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H3N2 का हमला: उत्तर भारत में वायरल संक्रमण की नई लहर

इन्फ्लुएंजा ए का सब-टाइप H3N2 एक संक्रामक श्वसन वायरस है, जो फेफड़ों और श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है। हालांकि यह एक सामान्य फ्लू की तरह लगता है, लेकिन इस बार इसके लक्षण पहले की तुलना में अधिक गंभीर और लंबे समय तक चलने वाले देखे जा रहे हैं।

प्रमुख लक्षण: साधारण सर्दी-जुकाम से कैसे है अलग?

डॉक्टरों के अनुसार, H3N2 के मरीजों में निम्नलिखित लक्षण प्रमुखता से देखे जा रहे हैं:

  • लगातार खांसी: यह इस वायरस का सबसे परेशान करने वाला लक्षण है। कई मरीजों में खांसी 2 से 3 सप्ताह तक बनी रहती है।

  • तेज बुखार: मरीजों को अचानक ठंड लगने के साथ तेज बुखार (102°F-103°F) आता है, जो 3-5 दिनों तक रह सकता है।

  • शरीर और जोड़ों में दर्द: तेज बदन दर्द और थकान के कारण मरीज अत्यधिक कमजोरी महसूस करता है।

  • श्वसन संबंधी समस्याएं: कुछ मामलों में सांस फूलने और सीने में जकड़न की शिकायत भी मिल रही है।

मामलों में वृद्धि के पीछे के कारण

विशेषज्ञों ने इस प्रकोप के लिए तीन मुख्य कारकों को जिम्मेदार ठहराया है:

  1. बदलता मौसम: फरवरी के महीने में दिन और रात के तापमान में होने वाला बड़ा अंतर वायरस के पनपने के लिए अनुकूल होता है।

  2. वायु प्रदूषण: दिल्ली-NCR में हाल ही में बढ़ा ‘गंभीर’ श्रेणी का प्रदूषण फेफड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे वायरस आसानी से हमला करता है।

  3. कम आर्द्रता (Low Humidity): हवा में नमी की कमी के कारण वायरल कण वातावरण में अधिक समय तक जीवित रहते हैं और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

डॉक्टरों की सलाह और उपचार

अस्पतालों की ओपीडी में 50% से अधिक मामले इसी संक्रमण के आ रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं:

  • एंटीबायोटिक्स से बचें: डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यह एक वायरल संक्रमण है, न कि बैक्टीरियल। इसलिए बिना डॉक्टरी सलाह के ‘एजीथ्रोमाइसिन’ या अन्य एंटीबायोटिक्स का सेवन न करें, क्योंकि इससे ‘एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस’ का खतरा बढ़ता है।

  • हाइड्रेशन: शरीर में पानी की कमी न होने दें। गुनगुना पानी, सूप और तरल पदार्थों का सेवन करें।

  • मास्क और दूरी: भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनना शुरू करें। यह न केवल प्रदूषण से बचाएगा बल्कि वायरस के प्रसार को भी रोकेगा।

  • टीकाकरण: विशेषज्ञों ने वार्षिक ‘फ्लू वैक्सीन’ लगवाने की सलाह दी है, जो संक्रमण की गंभीरता को काफी हद तक कम कर सकती है।

जोखिम वाले समूह

H3N2 विशेष रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, 65 वर्ष से अधिक के बुजुर्गों और उन लोगों के लिए घातक हो सकता है जो पहले से ही अस्थमा, मधुमेह या हृदय रोगों से पीड़ित हैं। ऐसे लोगों को लक्षण दिखते ही तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।


निष्कर्ष: उत्तर भारत में H3N2 का बढ़ता प्रकोप एक चेतावनी है कि हमें अपनी जीवनशैली और स्वच्छता के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। बदलते मौसम में बरती गई थोड़ी सी सावधानी आपको लंबे समय की बीमारी से बचा सकती है।

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