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🌡️ सनसनीखेज रिपोर्ट: दक्षिण एशिया में ‘भीषण गर्मी’ का कहर—WHO और रॉकफेलर फाउंडेशन की महा-पहल!

आज जब हम फरवरी के महीने में ही पसीने से तर-बतर हो रहे हैं, तब वैश्विक मंच से एक ऐसी खबर आई है जिसने भविष्य की भयावह तस्वीर साफ कर दी है। मुंबई में चल रहे ‘क्लाइमेट वीक’ के दौरान आज विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और रॉकफेलर फाउंडेशन ने दक्षिण एशिया के लिए एक ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। भारत और पाकिस्तान जैसे देशों में बढ़ती भीषण गर्मी (Extreme Heat) अब सिर्फ मौसम का मिजाज नहीं, बल्कि एक ‘साइलेंट किलर’ बन चुकी है।


🚨 मौत का नया आंकड़ा: सालाना 2 लाख से ज्यादा जानें!

इस रिपोर्ट में जो सबसे चौंकाने वाला और डराने वाला खुलासा हुआ है, वह है मौतों का आंकड़ा। दक्षिण एशिया में बढ़ते तापमान और ‘हीटवेव’ के कारण होने वाली मौतें अब सालाना 2,00,000 के आंकड़े को पार कर गई हैं। यह संख्या किसी भी महामारी या युद्ध से होने वाली मौतों से कहीं अधिक डरावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अभी कदम नहीं उठाए गए, तो 2030 तक यह आंकड़ा दोगुना हो सकता है।

🤝 WHO की नई ढाल: ‘साउथ एशिया क्लाइमेट-हेल्थ डेस्क’

इस संकट से निपटने के लिए WHO और रॉकफेलर फाउंडेशन ने हाथ मिलाया है। इस साझेदारी के तहत एक क्रांतिकारी पहल की गई है—‘साउथ एशिया क्लाइमेट-हेल्थ डेस्क’ की स्थापना। यह डेस्क केवल मौसम का पूर्वानुमान नहीं बताएगा, बल्कि यह स्वास्थ्य और पर्यावरण के डेटा को मिलाकर ‘प्रिसीजन हेल्थ वार्निंग’ (सटीक स्वास्थ्य चेतावनी) जारी करेगा।

इस पहल की मुख्य विशेषताएं:

  • एडवांस वार्निंग सिस्टम: लू चलने से 72 घंटे पहले ही स्थानीय अस्पतालों और प्रशासन को अलर्ट भेज दिया जाएगा।

  • कमजोर वर्गों पर ध्यान: झुग्गी-बस्तियों, निर्माण श्रमिकों और किसानों के लिए विशेष ‘कूलिंग रिलीफ’ प्लान तैयार किए जाएंगे।

  • हीट-प्रूफ इंफ्रास्ट्रक्चर: अस्पतालों के वार्डों को इस तरह से डिजाइन करने की ट्रेनिंग दी जाएगी कि वे बिना बिजली के भी ठंडे रह सकें।


🥵 भारत और पाकिस्तान: ‘हीटवेव’ के नए हॉटस्पॉट

दक्षिण एशिया में भारत और पाकिस्तान सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। बढ़ते शहरीकरण (Urban Heat Islands) और पेड़ों की कटाई ने इन देशों के कई शहरों को ‘कंक्रीट के ओवन’ में बदल दिया है।

“गर्मी अब सिर्फ असहजता की बात नहीं है, यह सीधा हमारे अंगों (Organs) पर हमला कर रही है। किडनी फेलियर और हीट स्ट्रोक के बढ़ते मामले इस बात का प्रमाण हैं।” — डॉ. मारिया नीरा (WHO डायरेक्टर)

🏛️ क्या प्रशासन तैयार है?

इस नई पहल का उद्देश्य सरकारों को नींद से जगाना भी है। अक्सर गर्मी से होने वाली मौतों को ‘प्राकृतिक’ मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन अब इसे ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ घोषित करने की मांग बढ़ रही है। ‘क्लाइमेट-हेल्थ डेस्क’ के जरिए प्रशासन को यह बताया जाएगा कि किन इलाकों में हीट स्ट्रोक के मरीज बढ़ सकते हैं, ताकि समय रहते ओआरएस (ORS) और आइस-पैक्स की व्यवस्था की जा सके।

📢 आम जनता के लिए संदेश: ‘सावधानी ही बचाव’

WHO ने चेतावनी दी है कि आने वाले दशक में ‘लू’ का प्रकोप और लंबा और घातक होगा।

  1. दोपहर 12 से 3 बजे के बीच घर से निकलने से बचें।

  2. शरीर में पानी की कमी न होने दें।

  3. बुजुर्गों और बच्चों की विशेष निगरानी करें।


निष्कर्ष: दक्षिण एशिया की धरती तप रही है, और यह नई पहल हमारी आखिरी उम्मीद हो सकती है। क्या हम प्रकृति के इस बढ़ते प्रकोप का सामना करने के लिए तैयार हैं?

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️