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हृदय स्वास्थ्य और सर्दियों का खतरा: कड़ाके की ठंड में ‘हार्ट अटैक’ से बचाव की जंग

जनवरी 2026 की शुरुआत भीषण शीतलहर के साथ हुई है, जिसने न केवल सामान्य जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि स्वास्थ्य जगत के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। वैश्विक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठनों ने हाल ही में एक चेतावनी जारी की है, जिसमें बताया गया है कि सर्दियों के महीनों में हार्ट अटैक (दिल का दौरा) और स्ट्रोक (मस्तिष्क आघात) के मामलों में 30% से 50% तक की वृद्धि देखी जा रही है।

इस मौसम में हृदय स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताएं केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे ठोस जैविक कारण भी हैं।


ठंड दिल पर हमला क्यों करती है? (वैज्ञानिक कारण)

विशेषज्ञों के अनुसार, कड़ाके की ठंड शरीर के संचार तंत्र (Circulatory System) पर भारी दबाव डालती है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना (Vasoconstriction): जब शरीर को अत्यधिक ठंड का एहसास होता है, तो रक्त वाहिकाएं स्वतः सिकुड़ जाती हैं ताकि शरीर की गर्मी बाहर न निकले। इसे ‘वासोकंस्ट्रिक्शन’ कहते हैं। इससे रक्त के प्रवाह के लिए रास्ता कम हो जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर (BP) अचानक बढ़ जाता है।

  2. रक्त का गाढ़ापन: शोध बताते हैं कि सर्दियों में खून के थक्के (Blood Clots) बनने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। गाढ़ा खून और सिकुड़ी हुई धमनियां मिलकर हार्ट अटैक का कारण बनती हैं।

  3. हृदय गति में वृद्धि: शरीर का तापमान सामान्य (98.6°F) बनाए रखने के लिए दिल को सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हृदय गति (Heart Rate) बढ़ जाती है।


भारी शारीरिक श्रम: एक ‘साइलेंट किलर’

2026 की स्वास्थ्य एडवाइजरी में एक विशेष चेतावनी उन लोगों के लिए है जो सर्दियों में अचानक भारी मेहनत करते हैं।

  • बर्फ हटाना या वजन उठाना: पहाड़ी या अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में सुबह-सुबह बर्फ हटाना (Snow Shoveling) दिल के लिए घातक साबित हो सकता है। अत्यधिक ठंड और भारी शारीरिक श्रम का मेल दिल की धड़कन को अचानक खतरनाक स्तर तक ले जा सकता है।

  • अचानक एक्सरसाइज: जिम जाने वाले लोग जो बिना ‘वार्म-अप’ किए कड़ाके की ठंड में दौड़ना शुरू कर देते हैं, उन्हें कार्डियक अरेस्ट का खतरा अधिक होता है।


किसे है सबसे ज्यादा खतरा?

यद्यपि ठंड हर किसी को प्रभावित करती है, लेकिन कुछ समूह विशेष रूप से जोखिम में हैं:

  • बुजुर्ग (60 वर्ष से अधिक): उम्र के साथ शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कम हो जाती है।

  • पहले से बीमार: जिन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह (Diabetes) या पहले कभी दिल की बीमारी रही हो।

  • धूम्रपान करने वाले: धूम्रपान पहले से ही धमनियों को संकुचित करता है, ठंड इसे और बदतर बना देती है।


2026 की बचाव गाइडलाइन: क्या करें और क्या न करें?

क्या करें? क्या न करें?
परतदार कपड़े पहनें: एक भारी कपड़े के बजाय 3-4 पतली परतें पहनें ताकि शरीर की गर्मी अंदर बनी रहे। अत्यधिक शराब से बचें: शराब शरीर को गर्म महसूस कराती है लेकिन वास्तव में यह आंतरिक तापमान कम करती है।
धूप का सेवन: विटामिन D की कमी हृदय रोगों को बढ़ा सकती है। सुबह की सैर में जल्दबाजी न करें: सूरज निकलने के बाद ही बाहर निकलें।
हल्का व्यायाम: घर के अंदर योग या हल्की स्ट्रेचिंग करें। लक्षणों को नजरअंदाज न करें: सीने में भारीपन या पसीने को ‘गैस’ की समस्या न समझें।

निष्कर्ष

जनवरी की ठंड केवल कपड़ों से बचने का मौसम नहीं है, बल्कि अपने भीतर के ‘इंजन’ यानी दिल का ख्याल रखने का समय भी है। विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है: “सुनो अपने दिल की”। यदि आप सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या गर्दन-हाथ में खिंचाव महसूस करते हैं, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।

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