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⚠️ सबरीमाला यात्रा पर ‘ब्रेन-ईटिंग’ अमीबा का साया: श्रद्धालुओं के लिए विशेष स्वास्थ्य चेतावनी जारी

केरल में वार्षिक सबरीमाला तीर्थयात्रा के चरम पर पहुंचने से ठीक पहले, स्वास्थ्य विभाग ने एक अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा संक्रमण के खतरे को लेकर विशेष स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी नीगलेरिया फाउलेरी (Naegleria fowleri) नामक घातक अमीबा के मामलों की पुष्टि के बाद जारी की गई है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘ब्रेन-ईटिंग अमीबा’ कहा जाता है। यह अमीबा प्राइमरी अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (Primary Amoebic Meningoencephalitis – PAM) नामक एक गंभीर मस्तिष्क संक्रमण का कारण बनता है, जिसकी मृत्यु दर (mortality rate) लगभग 97% है।

खतरे का कारण और फैलाव

 

नीगलेरिया फाउलेरी मुख्य रूप से गर्म, ठहरे हुए पानी (stagnant water) जैसे झीलों, तालाबों, नदियों और गर्म झरनों में पाया जाता है। यह अमीबा किसी भी व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है यदि प्रदूषित पानी नाक के रास्ते से शरीर में प्रवेश करता है। एक बार नाक के रास्ते अंदर जाने के बाद, यह अमीबा नाक के तंत्रिका तंतुओं (nerve fibers) से होते हुए सीधा मस्तिष्क तक पहुंच जाता है, जहां यह तेजी से ऊतकों (tissues) को नष्ट करना शुरू कर देता है।

सबरीमाला तीर्थयात्रा के दौरान, लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान और अन्य अनुष्ठानों के लिए नदियों और जल स्रोतों का उपयोग करते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

तीर्थयात्रियों के लिए जारी किए गए दिशानिर्देश

 

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं:

  1. ठहरे हुए पानी से बचें: तीर्थयात्रियों को विशेष रूप से चेतावनी दी गई है कि वे किसी भी ऐसे जल स्रोत में स्नान या डुबकी लगाने से बचें जिसका पानी बंद या स्थिर हो।

  2. नोज़ क्लिप का उपयोग: सबसे महत्वपूर्ण सलाह यह दी गई है कि श्रद्धालु स्नान करते समय नोज़ क्लिप (nose clips) या हाथों से अपनी नाक को कसकर बंद रखें। ऐसा करना इसलिए आवश्यक है ताकि पानी किसी भी हाल में नाक के आंतरिक मार्ग तक न पहुंच पाए।

  3. साफ़ पानी का उपयोग: पीने और चेहरे को धोने के लिए केवल उबले हुए या क्लोरीनयुक्त (chlorinated) साफ पानी का ही उपयोग करने की सलाह दी गई है।

  4. लक्षणों पर ध्यान: यदि किसी तीर्थयात्री को तेज सिरदर्द, बुखार, उल्टी या गर्दन में अकड़न जैसे लक्षण महसूस हों, तो उन्हें बिना किसी देरी के नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क करने को कहा गया है, क्योंकि इस संक्रमण में शुरुआती निदान (early diagnosis) ही जीवन रक्षा की एकमात्र कुंजी हो सकता है।

केरल स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी बेस कैंपों और महत्वपूर्ण स्नान घाटों पर स्वास्थ्य कर्मियों को तैनात कर दिया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। यह चेतावनी लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के लिए एक समय पर उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

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