
जेनेवा/नैरोबी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट ‘एपीडेमियोलॉजिकल अपडेट #34’ ने वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की रातों की नींद उड़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 के दौरान दुनिया भर में हैजा (Cholera) के कुल मामलों की संख्या में तो आंशिक कमी देखी गई है, लेकिन इससे होने वाली मृत्यु दर (CFR) में 20% की खतरनाक वृद्धि दर्ज की गई है। इसका सीधा अर्थ है कि बीमारी भले ही कम लोगों को हो रही हो, लेकिन जिसे हो रही है, उसके लिए यह पहले से कहीं अधिक घातक साबित हो रही है।
अफ्रीकी देश: संकट का केंद्र
रिपोर्ट के मुताबिक, इस जानलेवा वृद्धि का सबसे अधिक असर अफ्रीकी महाद्वीप पर पड़ा है। इथियोपिया, जिम्बाब्वे और ज़ाम्बिया जैसे देश इस समय हैजा के भीषण प्रकोप से जूझ रहे हैं। इन क्षेत्रों में मृत्यु दर बढ़ने का सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य प्रणालियों का चरमराना और सुरक्षित पेयजल की भारी कमी है। अफ्रीकी देशों में ग्रामीण आबादी को समय पर ‘ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट’ (ORS) और बुनियादी इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिससे मामूली संक्रमण भी मौत का कारण बन रहा है।
हैजा का विज्ञान: शरीर पर प्रहार
हैजा मुख्य रूप से विब्रियो कोलेरी (Vibrio cholerae) नामक बैक्टीरिया से दूषित पानी या भोजन के सेवन से होता है। यह बैक्टीरिया छोटी आंत में जहर छोड़ता है, जिससे शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का भारी नुकसान होता है।
मृत्यु दर बढ़ने के मुख्य कारण
विशेषज्ञों ने इस रिपोर्ट में मृत्यु दर में 20% की बढ़ोतरी के पीछे तीन प्रमुख कारणों को रेखांकित किया है:
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जलवायु परिवर्तन और बाढ़: जलवायु परिवर्तन के कारण बेमौसम बारिश और भीषण बाढ़ ने जल निकासी तंत्र को तहस-नहस कर दिया है। बाढ़ का पानी पीने के साफ स्रोतों में मिल रहा है, जिससे संक्रमण तेजी से फैल रहा है और बचाव के रास्ते बंद हो रहे हैं।
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ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव: शहरी क्षेत्रों में तो इलाज संभव है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में बाढ़ के कारण सड़कें टूट गई हैं। मरीज को अस्पताल पहुँचाने में होने वाली देरी ही मौत का सबसे बड़ा कारण बन रही है।
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वैक्सीन की भारी कमी: हैजा की वैक्सीन (OCV) की वैश्विक मांग आपूर्ति से कहीं अधिक है। टीकों की कमी के कारण बचाव अभियान (Vaccination Drives) ठप पड़े हैं।
WHO की चेतावनी और विशेषज्ञ राय
WHO के विशेषज्ञों का कहना है कि यह “गरीबी और असमानता की बीमारी” है। यदि किसी व्यक्ति को समय पर केवल साफ पानी और नमक-चीनी का घोल (ORS) मिल जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। लेकिन 20% मृत्यु दर का बढ़ना यह दर्शाता है कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अभी भी इन बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।
बचाव और समाधान की राह
इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए WHO ने निम्नलिखित कदम उठाने का आह्वान किया है:
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WASH पहल: जल (Water), स्वच्छता (Sanitation) और स्वच्छता (Hygiene) सेवाओं में निवेश बढ़ाना।
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त्वरित प्रतिक्रिया टीमें: प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल हेल्थ क्लीनिक तैनात करना।
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वैश्विक सहयोग: संपन्न देशों से टीकों के उत्पादन और वितरण में आर्थिक मदद की अपील।
निष्कर्ष
21 फरवरी 2026 की यह रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि जब तक दुनिया का हर कोना सुरक्षित नहीं है, तब तक कोई भी सुरक्षित नहीं है। हैजा को हराने के लिए केवल दवा की नहीं, बल्कि शुद्ध पानी और राजनीतिक इच्छाशक्ति की भी उतनी ही जरूरत है।