
नई दिल्ली/उत्तर भारत: जैसे-जैसे उत्तर भारत में पारा गिर रहा है और शीतलहर (Cold Wave) का प्रकोप बढ़ रहा है, अस्पतालों के इमरजेंसी वार्डों से चिंताजनक खबरें आ रही हैं। प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्ट्स (हृदय रोग विशेषज्ञ) ने चेतावनी दी है कि पिछले एक महीने में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामलों में 20% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। श्रीगंगानगर, दिल्ली और पंजाब जैसे अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में यह स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है।
1. ठंड और दिल का रिश्ता: क्यों बढ़ता है खतरा?
अत्यधिक ठंड हमारे शरीर के संचार तंत्र (Circulatory System) पर दोहरा दबाव डालती है। इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक कारण निम्नलिखित हैं:
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रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना (Vasoconstriction): जब शरीर ठंडी हवा के संपर्क में आता है, तो गर्मी को अंदर बनाए रखने के लिए हमारी नसें और धमनियां सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्त के प्रवाह के लिए रास्ता संकरा हो जाता है।
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ब्लड प्रेशर में वृद्धि: वाहिकाओं के सिकुड़ने के कारण हृदय को रक्त पंप करने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे अचानक रक्तचाप (BP) बढ़ जाता है।
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रक्त का गाढ़ा होना: सर्दियों में रक्त में फाइब्रिनोजेन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे रक्त गाढ़ा हो जाता है और थक्के (Clots) बनने की संभावना बढ़ जाती है। यही थक्के हार्ट अटैक का मुख्य कारण बनते हैं।
2. सुबह की सैर (Morning Walk) बन सकती है घातक
हृदय रोगियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी सुबह की सैर को लेकर है।
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शून्य तापमान का प्रभाव: भोर (सुबह 4 से 7 बजे) के समय तापमान न्यूनतम होता है। इस समय ठंडी हवा के संपर्क में आने से शरीर में अचानक ‘स्ट्रेस हार्मोन’ रिलीज होते हैं, जो सीधे दिल के दौरे का कारण बन सकते हैं।
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वायु प्रदूषण और स्मॉग: सर्दियों में कोहरे के साथ प्रदूषण के कण मिलकर ‘स्मॉग’ बनाते हैं, जो फेफड़ों के साथ-साथ हृदय पर भी अतिरिक्त दबाव डालता है।
3. डॉक्टरों की विशेष सलाह और सावधानियां
देश के शीर्ष अस्पतालों के हृदय रोग विशेषज्ञों ने इस मौसम के लिए एक विशेष ‘विंटर गाइडलाइन’ जारी की है:
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समय का चुनाव: मॉर्निंग वॉक के बजाय धूप निकलने के बाद (सुबह 10 बजे के बाद) ही बाहर निकलें। यदि संभव हो, तो घर के अंदर ही हल्का व्यायाम या योग करें।
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परतदार कपड़े (Layering): एक भारी कोट के बजाय तीन पतले गर्म कपड़े पहनें। यह शरीर की गर्मी को बेहतर तरीके से रोकता है। सिर, कान और पैरों को विशेष रूप से ढक कर रखें।
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खान-पान में बदलाव: केवल गुनगुने पानी का सेवन करें। ठंडा पानी पीने से वेगस नर्व प्रभावित हो सकती है, जो दिल की धड़कन को अस्थिर कर सकती है। भारी और वसायुक्त भोजन से बचें क्योंकि इसे पचाने के लिए दिल को अधिक काम करना पड़ता है।
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शराब और धूम्रपान से दूरी: कई लोग मानते हैं कि शराब शरीर को गर्म रखती है, जबकि यह रक्त वाहिकाओं को फैलाकर शरीर की आंतरिक गर्मी को जल्दी बाहर निकाल देती है, जो खतरनाक हो सकता है।
4. चेतावनी के संकेतों को न करें नजरअंदाज
अक्सर लोग सीने में दर्द को गैस या अपच समझकर टाल देते हैं। यदि आपको सीने में भारीपन, बाएं हाथ में दर्द, अत्यधिक पसीना आना या जबड़े में खिंचाव महसूस हो, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।
[Table: सर्दियों में हृदय स्वास्थ्य के लिए क्या करें और क्या न करें]
| क्या करें | क्या न करें |
| गुनगुना पानी पिएं | ठंडे पानी से स्नान या सेवन न करें |
| नियमित ब्लड प्रेशर चेक करें | सुबह जल्दी खाली पेट बाहर न निकलें |
| धूप में समय बिताएं | अत्यधिक नमक और तली हुई चीजें न खाएं |
| दवाएं समय पर लें | भारी शारीरिक श्रम (जैसे वजन उठाना) से बचें |
निष्कर्ष:
सर्दियों का मौसम जितना सुहावना होता है, हृदय के लिए उतना ही चुनौतीपूर्ण। थोड़ी सी सावधानी और जीवनशैली में छोटे बदलाव इस जानलेवा खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। याद रखें, आपकी सतर्कता ही आपके दिल की सुरक्षा है।