
नई दिल्ली/गुरुग्राम। देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर में लगातार खतरनाक स्तर पर बने हुए उच्च वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ने एक गंभीर स्वास्थ्य संकट को जन्म दिया है। फेफड़ों का कैंसर, जिसे पारंपरिक रूप से धूम्रपान से जुड़ी बीमारी माना जाता था, अब अपनी पहचान बदल रहा है। चिकित्सकों और विशेषज्ञों की चेतावनी है कि दिल्ली की जहरीली हवा में सांस लेना अब फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण बन चुका है, जिसका खामियाजा सबसे ज्यादा धूम्रपान न करने वाले (Non-Smokers), युवाओं और महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है।
बदलती प्रवृत्ति: धूम्रपान न करने वाले 70% मरीज
डॉक्टरों के पास आने वाले फेफड़ों के कैंसर के मामलों के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम अस्पताल के फेफड़ों के विशेषज्ञों के अनुसार, उनके क्लिनिक में फेफड़ों के कैंसर के कुल मरीजों में से लगभग 70% मरीज ऐसे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बीमारी की जड़ें अब तंबाकू से हटकर सीधे वातावरण में मौजूद प्रदूषण में चली गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सूक्ष्म कण (PM 2.5) फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं, जहां वे पुरानी सूजन और कोशिका क्षति का कारण बनते हैं, जो अंततः कैंसर का रूप ले लेती है। प्रदूषित हवा में मौजूद ये हानिकारक कण धूम्रपान के धुएं जितने ही विषैले या उससे भी अधिक हो सकते हैं, क्योंकि व्यक्ति दिन-रात लगातार इन कणों को श्वास के माध्यम से अंदर लेता रहता है।
युवाओं और महिलाओं में चिंताजनक वृद्धि
मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम के ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) ने इस प्रवृत्ति में एक और खतरनाक बदलाव की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि फेफड़ों का कैंसर अब केवल 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों तक ही सीमित नहीं रहा है।
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युवा आबादी: 24 से 25 साल के युवाओं में भी फेफड़ों के कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। इस आयु वर्ग में रोग का निदान और उपचार करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि युवा अवस्था में इस रोग की अपेक्षा कम की जाती है।
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महिला रोगी: विशेष रूप से ऐसी महिलाएं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है, उनमें फेफड़ों के कैंसर की दर तेजी से बढ़ रही है। इसका सीधा संबंध घर के बाहर और अंदर दोनों जगह मौजूद वायु प्रदूषण से जोड़ा जा रहा है।
चिकित्सकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि दिल्ली-एनसीआर की प्रदूषित हवा में लगातार सांस लेना लंबे समय में धूम्रपान जितना या उससे भी अधिक खतरनाक साबित हो सकता है। यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है जिसके लिए तत्काल और व्यापक उपायों की आवश्यकता है, जिसमें व्यक्तिगत स्तर पर N-95 मास्क का उपयोग करने से लेकर सरकारी स्तर पर प्रदूषण नियंत्रण के कठोर नियम लागू करना शामिल है।
डॉक्टरों ने लोगों से खांसी, सांस लेने में तकलीफ, या लगातार सीने में दर्द जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने और तुरंत जांच कराने का आग्रह किया है।