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Alarming Trend: ‘मेनोपॉज की उम्र’ खिसकी 30 साल पर! भारत में समय से पहले पेरी-मेनोपॉज के मामले बढ़े, महिलाएं और विशेषज्ञ चिंतित 🤯

नई दिल्ली। भारतीय महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद चिंताजनक और गंभीर रुझान (Trend) सामने आया है। जिस मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) की औसत उम्र 45 से 50 वर्ष मानी जाती थी, अब उसके शुरुआती लक्षण, जिन्हें पेरी-मेनोपॉज (Perimenopause) कहा जाता है, 30 से 35 वर्ष की युवा महिलाओं में दिखाई देने लगे हैं। महिला रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) ने चेतावनी दी है कि भारत में समय से पहले ओवेरियन अपर्याप्तता (Premature Ovarian Insufficiency) या POI के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो सीधे तौर पर प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) और समग्र जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है।

पेरी-मेनोपॉज वह संक्रमणकालीन अवस्था है जब महिला के अंडाशय (Ovaries) धीरे-धीरे कम एस्ट्रोजन बनाना शुरू कर देते हैं, जिससे मासिक चक्र अनियमित हो जाता है। 30 के दशक में इसके लक्षण—जैसे अनियमित पीरियड, हॉट फ्लैशेस (गर्मी लगना), मूड स्विंग्स और नींद की समस्या—दिखना गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत है।

समय से पहले मेनोपॉज के पीछे के प्रमुख कारण:

विशेषज्ञ इस अलार्मिंग ट्रेंड के पीछे कई आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कारकों को जिम्मेदार मानते हैं:

  1. क्रॉनिक तनाव (Chronic Stress): करियर की प्रतिस्पर्धा, वर्क-लाइफ बैलेंस का अभाव और सामाजिक दबाव के कारण युवा महिलाओं में लंबे समय तक रहने वाला तनाव, हार्मोनल संतुलन (Hormonal Balance) को बुरी तरह बिगाड़ रहा है।
  2. अनहेल्दी लाइफस्टाइल और पोषण की कमी: जंक फूड का अत्यधिक सेवन, पोषक तत्वों, खासकर विटामिन डी और कैल्शियम की कमी, और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि का अभाव।
  3. नींद की कमी (Sleep Deprivation): देर रात तक काम करना या स्क्रीन पर समय बिताना, शरीर की प्राकृतिक लय (Circadian Rhythm) को बाधित करता है, जिससे हार्मोनल गड़बड़ी होती है।
  4. पर्यावरण के कारक: बढ़ता वायु प्रदूषण और कीटनाशकों से युक्त खाद्य पदार्थ भी हार्मोन-उत्पादक ग्रंथियों पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं।

स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति वर्मा ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा, “समय से पहले मेनोपॉज न केवल बांझपन (Infertility) की समस्या पैदा करता है, बल्कि यह महिलाओं में हड्डी घनत्व (Bone Density) को भी तेजी से कम करता है, जिससे भविष्य में ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डी रोग) और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।”

डॉक्टरों की तत्काल सलाह:

विशेषज्ञों ने युवा महिलाओं से अपनी जीवनशैली में तत्काल सुधार करने का आग्रह किया है। इसमें तनाव प्रबंधन के लिए योग और मेडिटेशन, पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद लेना, और ताजे फल, सब्जियों तथा प्रोटीन से भरपूर पौष्टिक आहार शामिल करने की सलाह दी गई है। 30 की उम्र में किसी भी तरह के मासिक चक्र में बदलाव या हॉट फ्लैशेस को नजरअंदाज न करने और तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेने पर जोर दिया गया है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️