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, कैंसर अस्पतालों के निर्माण और पोषण संबंधी जागरूकता अभियानों में किया जा सकता है।
4. वैश्विक गैर-संचारी रोगों (NCDs) का बोझ
गैर-संचारी रोग हर साल दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों में से लगभग 74% के लिए जिम्मेदार हैं। भारत जैसे विकासशील देशों में, जहाँ स्वास्थ्य बजट पहले से ही दबाव में है, इन सस्ती बीमारियों का बढ़ता बोझ अर्थव्यवस्था को भी कमजोर कर रहा है। WHO का तर्क है कि रोकथाम (Prevention) हमेशा इलाज से सस्ती होती है, और टैक्स नीतियां रोकथाम का सबसे प्रभावी औजार हैं।
निष्कर्ष: WHO की यह चेतावनी एक ‘वेक-अप कॉल’ है। मीठे पेय और शराब केवल व्यक्तिगत पसंद का मामला नहीं रह गए हैं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन चुके हैं। सरकारों को उद्योगों के दबाव से ऊपर उठकर नागरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी।