
जनवरी 2026 में जारी संयुक्त राष्ट्र (UN) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नवीनतम रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। आंकड़ों के अनुसार, आज भी दुनिया भर में हर दो मिनट में एक महिला की मृत्यु सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) के कारण हो रही है। यह आंकड़ा इसलिए अधिक चिंताजनक है क्योंकि सर्वाइकल कैंसर उन चुनिंदा कैंसरों में से एक है जिसे समय पर टीकाकरण और जांच के जरिए पूरी तरह रोका जा सकता है।
साल 2026 को वैश्विक स्तर पर ‘निवारक स्वास्थ्य वर्ष’ (Year of Preventive Health) के रूप में मनाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को इस घातक बीमारी के प्रति जागरूक करना और उन्हें टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित करना है।
सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण: HPV वायरस
सर्वाइकल कैंसर का 90% से अधिक कारण ह्यूमन पेपिलोमावायरस (HPV) होता है। यह एक सामान्य वायरस है जो संक्रमण के माध्यम से फैलता है। अधिकांश मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इसे खत्म कर देती है, लेकिन कुछ महिलाओं में यह संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेता है।
बचाव के दो प्रमुख हथियार: टीकाकरण और स्क्रीनिंग
विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में हमारे पास इस बीमारी को खत्म करने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, बस जरूरत है तो जागरूकता की।
-
HPV टीकाकरण (Vaccination):
-
9 से 14 वर्ष की किशोरियों के लिए यह टीका सबसे प्रभावी है।
-
भारत ने 2026 तक अपने राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत करोड़ों लड़कियों को कवर करने का लक्ष्य रखा है। यह टीका शरीर को वायरस के खिलाफ पहले ही तैयार कर देता है, जिससे कैंसर होने की संभावना न के बराबर रह जाती है।
-
-
नियमित स्क्रीनिंग (Pap Smear & HPV Test):
-
30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को हर 3 से 5 साल में स्क्रीनिंग करानी चाहिए।
-
पैप स्मीयर (Pap Smear) टेस्ट के जरिए शरीर में कैंसर से पहले के लक्षणों (Pre-cancerous cells) का पता लगाया जा सकता है। यदि इस चरण में पहचान हो जाए, तो इलाज 100% सफल होता है।
-
2026 में नई तकनीकें और सुविधाएं
इस साल चिकित्सा जगत में कई नई प्रगति हुई हैं जो इस लड़ाई को आसान बना रही हैं:
-
सेल्फ-सैंपलिंग किट: अब महिलाओं को क्लिनिक जाने की झिझक नहीं होगी। नई किट्स के जरिए महिलाएं घर पर ही सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज सकती हैं।
-
सस्ती स्वदेशी वैक्सीन: भारत में बनी ‘सर्वावैक’ (Cervavac) जैसी वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ने से अब यह आम नागरिक की पहुंच में है।
सामाजिक चुनौती और समाधान
जागरूकता की कमी और सामाजिक संकोच आज भी सबसे बड़ी बाधा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाएं लक्षणों (जैसे असामान्य रक्तस्राव या दर्द) को छिपाती हैं। संयुक्त राष्ट्र की अपील है कि परिवारों को अपनी घर की महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए। 2026 का लक्ष्य स्पष्ट है: “90-70-90”। यानी 90% लड़कियों का टीकाकरण, 70% महिलाओं की स्क्रीनिंग और 90% बीमार महिलाओं का उचित उपचार।
निष्कर्ष
सर्वाइकल कैंसर से होने वाली हर मौत एक त्रासदी है क्योंकि इसे रोका जा सकता था। 2026 की यह वैश्विक अपील केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक बुलावा है कि हम अपनी मां, बहन और बेटियों को इस सुरक्षा कवच (टीकाकरण) से जोड़ें। याद रखें, ‘जागरूकता ही बचाव है’।