🢀
🔬 नल के पानी में ‘सुपरबग जीन’: IIT मद्रास की रिपोर्ट ने बढ़ाई जन स्वास्थ्य की चिंता

चेन्नई/कोलकाता। (दिनांक: 29 अक्टूबर 2025)

भारतीय जन स्वास्थ्य (Public Health) के लिए एक बड़ी चुनौती सामने आई है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) और जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ZSI) कोलकाता के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक संयुक्त शोध में भारत के कई शहरों में नल के पानी (Tap Water) में ऐसे सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) की उपस्थिति का पता चला है, जिनमें खतरनाक ‘सुपरबग जीन’ मौजूद हैं। यह खुलासा इस बात की ओर इशारा करता है कि पानी को शुद्ध करने की मौजूदा प्रक्रियाएँ पर्याप्त नहीं हैं।

 

🧬 ‘सुपरबग जीन’ क्या है और यह क्यों खतरनाक है?

 

वैज्ञानिकों ने पानी के नमूनों की डीएनए टेस्टिंग की, जिसमें पाया गया कि कई माइक्रोऑर्गेनिज्म में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन (Antibiotic Resistance Genes – ARGs) हैं। इन्हें ही आम भाषा में ‘सुपरबग जीन’ कहा जाता है।

  • खतरे की परिभाषा: इन जीन्स का मतलब है कि अगर कोई व्यक्ति इस पानी के माध्यम से इन बैक्टीरिया से संक्रमित होता है, तो संक्रमण का इलाज करने के लिए उपयोग की जाने वाली सामान्य एंटीबायोटिक दवाएँ अप्रभावी हो सकती हैं।
  • एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस: यह स्थिति एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के वैश्विक खतरे को बढ़ाती है, जहां साधारण संक्रमणों का इलाज भी मुश्किल हो जाता है, जिससे बीमारी लंबी खिंचती है, अस्पताल में भर्ती होने की अवधि बढ़ती है और मृत्यु दर भी बढ़ सकती है।

 

💧 साफ पानी की गुणवत्ता पर सवाल

 

यह शोध इस मिथक को तोड़ता है कि शहरी जल आपूर्ति द्वारा “साफ किया गया” पानी पूरी तरह से सुरक्षित है।

  • शोध के निष्कर्षों से पता चलता है कि पानी को साफ करने के बाद भी, ये प्रतिरोधी (Resistant) माइक्रोऑर्गेनिज्म पेयजल वितरण प्रणाली (Water Distribution System) में प्रवेश कर रहे हैं।
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि इन जीन्स का स्रोत सीवेज (Sewage) और औद्योगिक कचरा हो सकता है, जो जल स्रोतों में मिल जाता है।

 

🚨 भविष्य की चुनौती और तत्काल ज़रूरत

 

इस अध्ययन ने भारतीय स्वास्थ्य और जल प्रबंधन प्रणालियों के लिए एक तत्काल चुनौती खड़ी कर दी है।

  1. जल जांच को मज़बूत करना: अब केवल क्लोरीन या सामान्य बैक्टीरिया काउंट की जांच पर्याप्त नहीं है। पानी की गुणवत्ता जांच (Water Testing) को और अधिक परिष्कृत (Sophisticated) करने की ज़रूरत है, जिसमें एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जीन्स की उपस्थिति की भी नियमित रूप से निगरानी की जाए।
  2. सीवेज प्रबंधन: सुपरबग के प्रसार को रोकने के लिए सीवेज उपचार संयंत्रों (Sewage Treatment Plants) को उन्नत करने और औद्योगिक कचरे को जल स्रोतों में जाने से रोकने के लिए सख्त नियम लागू करने की आवश्यकता है।

यह शोध स्पष्ट करता है कि साफ पानी अब केवल स्वच्छता का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसे गंभीर जन स्वास्थ्य संकट को रोकने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️