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🚀 स्वास्थ्य क्रांति की ओर भारत: सिकल सेल रोग के लिए पहली स्वदेशी CRISPR जीन थेरेपी ‘BIRSA 101’ लॉन्च

भारत ने जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने आज सिकल सेल रोग (Sickle Cell Disease – SCD) के उपचार के लिए देश की पहली पूर्णतः स्वदेशी CRISPR-आधारित जीन थेरेपी (Gene Therapy) को औपचारिक रूप से लॉन्च कर दिया है। इस महत्वपूर्ण थेरेपी को ‘BIRSA 101’ नाम दिया गया है, जो न केवल चिकित्सा विज्ञान में भारत की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि उन लाखों लोगों के लिए भी आशा की किरण है जो इस जानलेवा आनुवंशिक रोग से पीड़ित हैं।

BIRSA 101: एक गेम-चेंजर उपलब्धि

 

सिकल सेल रोग एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार है जो मुख्य रूप से देश की आदिवासी आबादी (Tribal Population) को प्रभावित करता है। इस रोग में, लाल रक्त कोशिकाएं (Red Blood Cells) अर्धचंद्र (Sickle) का आकार ले लेती हैं, जिससे वे कठोर हो जाती हैं और रक्त वाहिकाओं (blood vessels) को अवरुद्ध कर देती हैं। इसके परिणामस्वरूप गंभीर दर्द, अंग क्षति और कम जीवन प्रत्याशा होती है।

‘BIRSA 101’ थेरेपी CRISPR-Cas9 तकनीक पर आधारित है, जिसे ‘जेनेटिक कैंची’ के नाम से भी जाना जाता है। यह तकनीक शरीर की कोशिकाओं के DNA में सटीक बदलाव करने की अनुमति देती है, जिससे रोग पैदा करने वाले दोषपूर्ण जीन (faulty gene) को ठीक किया जा सकता है। इस थेरेपी के तहत, रोगी के अपने ही अस्थि मज्जा (Bone Marrow) की कोशिकाओं को निकालकर प्रयोगशाला में आनुवंशिक रूप से संशोधित किया जाता है और फिर वापस रोगी में प्रत्यारोपित (transplanted) कर दिया जाता है, जिससे सिकल सेल मुक्त रक्त कोशिकाएं बनने लगती हैं।

कम लागत: लाखों रोगियों को मिलेगी राहत

 

इस थेरेपी की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्वदेशी प्रकृति और कम लागत है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, इसी तरह की जीन थेरेपी की लागत ₹20 करोड़ से ₹25 करोड़ के बीच आती है, जो इसे भारत में आम आदमी की पहुंच से दूर रखती है। इसके विपरीत, ‘BIRSA 101’ को भारतीय शोधकर्ताओं ने देश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया है। यह थेरेपी विदेशी उपचारों की तुलना में बहुत कम लागत पर उपलब्ध होगी, जिससे यह भारत के ‘सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 2047’ के लिए एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन जाएगी।

केंद्रीय मंत्री ने लॉन्च के दौरान जोर दिया कि यह सफलता ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को दर्शाती है और अब भारत स्वास्थ्य सेवा नवाचार में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। यह थेरेपी भारत को सिकल सेल रोग के वैश्विक उपचार मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगी और भविष्य में अन्य आनुवंशिक विकारों के उपचार के लिए भी मार्ग प्रशस्त करेगी।

मिशन का लक्ष्य

 

इस थेरेपी का लॉन्च, राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिसका उद्देश्य 2047 तक देश से इस रोग को जड़ से खत्म करना है। सरकार अब इस थेरेपी को देश के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाने के लिए एक मजबूत वितरण नेटवर्क बनाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

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