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🌍 विश्व टीबी रिपोर्ट 2025: भारत में सर्वाधिक मामले, वैश्विक स्वास्थ्य संकट बरकरार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में वैश्विक तपेदिक (TB) रिपोर्ट 2025 जारी की है, जिसने एक बार फिर दुनिया भर में टीबी के गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे को उजागर किया है। यह रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर टीबी की रोकथाम, निदान और उपचार में हुई प्रगति और चुनौतियों का विस्तृत लेखा-जोखा प्रस्तुत करती है।


🇮🇳 भारत पर विशेष चिंता: टीबी मामलों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी

 

रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक निष्कर्ष यह है कि टीबी का बोझ अभी भी कुछ ही देशों पर केंद्रित है। वैश्विक स्तर पर, टीबी के 87% रोगी केवल 30 देशों में दर्ज किए गए थे, जिन्हें ‘उच्च टीबी बोझ वाले देश’ कहा जाता है।

इन 30 देशों में, भारत में टीबी रोगियों की संख्या सबसे अधिक पाई गई है, जो विश्व के कुल टीबी मामलों का लगभग 25% है।

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यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि टीबी उन्मूलन के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।

टीबी रोग, जिसे माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस (Mycobacterium tuberculosis) नामक जीवाणु के कारण होता है, लंबे समय से भारत में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती रहा है। अधिक जनसंख्या घनत्व, खराब पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच जैसे कारक इस उच्च दर में योगदान करते हैं।


💀 टीबी अभी भी मृत्यु का शीर्ष कारण

 

यह रिपोर्ट पुष्टि करती है कि टीबी आज भी दुनिया भर में मृत्यु के शीर्ष 10 कारणों में से एक बना हुआ है। टीबी, विशेष रूप से गरीब और कमजोर समुदायों को असमान रूप से प्रभावित करता है, जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी होती है।

WHO ने इस बात पर जोर दिया है कि टीबी एक उपचार योग्य और रोकी जा सकने वाली बीमारी होने के बावजूद, हर साल लाखों लोग इससे अपनी जान गंवा देते हैं।


🦠 MDR-TB: एक लोक स्वास्थ्य संकट

 

रिपोर्ट में बहु-दवा प्रतिरोधी टीबी (Multi-Drug Resistant TB – MDR-TB) के बढ़ते खतरे को एक लोक स्वास्थ्य संकट और स्वास्थ्य सुरक्षा संबंधी खतरा बताया गया है।

  • MDR-TB तब होता है जब टीबी के जीवाणु प्रथम पंक्ति की कम से कम दो सबसे प्रभावी टीबी दवाओं, आइसोनियाज़िड (Isoniazid) और रिफाम्पिसिन (Rifampicin), के प्रति प्रतिरोधी हो जाते हैं।

  • इसका इलाज अधिक जटिल, लंबा और महंगा होता है, और सफलता दर भी कम होती है।

MDR-TB के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे यह चिंता बढ़ गई है कि अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो यह संक्रमण भविष्य में बेकाबू हो सकता है।

🎯 आगे की चुनौतियाँ

 

WHO ने टीबी को समाप्त करने के लिए तीव्र निदान, सार्वभौमिक दवा कवरेज, और रोगाणुरोधी प्रतिरोध पर प्रभावी नियंत्रण की आवश्यकता पर बल दिया है। भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को अपने लक्ष्य (2025 तक टीबी मुक्त भारत) को प्राप्त करने के लिए इन क्षेत्रों में अपने प्रयासों को और अधिक तेज करना होगा।

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