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🛡️ AMR से निपटने के लिए भारत का नया कवच: NAP-AMR 2.0 लॉन्च

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा ने भारत में रोगाणुरोधी प्रतिरोध (Antimicrobial Resistance – AMR) की बढ़ती चुनौती का सामना करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रीय कार्य योजना (NAP-AMR) 2.0 का शुभारंभ किया है। यह नई योजना AMR के वैश्विक खतरे से निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसे अक्सर ‘साइलेंट पेंडेमिक’ (Silent Pandemic) भी कहा जाता है।


📅 NAP-AMR 2.0 की समय-सीमा और उद्देश्य

 

NAP-AMR 2.0, जो 2025 से 2029 तक की अवधि के लिए लागू रहेगी, को विशेष रूप से विश्व AMR जागरूकता सप्ताह (18-24 नवंबर) के पहले दिन लॉन्च किया गया है।

मुख्य उद्देश्य:

 

इस एक्शन प्लान का प्राथमिक लक्ष्य एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग और दुरुपयोग को रोकना है। जब एंटीबायोटिक दवाओं का अनुचित तरीके से इस्तेमाल किया जाता है, तो बैक्टीरिया, वायरस, फंगी और परजीवी खुद को बदलने लगते हैं और दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधी बन जाते हैं। इससे संक्रमण का इलाज मुश्किल या असंभव हो जाता है।


🤝 “वन हेल्थ” दृष्टिकोण पर जोर

 

NAP-AMR 2.0 की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका “वन हेल्थ” (One Health) दृष्टिकोण है। यह अवधारणा मानती है कि मानव स्वास्थ्य, पशु स्वास्थ्य और पर्यावरण एक-दूसरे से अविभाज्य रूप से जुड़े हुए हैं। AMR की समस्या केवल मानव चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इन सभी क्षेत्रों को प्रभावित करती है।

इस दृष्टिकोण के तहत, निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है:

    1. 👨‍⚕️ मानव स्वास्थ्य: अस्पतालों और क्लीनिकों में एंटीबायोटिक के उचित उपयोग (एंटीबायोटिक स्टीवर्डशिप) को बढ़ावा देना।

    2. 🐄 पशु स्वास्थ्य: पशुधन (पशुओं) में एंटीबायोटिक के अनावश्यक और वृद्धि-प्रोत्साहक उपयोग (Growth Promoter) को रोकना।

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  1. 🌾 कृषि और खाद्य सुरक्षा: फसल उत्पादन और खाद्य श्रृंखला में एंटीबायोटिक अवशेषों और प्रतिरोध को कम करना।

  2. 🌳 पर्यावरण: दवा उत्पादन स्थलों और अपशिष्ट जल प्रबंधन (Wastewater Management) के माध्यम से पर्यावरण में एंटीबायोटिक तत्वों और प्रतिरोधी जीवों के प्रसार को नियंत्रित करना।


📈 योजना की आवश्यकता और महत्व

 

भारत में AMR की स्थिति गंभीर है, जहाँ कई सामान्य संक्रमण अब एंटीबायोटिक दवाओं के एक समूह के खिलाफ प्रतिरोधी हो चुके हैं। यदि इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो साधारण सर्जरी या मामूली संक्रमण का इलाज भी भविष्य में जानलेवा बन सकता है।

NAP-AMR 2.0, सभी हितधारकों (Stakeholders) को एक छत के नीचे लाकर, सहयोगी और समन्वित प्रयासों के माध्यम से इस संकट का मुकाबला करने का प्रयास है। यह न केवल वर्तमान संक्रमणों के प्रभावी उपचार को सुनिश्चित करने में मदद करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एंटीबायोटिक दवाओं की प्रभावशीलता को भी बनाए रखेगा।

यह योजना भारत को वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में एक नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए सशक्त करती है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️