
नई दिल्ली। 21 नवंबर 2025।
देश में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण को एक नई दिशा देने के लिए आयोजित किए गए महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मुक्त डिजिटल स्वास्थ्य शिखर सम्मेलन-2025 का आज दूसरा दिन था। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में, देश भर के स्वास्थ्य अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष पर सहमति व्यक्त की है: भविष्य के स्वास्थ्य समाधानों को अंतर-संचालनीय (Inter-operable) और मानक-आधारित होना चाहिए।
🌐 ‘अंतर-संचालनीयता’ क्यों जरूरी?
‘अंतर-संचालनीयता’ का सीधा अर्थ है कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में उपयोग किए जा रहे विभिन्न तकनीकी प्लेटफॉर्म, सॉफ्टवेयर और डेटाबेस—चाहे वे सरकारी हों या निजी—एक-दूसरे के साथ आसानी से और सुरक्षित रूप से डेटा साझा कर सकें।
वर्तमान में, अक्सर यह देखा जाता है कि एक अस्पताल के रिकॉर्ड को दूसरे अस्पताल में एक्सेस करना या किसी सरकारी स्वास्थ्य पोर्टल से निजी क्लिनिक का डेटा सिंक करना मुश्किल होता है। इस बाधा के कारण मरीज को हर जगह अपनी पुरानी रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी बार-बार देनी पड़ती है।
शिखर सम्मेलन में यह तय किया गया कि इस अंतर-संचालनीय इकोसिस्टम को बनाने से मरीजों का इलाज अधिक प्रभावी, तेज़ और निर्बाध (Seamless) हो जाएगा। उदाहरण के लिए, एक मरीज का डिजिटल रिकॉर्ड (जैसे कि उसका एक्स-रे या ब्लड टेस्ट रिपोर्ट) उसके निजी स्वास्थ्य ऐप, सरकारी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) अकाउंट, और देश के किसी भी अस्पताल के सिस्टम में तुरंत उपलब्ध होगा। इससे डॉक्टर को तुरंत सटीक जानकारी मिलेगी और इलाज में देरी नहीं होगी।
🏛️ तकनीक से ज्यादा ‘शासन’ और ‘लचीली प्रणालियाँ’ महत्वपूर्ण
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि स्थायी डिजिटल स्वास्थ्य केवल अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने तक सीमित नहीं है। बल्कि, यह ‘जवाबदेह शासन (Accountable Governance)’ और ‘लचीली प्रणालियों’ को स्थापित करने के बारे में है, जो नागरिकों को प्राथमिकता देती हैं।
वक्ताओं ने इस बात पर प्रकाश डाला कि डेटा सुरक्षा, निजता (Privacy) और तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। जवाबदेह शासन यह सुनिश्चित करेगा कि डेटा का दुरुपयोग न हो और हर नागरिक को अपनी स्वास्थ्य जानकारी पर पूरा नियंत्रण हो। लचीली प्रणालियाँ भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों (जैसे कि नई महामारियाँ) के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम होंगी।
निष्कर्ष के रूप में, यह शिखर सम्मेलन भारत के डिजिटल स्वास्थ्य यात्रा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, जिसने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में स्वास्थ्य तकनीक का विकास केवल व्यक्तिगत ऐप्स तक सीमित न होकर, एक एकीकृत (Integrated) और सहयोगी राष्ट्रीय नेटवर्क के रूप में होगा।