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स्वास्थ्य असमानता: क्या वजन घटाना अब एक ‘लक्जरी’ बन गया है?

1. किंग कॉलेज लंदन की रिपोर्ट का खुलासा

किंग कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ब्रिटेन की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा (NHS) ने इन दवाओं के वितरण के लिए जो पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) बनाए हैं, वे अत्यंत सख्त हैं।

  • नियमों की सख्ती: NHS केवल उन्हीं मरीजों को ये दवाएं उपलब्ध करा रहा है जिनका BMI (बॉडी मास इंडेक्स) बहुत अधिक है और जिन्हें पहले से ही गंभीर बीमारियां (जैसे टाइप-2 डायबिटीज) हैं।

  • मरीजों की अनदेखी: लाखों ऐसे मरीज जो ‘हाई रिस्क’ श्रेणी में हैं, वे इन कड़े नियमों के कारण सरकारी सुविधा से वंचित रह जाते हैं।

2. ‘हेल्थ-इक्विटी’ बनाम ‘आर्थिक स्थिति’

विशेषज्ञों का कहना है कि जो लोग सक्षम हैं, वे निजी क्लीनिकों (Private Clinics) और ऑनलाइन फार्मेसी से इन दवाओं को ऊंचे दामों पर खरीद रहे हैं। इसे विशेषज्ञों ने “Postcode Lottery of Health” या “आर्थिक स्थिति पर आधारित उपचार” करार दिया है।

  • निजी बाजार का उदय: निजी क्षेत्र में इन दवाओं की मांग इतनी अधिक है कि आपूर्ति कम पड़ रही है।

  • गरीब तबके पर मार: मोटापे की दर अक्सर निम्न आय वाले समुदायों में अधिक देखी जाती है, लेकिन विडंबना यह है कि वही वर्ग इन दवाओं के खर्च को उठाने में असमर्थ है।

3. Mounjaro (Tirzepatide) कैसे काम करती है?

यह समझना जरूरी है कि यह दवा इतनी मांग में क्यों है। Tirzepatide एक ‘ड्यूल एगोनिस्ट’ (Dual Agonist) है जो शरीर में दो प्रमुख हार्मोन—GLP-1 और GIP—की नकल करता है।

  • यह मस्तिष्क को भूख कम होने का संकेत देता है।

  • यह पेट को खाली होने की प्रक्रिया को धीमा कर देता है, जिससे व्यक्ति को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है।

  • क्लिनिकल ट्रायल में देखा गया है कि इससे शरीर का वजन 20% से 25% तक कम हो सकता है।

4. विशेषज्ञों की चेतावनी और भविष्य का संकट

किंग कॉलेज के प्रोफेसरों का मानना है कि यदि इस असमानता को समय रहते ठीक नहीं किया गया, तो भविष्य में समाज दो हिस्सों में बंट जाएगा: एक वह जो दवाओं के दम पर फिट और स्वस्थ है, और दूसरा वह जो मोटापे और उससे जुड़ी बीमारियों (हृदय रोग, कैंसर) से जूझ रहा है।


मोटापे की दवाओं का तुलनात्मक विवरण

विशेषता Mounjaro (Tirzepatide) Wegovy (Semaglutide)
क्रिया विधि GLP-1 और GIP दोनों पर काम करती है केवल GLP-1 पर काम करती है
वजन घटाने की क्षमता अधिक प्रभावी (22.5% तक) प्रभावी (15% तक)
उपलब्धता निजी क्षेत्र में अधिक, NHS में सीमित व्यापक रूप से चर्चा में
चुनौती उच्च लागत और कड़े नियम स्टॉक की कमी

5. समाधान की दिशा में सुझाव

विशेषज्ञों ने सरकार और दवा कंपनियों से मांग की है कि:

  1. कीमतों में कमी: सामूहिक खरीद (Bulk Buying) के जरिए दवाओं की कीमतें कम की जाएं।

  2. पात्रता में ढील: केवल ‘बीमार’ होने का इंतजार करने के बजाय, मोटापे को एक स्वतंत्र बीमारी मानकर शुरुआती चरणों में ही दवा उपलब्ध कराई जाए।

  3. जीवनशैली के साथ समन्वय: दवा को केवल ‘शॉर्टकट’ न मानकर इसे संतुलित आहार और व्यायाम के साथ जोड़कर एक पूर्ण चिकित्सा कार्यक्रम बनाया जाए।

निष्कर्ष: मोटापे की ये दवाएं चिकित्सा जगत का ‘मिरेकल ड्रग’ मानी जा रही हैं, लेकिन यदि इनकी पहुंच केवल अमीरों तक रही, तो यह मानवता के लिए एक बड़ा नैतिक संकट बन जाएगा। स्वास्थ्य का अधिकार व्यक्ति की जेब पर नहीं, बल्कि उसकी जरूरत पर आधारित होना चाहिए।

©️ श्री गंगानगर न्यूज़ ©️