
नई दिल्ली। (दिनांक: 29 अक्टूबर 2025)
विश्व स्ट्रोक दिवस (World Stroke Day) से पहले स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान (Neurology) विशेषज्ञों ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। भारत में अब ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात) को केवल बुढ़ापे की बीमारी मानना सही नहीं है। डॉक्टरों के क्लीनिकल डेटा के अनुसार, 30 से 40 साल के आयु वर्ग के युवाओं में स्ट्रोक के मामलों में खतरनाक वृद्धि देखी जा रही है। यह प्रवृत्ति न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि हमारी आधुनिक जीवनशैली कितनी घातक साबित हो रही है।
📉 अनियंत्रित लाइफस्टाइल: युवाओं में स्ट्रोक का सबसे बड़ा कारण
चिकित्सा जगत के अनुसार, युवाओं में बढ़ते स्ट्रोक का मुख्य कारण उनकी अनियंत्रित और गतिहीन (Sedentary) जीवनशैली है।
- उच्च रक्तचाप (High BP) और डायबिटीज: कम उम्र में भी तनावपूर्ण जीवन और जंक फूड के अत्यधिक सेवन से हाई ब्लड प्रेशर और टाइप 2 डायबिटीज जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ये दोनों स्थितियाँ रक्त वाहिकाओं को कमजोर करती हैं, जिससे स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
- मानसिक तनाव और नींद की कमी: कॉर्पोरेट दबाव, करियर की चिंता और रात भर काम करने या सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने की आदत से मानसिक तनाव (Stress) और खराब नींद की समस्याएँ बढ़ती हैं। कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन रक्तचाप को बढ़ाते हैं, जबकि नींद की कमी शरीर के प्राकृतिक मरम्मत तंत्र को बाधित करती है।
- अन्य कारक: धूम्रपान (Smoking), शराब का अत्यधिक सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी भी प्रमुख कारक हैं।
💨 वायु प्रदूषण का घातक प्रभाव
विशेषज्ञों ने स्ट्रोक के बढ़ते जोखिम में एक और गंभीर पहलू पर प्रकाश डाला है: बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण।
- दूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (Particulate Matter) केवल फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
- ये कण रक्त वाहिकाओं में सूजन और थक्के (Clotting) का कारण बन सकते हैं, जिससे मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह बाधित होता है और ब्रेन अटैक होता है।
🚨 लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें: ‘FAST’ टेस्ट
डॉक्टरों ने युवाओं से अपील की है कि वे स्ट्रोक के शुरुआती चेतावनी संकेतों को कतई नज़रअंदाज़ न करें। स्ट्रोक की पहचान के लिए ‘FAST’ टेस्ट सबसे प्रभावी है:
- Face drooping (चेहरे का टेढ़ा होना)
- Arm weakness (हाथ या बांह में अचानक कमजोरी)
- Speech difficulty (बोलने में लड़खड़ाहट)
- Time to call emergency (तुरंत चिकित्सा सहायता लें)
यह महत्वपूर्ण है कि लक्षणों के दिखते ही व्यक्ति को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जाए, क्योंकि स्ट्रोक में हर मिनट कीमती होता है।