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मेटाबॉलिक हेल्थ में नया मोड़: हाई-शुगर मरीजों के लिए ‘कीटो डाइट’ और एक्सरसाइज का जुगलबंदी

नई दिल्ली/वर्जीनिया। अक्सर यह देखा जाता है कि उच्च रक्त शर्करा (High Blood Sugar) से पीड़ित व्यक्ति जब जिम जाते हैं या पैदल चलते हैं, तो उनके शरीर को वह सकारात्मक परिणाम नहीं मिल पाते जो एक स्वस्थ व्यक्ति को मिलते हैं। वर्जीनिया टेक के शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया स्टडी में इस पहेली को सुलझा लिया है और समाधान के रूप में ‘कीटोजेनिक डाइट’ (Keto Diet) को पेश किया है।

समस्या: क्यों एक्सरसाइज नहीं करती हाई-शुगर पर असर?

वैज्ञानिकों के अनुसार, जब रक्त में ग्लूकोज का स्तर लगातार उच्च बना रहता है, तो शरीर की मांसपेशियां ‘इंसुलिन रेजिस्टेंट’ हो जाती हैं। इस अवस्था में, मांसपेशियों के भीतर मौजूद माइटोकॉन्ड्रिया (कोशिका का पावरहाउस) एक्सरसाइज के दौरान मिलने वाले संकेतों को सही ढंग से नहीं पढ़ पाते। सरल शब्दों में कहें तो, हाई शुगर एक्सरसाइज के लाभों को ‘ब्लॉक’ कर देती है, जिससे वजन घटाना और मांसपेशियों का निर्माण कठिन हो जाता है।


कीटो डाइट कैसे बदलती है शरीर का इंजन?

कीटोजेनिक डाइट एक ऐसा आहार है जिसमें फैट (वसा) की मात्रा बहुत अधिक और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा नगण्य होती है। इस शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि जब कोई हाई-शुगर का मरीज कीटो डाइट अपनाता है, तो उसका शरीर ऊर्जा के लिए ‘ग्लूकोज’ के बजाय ‘कीटोन्स’ (फैट से बनने वाला ईंधन) का उपयोग करने लगता है।

रिसर्च के प्रमुख निष्कर्ष:

  1. मांसपेशियों का पुनर्जीवन: कीटो डाइट मांसपेशियों की कोशिकाओं के भीतर उस बाधा को हटा देती है जो हाई शुगर ने पैदा की थी। इससे मांसपेशियां एक्सरसाइज के प्रति अधिक संवेदनशील (Sensitive) हो जाती हैं।

  2. माइटोकॉन्ड्रियल दक्षता: शोध में देखा गया कि कीटो डाइट पर रहने वाले मरीजों में एक्सरसाइज के दौरान माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता 30% तक बढ़ गई

  3. शुगर कंट्रोल: आहार बदलने के महज कुछ हफ्तों के भीतर उपवास रक्त शर्करा (Fasting Blood Sugar) के स्तर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई।


एक्सरसाइज के लाभों का ‘एम्पलीफिकेशन’

इस स्टडी का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि कीटो डाइट और एक्सरसाइज का मेल ‘1+1=11’ की तरह काम करता है।

  • तेजी से फैट लॉस: जो मरीज केवल एक्सरसाइज कर रहे थे, उनकी तुलना में कीटो डाइट के साथ एक्सरसाइज करने वालों ने पेट की चर्बी (Visceral Fat) को दोगुनी तेजी से घटाया।

  • बेहतर रिकवरी: कीटोन्स शरीर में सूजन (Inflammation) को कम करते हैं, जिससे एक्सरसाइज के बाद होने वाला मांसपेशियों का दर्द कम हो जाता है।

सावधानी और विशेषज्ञों की राय

हालांकि यह शोध ‘कीटो’ के पक्ष में मजबूत तर्क देता है, लेकिन वर्जीनिया टेक के वैज्ञानिकों ने कुछ सावधानियां भी बरतने की सलाह दी है।

  • विशेषज्ञ की देखरेख: कीटो डाइट हर किसी के लिए नहीं है। किडनी की समस्या या हृदय रोगों से पीड़ित लोगों को इसे बिना डॉक्टर की सलाह के शुरू नहीं करना चाहिए।

  • इलेक्ट्रोलाइट संतुलन: कीटो डाइट के दौरान शरीर से पानी और नमक तेजी से निकलता है, इसलिए एक्सरसाइज के दौरान हाइड्रेशन का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।


निष्कर्ष

यह शोध उन लाखों लोगों को नई उम्मीद देता है जो मेहनत (एक्सरसाइज) तो बहुत करते हैं लेकिन हाई-शुगर के कारण परिणाम नहीं देख पाते। ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ की यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि सही ‘ईंधन’ (डाइट) के बिना ‘इंजन’ (शरीर) की सर्विसिंग (एक्सरसाइज) अधूरी है। यदि आप भी हाई-शुगर से परेशान हैं, तो अपनी फिटनेस दिनचर्या में कीटो डाइट के समावेश पर अपने डॉक्टर से परामर्श कर सकते हैं।

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