
नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली, डिजिटल लत और बढ़ते प्रतिस्पर्धी दबाव के बीच भारत में ‘मानसिक स्वास्थ्य’ एक गंभीर संकट के रूप में उभरा है। इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बजट 2026 में एक दूरदर्शी घोषणा की है—बेंगलुरु स्थित प्रतिष्ठित संस्थान की तर्ज पर उत्तर भारत में ‘निमहांस-2’ (NIMHANS-2) की स्थापना। यह नया संस्थान राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और स्नायु विज्ञान संस्थान के रूप में कार्य करेगा, जो न केवल उपचार प्रदान करेगा बल्कि इस क्षेत्र में उच्च स्तरीय अनुसंधान (Research) का केंद्र भी बनेगा।
क्यों महसूस हुई ‘निमहांस-2’ की आवश्यकता?
बेंगलुरु का मूल निमहांस संस्थान दक्षिण भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का स्तंभ रहा है, लेकिन उत्तर भारत के मरीजों को वहां तक पहुंचने में भौगोलिक और आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। बजट 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में विशेष रूप से 15 से 29 वर्ष के युवाओं में अवसाद (Depression), चिंता (Anxiety) और आत्महत्या की प्रवृत्तियां तेजी से बढ़ी हैं।
डिजिटल क्रांति के इस युग में ‘स्क्रीन एडिक्शन’ और ‘सोशल मीडिया आइसोलेशन’ ने युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे में एक समर्पित संस्थान की कमी लंबे समय से खल रही थी जो आधुनिक तकनीकों और भारतीय मनोविज्ञान के मेल से उपचार कर सके।
संस्थान की मुख्य विशेषताएं और उद्देश्य
‘निमहांस-2’ केवल एक अस्पताल नहीं होगा, बल्कि इसके कई व्यापक लक्ष्य होंगे:
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विशेषज्ञ उपचार: यहाँ स्किज़ोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर और गंभीर अवसाद जैसे रोगों के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
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डिजिटल डिटॉक्स केंद्र: इस संस्थान में ‘डिजिटल एडिक्शन’ से निपटने के लिए विशेष विभाग बनाया जाएगा, जो स्मार्टफोन और इंटरनेट की लत से जूझ रहे युवाओं की काउंसिलिंग करेगा।
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अनुसंधान और प्रशिक्षण: यहाँ से प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक और मनोरोग चिकित्सक (Psychiatrists) देश के अन्य हिस्सों में सेवाएं देंगे।
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टेली-मानस का विस्तार: संस्थान सरकार की मौजूदा ‘टेली-मानस’ (Tele-MANAS) सेवा के लिए एक नोडल केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जिससे घर बैठे लोगों को सहायता मिल सके।
युवाओं पर विशेष ध्यान
सरकार का मानना है कि देश की ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ (Demographic Dividend) तभी सुरक्षित रह सकती है जब युवा मानसिक रूप से स्वस्थ हों। ‘निमहांस-2’ स्कूलों और कॉलेजों के साथ मिलकर ‘अर्ली इंटरवेंशन’ (शुरुआती पहचान) कार्यक्रम चलाएगा। अक्सर देखा गया है कि लोग लोकलाज के डर से मानसिक बीमारी को छुपाते हैं। यह संस्थान ‘कलंक’ (Stigma) को मिटाने के लिए सामुदायिक जागरूकता अभियान भी संचालित करेगा।
क्षेत्रीय विकास और पहुंच
उत्तर भारत में इसकी स्थापना से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों के करोड़ों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे मरीजों को इलाज के लिए हजारों किलोमीटर दूर जाने की जरूरत नहीं होगी और उन्हें उनके ही परिवेश में विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा।
निष्कर्ष
‘निमहांस-2’ की घोषणा यह दर्शाती है कि अब मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य के समान ही प्राथमिकता दी जा रही है। यह संस्थान आने वाले वर्षों में भारत की मानसिक स्वास्थ्य नीति का मुख्य आधार बनेगा और लाखों लोगों के जीवन में नई आशा का संचार करेगा।