
नई दिल्ली। 21 नवंबर 2025।
केंद्र सरकार ने भारतीय श्रम कानूनों में व्यापक सुधार करते हुए आज, 21 नवंबर 2025 से चार प्रमुख श्रम संहिताओं (Labour Codes) को पूरे देश में लागू कर दिया है। ये नए कानून, जो मौजूदा 44 पुराने और जटिल श्रम कानूनों की जगह लेंगे, श्रमिकों के कल्याण, सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। इन कोड्स में सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी प्रावधानों में से एक नियोक्ताओं द्वारा सभी कामगारों के लिए मुफ्त सालाना हेल्थ चेक-अप (Free Annual Health Check-up) को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाना है।
🩺 मुफ्त स्वास्थ्य जांच का कानूनी अधिकार
नए श्रम कोड्स में, विशेष रूप से व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code) में यह प्रावधान किया गया है कि नियोक्ताओं को अपने कर्मचारियों को नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा देनी होगी।
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अनिवार्यता: अब यह हर नियोक्ता की कानूनी जिम्मेदारी होगी कि वह अपने सभी कर्मचारियों के लिए साल में कम से कम एक बार निःशुल्क स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करे।
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उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य कामगारों में व्यावसायिक बीमारियों (Occupational Diseases) की जल्द पहचान करना, स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना और स्वस्थ कार्यबल बनाए रखना है।
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लाभ: यह प्रावधान लाखों भारतीय श्रमिकों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्हें अक्सर अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है।
⏳ काम के घंटों पर स्पष्टता
नए कोड्स ने काम के घंटों की सीमा को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता को भी खत्म कर दिया है। अब नियमों में स्पष्ट रूप से कहा गया है:
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दैनिक सीमा: एक कामगार के लिए अधिकतम काम के घंटे प्रतिदिन 8 से 12 घंटे तक हो सकते हैं, बशर्ते सप्ताह में कुल काम के घंटे की सीमा का उल्लंघन न हो।
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साप्ताहिक सीमा: प्रति सप्ताह अधिकतम 48 घंटे काम करने की सीमा तय की गई है। इसके अलावा, ओवरटाइम (Overtime) के लिए स्पष्ट नियम और डेढ़ गुना दर से भुगतान का प्रावधान भी किया गया है।
🤝 गिग और अनौपचारिक क्षेत्र के लिए बड़ी राहत
ये नए श्रम कोड्स गिग वर्कर्स (Gig Workers) और अनौपचारिक क्षेत्र (Informal Sector) के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाते हैं। अब तक ये श्रमिक किसी भी प्रकार की सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित थे।
नए कोड्स में इन श्रमिकों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा कोष बनाने का प्रस्ताव है, जिससे उन्हें पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और अन्य लाभ मिल सकेंगे। यह कदम देश की लगभग 90% श्रम शक्ति को औपचारिक सुरक्षा नेटवर्क के अंतर्गत लाने में मदद करेगा।
कुल मिलाकर, ये चार श्रम कोड्स—मजदूरी पर संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता, और औद्योगिक संबंध संहिता—भारतीय श्रम बाजार को आधुनिक, लचीला और श्रमिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।