
उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड के साथ-साथ वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्तर एक बार फिर ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुँच गया है। दिसंबर 2025 में आयोजित ‘नेशनल हेल्थ समिट’ में विशेषज्ञों ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है: जहरीली हवा अब केवल सांस की बीमारी का कारण नहीं रही, बल्कि यह सीधे तौर पर हृदय (Heart) को निशाना बना रही है। डॉक्टरों की यह नई चेतावनी विशेष रूप से युवाओं के लिए चिंता का विषय है।
प्रदूषण कैसे करता है दिल पर हमला?
जब हम प्रदूषित हवा में सांस लेते हैं, तो इसमें मौजूद सूक्ष्म कण, जिन्हें PM 2.5 (Particulate Matter 2.5) कहा जाता है, इतने छोटे होते हैं कि वे फेफड़ों की बाधा को पार कर सीधे हमारे रक्तप्रवाह (Bloodstream) में प्रवेश कर जाते हैं।
एक बार रक्त में पहुँचने के बाद, ये कण निम्नलिखित समस्याएं पैदा करते हैं:
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धमनियों में सूजन (Arterial Inflammation): ये कण रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर सूजन पैदा करते हैं, जिससे धमनियां संकुचित हो जाती हैं।
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ब्लड क्लॉटिंग (Ract Thakka): प्रदूषित हवा रक्त को गाढ़ा बनाती है, जिससे थक्के जमने का खतरा बढ़ जाता है। यही थक्के आगे चलकर ‘हार्ट अटैक’ का कारण बनते हैं।
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हार्ट इन्फ्लेमेशन: हालिया शोध बताते हैं कि प्रदूषण हृदय की मांसपेशियों में सीधे सूजन (Myocarditis) पैदा कर सकता है, जिससे दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है।
युवाओं में बढ़ता खतरा
पहले माना जाता था कि हृदय रोग केवल बुजुर्गों या पहले से बीमार लोगों को प्रभावित करते हैं। लेकिन 2025 के आंकड़े बताते हैं कि 30 से 45 वर्ष की आयु के युवाओं में सडन कार्डियक अरेस्ट के मामले बढ़े हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक उच्च AQI वाले क्षेत्रों में रहने से युवाओं की धमनियों में ‘प्लाक’ (कचरा) जमने की गति तेज हो गई है।
विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह और बचाव के उपाय
सर्दियों के इन महीनों में, जब स्मॉग (Smog) की चादर गहरी होती है, डॉक्टरों ने निम्नलिखित सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
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आउटडोर एक्सरसाइज से बचें: सुबह के समय प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है। इसलिए, पार्क में दौड़ने या भारी व्यायाम करने के बजाय घर के अंदर (Indoor) योग या कार्डियो करें।
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N95 मास्क का उपयोग: साधारण कपड़े का मास्क PM 2.5 कणों को नहीं रोक सकता। बाहर निकलते समय केवल N95 या N99 मास्क का ही उपयोग करें।
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एंटी-ऑक्सीडेंट आहार: अपने भोजन में विटामिन C, E और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें (जैसे आंवला, अखरोट, अलसी) शामिल करें। ये शरीर के अंदर प्रदूषण से होने वाली क्षति (Oxidative Stress) को कम करने में मदद करते हैं।
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एयर प्यूरीफायर: यदि संभव हो, तो घर के अंदर एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें और घर में ऐसे पौधे लगाएं जो हवा को शुद्ध करते हों (जैसे स्नेक प्लांट या एलोवेरा)।
निष्कर्ष
हवा की गुणवत्ता केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी’ बन चुकी है। डॉक्टरों की यह चेतावनी हमें याद दिलाती है कि जब AQI 300 के पार हो, तो गहरी सांस लेना सेहत के लिए फायदेमंद नहीं, बल्कि जानलेवा हो सकता है। सतर्कता ही इस अदृश्य खतरे से बचने का एकमात्र रास्ता है।