
नई दिल्ली/रांची, 1 मार्च 2026: भारत सरकार ने देश में मानसिक रोगों के बढ़ते मामलों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को देखते हुए आज एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। झारखंड के रांची और असम के तेजपुर में दो नए राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (National Level Mental Health Institutes) स्थापित करने की आधिकारिक प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। यह कदम न केवल पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के लिए, बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य ढांचे के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।
1. क्यों चुने गए रांची और तेजपुर?
इन दो शहरों का चयन रणनीतिक रूप से किया गया है:
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ऐतिहासिक महत्व: रांची (RINPAS और CIP) और तेजपुर (LGBRIMH) पहले से ही मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी पहचान रखते हैं। नए संस्थानों को इन्हीं परिसरों के पास या इनके अपग्रेडेशन के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि मौजूदा बुनियादी ढांचे का लाभ उठाया जा सके।
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क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करना: उत्तर और पश्चिम भारत की तुलना में पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों (Psychiatrists) और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट की भारी कमी है। ये संस्थान इस गैप को भरेंगे।
2. संस्थानों की त्रिस्तरीय भूमिका (Three-Tier Role)
ये केवल अस्पताल नहीं होंगे, बल्कि ‘उत्कृष्टता केंद्र’ (Centres of Excellence) के रूप में कार्य करेंगे:
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आधुनिक उपचार (Advanced Treatment): यहाँ डिप्रेशन, सिजोफ्रेनिया और एंग्जायटी जैसे सामान्य रोगों के अलावा ऑटिज्म, डिमेंशिया और नशामुक्ति (De-addiction) के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी।
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उच्च स्तरीय अनुसंधान (Cutting-edge Research): भारतीय मस्तिष्क की संरचना और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार मानसिक रोगों के कारणों और उनके इलाज पर रिसर्च की जाएगी। डिजिटल थेरेपी और टेली-साइकियाट्री पर विशेष जोर दिया जाएगा।
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विशेषज्ञों की ट्रेनिंग (Specialist Training): यहाँ से हर साल सैकड़ों की संख्या में नए मनोचिकित्सक, नर्स और काउंसलर प्रशिक्षित होकर निकलेंगे, जो देश के अन्य हिस्सों में जाकर सेवाएं देंगे।
3. ‘टेली-मानस’ के साथ एकीकरण
सरकार की योजना इन संस्थानों को ‘टेली-मानस’ (Tele-MANAS) हेल्पलाइन से सीधे जोड़ने की है।
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लाभ: यदि टेली-परामर्श के दौरान किसी मरीज की स्थिति गंभीर पाई जाती है, तो उसे तुरंत रांची या तेजपुर के इन संस्थानों में रेफर किया जा सकेगा।
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डिजिटल रिकॉर्ड: मरीजों का डेटा ‘डिजिटल हेल्थ आईडी’ के माध्यम से सुरक्षित रखा जाएगा ताकि देश के किसी भी कोने में उनका फॉलो-अप इलाज संभव हो सके।
4. सामाजिक प्रभाव: कलंक (Stigma) को मिटाना
इन संस्थानों की स्थापना का एक बड़ा उद्देश्य मानसिक रोगों से जुड़े सामाजिक ‘कलंक’ को खत्म करना है।
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जागरूकता अभियान: संस्थान के साथ ‘कम्युनिटी आउटरीच’ प्रोग्राम जोड़े जाएंगे, जो गांवों और कस्बों में जाकर लोगों को बताएंगे कि मानसिक रोग भी शारीरिक रोगों की तरह ही सामान्य हैं और इनका इलाज संभव है।
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सुलभता: अब पूर्वी भारत के मरीजों को इलाज के लिए निमहंस (NIMHANS, बेंगलुरु) जैसे दूरस्थ संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
5. बजट और समय सीमा
इन दोनों परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक तौर पर ₹2,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। निर्माण कार्य को ‘मिशन मोड’ में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि अगले 24 से 30 महीनों में यहाँ ओपीडी (OPD) सेवाएं शुरू की जा सकें।
निष्कर्ष
रांची और तेजपुर में इन संस्थानों की शुरुआत यह दर्शाती है कि अब ‘स्वास्थ्य’ का अर्थ केवल शारीरिक तंदुरुस्ती नहीं, बल्कि मानसिक सुख-शांति भी है। यह कदम भारत को ‘मानसिक स्वास्थ्य के वैश्विक मानचित्र’ पर मजबूती से स्थापित करेगा।