
जिनेवा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आज आधिकारिक तौर पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से $1 बिलियन (लगभग 8300 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता की मांग की है। यह कोष दुनिया भर में चल रहे 36 सक्रिय स्वास्थ्य आपातकालों के प्रबंधन के लिए आवश्यक है। WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्येयियस ने सदस्य देशों और दानदाताओं को संबोधित करते हुए एक कड़ा संदेश दिया कि “यह धन केवल चैरिटी या दान नहीं है, बल्कि यह भविष्य की वैश्विक सुरक्षा के लिए एक रणनीतिक निवेश है।”
संकटग्रस्त क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
इस फंड का एक बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों में भेजा जाएगा जहां युद्ध, गृहयुद्ध या राजनीतिक अस्थिरता ने स्वास्थ्य ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है:
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गाजा और यूक्रेन: इन युद्धग्रस्त क्षेत्रों में अस्पताल और एम्बुलेंस सेवाएं निरंतर हमलों के कारण संकट में हैं। फंड का उपयोग सर्जिकल किट, आपातकालीन दवाएं और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करने के लिए किया जाएगा।
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अफगानिस्तान और सूडान: यहाँ कुपोषण और संक्रामक रोगों का स्तर चरम पर है। विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं के लिए बुनियादी टीकाकरण और प्रसव सेवाओं को बहाल करना प्राथमिकता है।
महामारी और बीमारी के प्रकोप को रोकना
WHO ने चेतावनी दी है कि यदि इस समय पर्याप्त धन नहीं मिला, तो स्थानीय प्रकोप वैश्विक महामारी का रूप ले सकते हैं:
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हैजा (Cholera): दुनिया के कई हिस्सों में बाढ़ और खराब स्वच्छता के कारण हैजा के मामले बढ़ रहे हैं। यह फंड सुरक्षित पेयजल और ओरल हैजा वैक्सीन (OCV) की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
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एमपॉक्स (Mpox): अफ्रीका के कुछ हिस्सों में एमपॉक्स के नए वेरिएंट ने चिंता बढ़ाई है। इसकी निगरानी, परीक्षण और टीकाकरण के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है।
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जलवायु जनित आपदाएँ: ग्लोबल वार्मिंग के कारण डेंगू और मलेरिया जैसे रोगों का प्रसार नए क्षेत्रों में हो रहा है, जिसे रोकने के लिए उन्नत निगरानी तंत्र की जरूरत है।
डॉ. टेड्रोस का ‘रणनीतिक निवेश’ तर्क
महानिदेशक डॉ. टेड्रोस ने तर्क दिया कि अगर हम आज संकट के केंद्र में निवेश नहीं करते हैं, तो बाद में दुनिया को इसके आर्थिक और मानवीय परिणाम दस गुना ज्यादा भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि एक मजबूत वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली ही वह ढाल है जो सीमाओं के पार वायरस के प्रसार को रोक सकती है।
भविष्य की चुनौतियाँ
WHO की यह अपील ऐसे समय में आई है जब कई विकसित देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं में कटौती कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्वास्थ्य बजट में कटौती करना आत्मघाती कदम साबित हो सकता है। यह $1 बिलियन का निवेश न केवल दवाइयों के लिए है, बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण और दूरदराज के इलाकों में प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए भी है।
निष्कर्ष: WHO की यह अपील दुनिया को यह याद दिलाने के लिए है कि स्वास्थ्य एक मौलिक अधिकार है और इसकी रक्षा करना किसी एक देश की नहीं, बल्कि पूरी मानवता की जिम्मेदारी है।