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सर्वाइकल कैंसर के विरुद्ध भारत का महाअभियान: बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए ‘HPV’ टीकाकरण की शुरुआत

28 फरवरी 2026 का दिन भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य इतिहास में एक मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजस्थान के पवित्र शहर अजमेर से राष्ट्रव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। यह अभियान विशेष रूप से देश की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) जैसे जानलेवा रोग से सुरक्षा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।


अभियान का मुख्य उद्देश्य और लक्षित समूह

सर्वाइकल कैंसर भारत में महिलाओं में होने वाला दूसरा सबसे आम कैंसर है। प्रतिवर्ष हजारों महिलाएं इस बीमारी के कारण दम तोड़ देती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सही उम्र में HPV का टीका लग जाए, तो इस कैंसर को लगभग 90% तक रोका जा सकता है

  • लक्षित आयु वर्ग: सरकार ने इस अभियान के पहले चरण में 14 वर्ष की लड़कियों को प्राथमिकता दी है। स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से इन लड़कियों की पहचान की जाएगी।

  • निशुल्क सुविधा: निजी अस्पतालों में जिस ‘गार्डासिल-4’ (Gardasil-4) टीके की एक खुराक की कीमत लगभग 4,000 रुपये तक होती है, उसे अब सरकार पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध करा रही है। यह देश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है।


स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का विस्तार: आयुष्मान आरोग्य मंदिर

इस टीकाकरण अभियान को जमीनी स्तर तक पहुँचाने के लिए सरकार ने अपने विशाल नेटवर्क का उपयोग करने का निर्णय लिया है। अब यह टीका न केवल बड़े जिला अस्पतालों में, बल्कि गांव-गांव में स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (पूर्व में स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र) में भी उपलब्ध होगा।

प्रधानमंत्री ने संबोधन में कहा:

“स्वस्थ नारी, विकसित भारत की आधारशिला है। यह टीकाकरण अभियान केवल एक स्वास्थ्य योजना नहीं, बल्कि हमारी बेटियों के जीवन को सुरक्षा देने का एक संकल्प है। हम नहीं चाहते कि कोई भी बेटी उस बीमारी से जूझे जिसे एक छोटे से टीके से रोका जा सकता था।”


गार्डासिल-4 और स्वदेशी टीकों की भूमिका

वर्तमान में अभियान के तहत ‘गार्डासिल-4’ का उपयोग किया जा रहा है, जो चार प्रकार के HPV वायरस से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके साथ ही, भारत की अपनी स्वदेशी वैक्सीन ‘सर्वावैक’ (CERVAVAC) के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि भविष्य में आपूर्ति की कोई कमी न हो। यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।


सामाजिक जागरूकता और चुनौतियां

टीकाकरण की सफलता केवल उपलब्धता पर नहीं, बल्कि जागरूकता पर निर्भर करती है। सरकार ने इस अभियान के साथ एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम भी शुरू किया है ताकि टीकाकरण से जुड़ी भ्रांतियों को दूर किया जा सके।

  • स्कूलों की भूमिका: शिक्षा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय मिलकर स्कूलों में सेमिनार आयोजित करेंगे ताकि माता-पिता को इस टीके के महत्व के बारे में समझाया जा सके।

  • डिजिटल ट्रैकिंग: प्रत्येक लाभार्थी का डेटा U-WIN पोर्टल (कोविन की तर्ज पर) पर दर्ज किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी लड़की अपनी दूसरी खुराक से न चूके।

निष्कर्ष

भारत का यह राष्ट्रव्यापी HPV टीकाकरण अभियान स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा। अजमेर से शुरू हुई यह लहर आने वाले समय में देश के कोने-कोने तक पहुँचेगी और सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत के सपने को साकार करेगी। यह निवेश आज की बेटियों के स्वास्थ्य में है, जो कल के भारत का निर्माण करेंगी।

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