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मोटापे के खिलाफ वैश्विक जंग: WHO की क्रांतिकारी गाइडलाइन और GLP-1 दवाओं का महत्व

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आज, 20 दिसंबर 2025 को दुनिया भर में तेजी से बढ़ती मोटापे की समस्या से निपटने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। पहली बार, संगठन ने मोटापे (Obesity) के चिकित्सकीय उपचार के लिए आधुनिक दवाओं, विशेष रूप से GLP-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट (जैसे सेमाग्लूटाइड और टिर्ज़ेपाटाइड) के उपयोग पर एक व्यापक वैश्विक गाइडलाइन जारी की है।

यह कदम मोटापे को केवल एक जीवनशैली की समस्या मानने के बजाय इसे एक गंभीर क्रोनिक बीमारी के रूप में स्वीकार करने की दिशा में बड़ा बदलाव है।


GLP-1 दवाएं क्या हैं और ये कैसे काम करती हैं?

GLP-1 (ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1) दवाएं मूल रूप से टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए विकसित की गई थीं, लेकिन शोध में इनके वजन घटाने के अद्भुत परिणाम सामने आए।

  • भूख पर नियंत्रण: ये दवाएं मस्तिष्क के उस हिस्से को लक्षित करती हैं जो भूख और तृप्ति (Satiety) को नियंत्रित करता है। इससे व्यक्ति को जल्दी पेट भरा हुआ महसूस होता है।

  • धीमा पाचन: ये दवाएं पेट के खाली होने की प्रक्रिया को धीमा कर देती हैं, जिससे रक्त शर्करा (Blood Sugar) का स्तर स्थिर रहता है।

WHO गाइडलाइन की मुख्य बातें: ‘दवा ही सब कुछ नहीं’

WHO ने स्पष्ट किया है कि इन दवाओं को “जादुई गोली” (Magic Pill) के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। नई गाइडलाइन के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. पूरक उपचार (Complementary Therapy): इन दवाओं का उपयोग केवल तभी किया जाना चाहिए जब संतुलित आहार (Diet) और नियमित व्यायाम (Exercise) वांछित परिणाम न दे रहे हों। यह जीवनशैली में बदलाव का विकल्प नहीं, बल्कि उसका समर्थन करने वाला एक साधन है।

  2. चिकित्सीय निगरानी: WHO ने चेतावनी दी है कि इन दवाओं का उपयोग केवल योग्य डॉक्टरों की देखरेख में ही होना चाहिए, क्योंकि इनके कुछ दुष्प्रभाव (जैसे मतली, उल्टी या अग्न्याशय से जुड़ी समस्याएं) हो सकते हैं।

  3. लक्षित समूह: यह गाइडलाइन विशेष रूप से उन वयस्कों के लिए है जिनका BMI (बॉडी मास इंडेक्स) 30 से अधिक है, या जिनका BMI 27 है और वे मोटापे से जुड़ी अन्य बीमारियों (जैसे उच्च रक्तचाप या हृदय रोग) से जूझ रहे हैं।

‘फेयर एक्सेस’: अमीर-गरीब की खाई पाटने की कोशिश

वर्तमान में ये दवाएं (जैसे ओज़ेम्पिक या वेगोवी) बहुत महंगी हैं, जिससे केवल अमीर देशों के लोग ही इनका लाभ उठा पा रहे हैं।

  • किफायती दाम: WHO ने दवा निर्माता कंपनियों से अपील की है कि वे कम और मध्यम आय वाले देशों के लिए इन दवाओं की कीमतें कम करें।

  • जेनेरिक निर्माण: संगठन ने ‘पैटेंट’ नियमों में लचीलेपन और स्थानीय स्तर पर जेनेरिक दवाओं के उत्पादन को बढ़ावा देने की वकालत की है ताकि ‘फेयर एक्सेस’ (न्यायसंगत पहुंच) सुनिश्चित हो सके।

मोटापे का वैश्विक बोझ

आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 1 अरब से अधिक लोग मोटापे से ग्रस्त हैं। मोटापे से न केवल जीवन की गुणवत्ता कम होती है, बल्कि यह स्वास्थ्य प्रणालियों पर भारी आर्थिक बोझ भी डालता है। WHO की यह नई गाइडलाइन भविष्य में गैर-संचारी रोगों (जैसे स्ट्रोक, कैंसर और मधुमेह) की दर को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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