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वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत का विस्तार: बुजुर्गों को मिला सम्मान और सुरक्षा का कवच

भारत सरकार ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और संवेदनशील निर्णय लेते हुए आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के दायरे को व्यापक रूप से बढ़ा दिया है। 5 फरवरी, 2026 तक प्राप्त नवीनतम अपडेट के अनुसार, अब देश के 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को ‘यूनिवर्सल हेल्थ एक्सेस’ के तहत कवर किया जाएगा।

यह कदम भारत की बदलती जनसांख्यिकी को देखते हुए उठाया गया है, जहाँ बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है और उन्हें गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा देखभाल की सबसे अधिक आवश्यकता है।


1. 6 करोड़ बुजुर्गों को मिलेगा ‘सुरक्षा कवच’

इस विस्तार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह आय सीमा से परे है। अब परिवार की आर्थिक स्थिति चाहे जो भी हो, 70 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिक 5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज के हकदार होंगे।

  • अलग कार्ड का प्रावधान: पात्र वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक विशिष्ट ‘गोल्डन कार्ड’ जारी किया जा रहा है।

  • पहले से मौजूद बीमारियाँ: इस योजना के तहत उम्र से संबंधित बीमारियों जैसे हृदय रोग, घुटने का प्रत्यारोपण (Knee Replacement), और कैंसर के इलाज को प्राथमिकता दी गई है।

  • सम्मानजनक जीवन: अक्सर रिटायरमेंट के बाद चिकित्सा खर्चों के लिए बुजुर्गों को अपने बच्चों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब यह योजना उन्हें ‘आत्मनिर्भर स्वास्थ्य सुरक्षा’ प्रदान करेगी।


2. स्वास्थ्य बजट 2026-27: 10% की बड़ी बढ़ोतरी

बुजुर्गों के लिए इस व्यापक योजना को वित्तीय रूप से सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के स्वास्थ्य बजट में 10% की वृद्धि की है। यह अतिरिक्त फंड निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में निवेश किया जाएगा:

  • नए ट्रॉमा सेंटरों की स्थापना: सड़क दुर्घटनाओं और आपातकालीन स्थितियों में जान बचाने के लिए जिला स्तर के अस्पतालों में अत्याधुनिक ट्रॉमा सेंटर बनाए जाएंगे।

  • ग्रामीण बुनियादी ढांचा: बजट का एक बड़ा हिस्सा ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स’ को अपग्रेड करने में खर्च होगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को प्राथमिक इलाज के लिए शहरों की ओर न भागना पड़े।


3. ‘यूनिवर्सल हेल्थ एक्सेस’ का क्या है मतलब?

‘यूनिवर्सल हेल्थ एक्सेस’ का अर्थ है कि स्वास्थ्य सेवाएँ बिना किसी वित्तीय कठिनाई के सभी के लिए उपलब्ध होनी चाहिए।

  • कैशलेस और पेपरलेस: वरिष्ठ नागरिक सूचीबद्ध निजी और सरकारी अस्पतालों में बिना नकद भुगतान किए इलाज करा सकेंगे।

  • निजी अस्पतालों की भागीदारी: सरकार ने निजी अस्पतालों के लिए ‘रीइंबर्समेंट रेट्स’ (प्रतिपूर्ति दरों) में भी संशोधन किया है, ताकि वे बुजुर्गों को बेहतर सेवाएँ देने के लिए प्रोत्साहित हों।


4. समाज पर प्रभाव और भविष्य की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत में ‘सिल्वर इकोनॉमी’ (बुजुर्गों पर केंद्रित अर्थव्यवस्था) को मजबूती देगा। जब परिवार का चिकित्सा पर होने वाला खर्च कम होगा, तो वह पैसा अन्य उत्पादक कार्यों में लग सकेगा। साथ ही, जिला अस्पतालों में बुनियादी ढांचा मजबूत होने से मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

चुनौतियां: इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डिजिटल कार्ड बनाने की प्रक्रिया कितनी सरल है और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता कितनी बढ़ती है। सरकार ने इसके लिए ‘आयुष्मान मित्र’ की तैनाती की है जो अस्पतालों में बुजुर्गों की सहायता करेंगे।

निष्कर्ष: वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयुष्मान भारत का यह विस्तार केवल एक नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि देश के प्रति उनकी दशकों की सेवा का सम्मान है। बजट में 10% की बढ़ोतरी और बुनियादी ढांचे पर ध्यान देना यह दर्शाता है कि भारत अब “बीमारी के इलाज” से आगे बढ़कर “स्वास्थ्य सुरक्षा” की ओर कदम बढ़ा चुका है।

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