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🌡️ स्वास्थ्य अलर्ट: बदलते मौसम का कहर—पेट के संक्रमण और हेपेटाइटिस ने दी दस्तक!

जैसे-जैसे सूरज के तेवर तल्ख हो रहे हैं और भारत के कई हिस्सों में तापमान में अचानक बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है, स्वास्थ्य विभाग ने एक गंभीर ‘पब्लिक हेल्थ एडवाइजरी’ जारी की है। बदलते मौसम के इस दौर में अस्पताल की ओपीडी (OPD) में अचानक पेट के संक्रमण (Stomach Infections) और हेपेटाइटिस (Hepatitis) के मरीजों की बाढ़ आ गई है। यह स्थिति जितनी साधारण दिखती है, उतनी ही जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन ने इसे ‘सावधानी का समय’ घोषित किया है।


💧 दूषित पानी और खुला भोजन: बीमारी का मुख्य ‘हाईवे’

तापमान बढ़ते ही बैक्टीरिया और वायरस के पनपने की रफ्तार तेज हो जाती है। विशेष रूप से ई-कोलाई (E.coli) और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया दूषित पानी और अधपके या खुले में रखे भोजन के जरिए हमारे शरीर पर हमला कर रहे हैं।

अस्पतालों की वर्तमान स्थिति:

  • गैस्ट्रोएंटेराइटिस (Gastroenteritis): उल्टी, दस्त और पेट में मरोड़ की शिकायतों के साथ हर दिन सैकड़ों मरीज भर्ती हो रहे हैं।

  • हेपेटाइटिस-A और E: डॉक्टरों के अनुसार, यह दोनों बीमारियां दूषित जल (Contaminated Water) से फैलती हैं। इनमें लिवर में सूजन आ जाती है, जिससे पीलिया (Jaundice) और अत्यधिक कमजोरी महसूस होती है।


🏥 ‘हर्बल उपचार’ और ‘झाड़-फूंक’ का घातक जाल

खबर की सबसे बड़ी सनसनी यह है कि आज भी ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोग लिवर की बीमारियों या पीलिया होने पर डॉक्टर के पास जाने के बजाय ‘झाड़-फूंक’ या बिना किसी वैज्ञानिक आधार वाले ‘हर्बल टोटकों’ का सहारा ले रहे हैं।

विशेषज्ञों की चेतावनी: लिवर के विशेषज्ञ (Hepatologists) कहते हैं कि हेपेटाइटिस में लिवर पहले से ही कमजोर होता है। ऐसी स्थिति में अज्ञात जड़ी-बूटियों का काढ़ा या झाड़-फूंक के चक्कर में समय बर्बाद करना ‘लिवर फेलियर’ का कारण बन सकता है। गलत जानकारी और इलाज में देरी जानलेवा साबित हो रही है। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को भी पीली आंखें, गहरा पेशाब या लगातार मितली आ रही है, तो तुरंत लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) करवाएं।

[Image showing the liver and its function in the human body]


🛡️ कैसे बचें इस ‘मौसमी हमले’ से?

डॉक्टरों ने इस संक्रमण चक्र को तोड़ने के लिए 5 मुख्य सुझाव दिए हैं:

  1. पानी का शुद्धिकरण: हमेशा उबालकर या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं। बाहर मिलने वाले खुले गन्ने के रस या बर्फ के गोलों से बचें, क्योंकि इनमें इस्तेमाल होने वाली बर्फ अक्सर दूषित होती है।

  2. बासी भोजन को कहें ‘ना’: तापमान बढ़ने से भोजन 3-4 घंटे में ही खराब होने लगता है। हमेशा ताजा बना भोजन ही ग्रहण करें।

  3. हाथों की सफाई: खाना खाने से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोना संक्रमण को 50% तक कम कर देता है।

  4. सब्जियों और फलों की धुलाई: बाजार से लाई गई हरी सब्जियों को हल्के गुनगुने पानी में नमक डालकर धोएं।

  5. टीकाकरण (Vaccination): हेपेटाइटिस-A के लिए उपलब्ध टीकों के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें।


📢 प्रशासन की अपील: “अफवाहों से बचें, विज्ञान को चुनें”

स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे भ्रामक दावों से बचने की सलाह दी है। गर्मी के इस मौसम में खुद को हाइड्रेटेड रखें, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि आपका जल स्रोत सुरक्षित है। याद रखें, पेट की एक मामूली समस्या अगर समय पर न संभाली जाए, तो वह गंभीर हेपेटाइटिस का रूप ले सकती है।

“इस मौसम में डिहाइड्रेशन और लिवर इन्फेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा होता है। घरेलू नुस्खों के बजाय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) पर जाकर मुफ्त परामर्श लें।” — मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO)

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️